सौंदर्य पर उद्धरण
सौंदर्य सुंदर होने की
अवस्था या भाव है, जो आनंद और संतोष की अनुभूति प्रदान करता है। सौंदर्य के मानक देश, काल, विषय और प्रसंग में बदलते रहते हैं। प्रस्तुत चयन में उन कविताओं को शामिल किया गया है; जिनमें सुंदरता शब्द, भाव और प्रसंग में प्रमुखता से उपस्थित है।
रूप, गुण, आयु और त्याग—ये चार साधन मनुष्य को सौभाग्यशाली बनाते हैं।
रूप-विद्या मनुष्य को विषय के सत्य तक पहुँचा देना चाहती है।
रंग और रूप में अविच्छेद्य संबंध होता है। जहाँ रूप वहाँ रंग, जहाँ रंग वहाँ रूप। यह है प्राकृतिक नियम।
जो कला होती है वह सुंदर और सत्य होती है, जो बनावट होती है वह असुंदर और असत्य होती है।
सक्षम सुंदर अभिव्यक्ति तो अविरत साधना और श्रम के फलस्वरूप उत्पन्न होती है।
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स्त्रियों को बचपन से ही सिखाया जाता है कि सुंदरता उनका छत्र है, इसलिए मन शरीर को आकार देता है और अपने चमकदार पिंजरे में घूमते हुए केवल अपनी जेल को सजाना चाहता है।
सौंदर्यबोध की दृष्टि से विचार करने पर भी प्रेम की सार्थकता असंदिग्ध है।
बाहर से हमारे मन में सुंदर जिस मार्ग से आता है, असुंदर भी इसी मार्ग से आता रहता है।
स्त्री को पाकर, स्त्री को समझकर, उसे अपनी बाँहों और आत्मा में महसूस करके ही प्रकृति की गति और प्रकृति की सुंदरता को और प्रकृति के रहस्य को लिया, भोगा और समझा जा सकता है।
हमारा सारा सौंदर्य जिए हुए और सोचे हुए के बीच के दुखद अंतर्विरोध की छवि है।
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पृथ्वी अपनी गणना में अद्वितीय है। इसकी सुंदरता को केवल पैदल यात्री ही महसूस कर सकता
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चेहरे को चेहरा कहने की अपेक्षा उसे अनंत सौंदर्य का दर्शन कहना सत्य के अधिक निकट होगा।
जीवन में जो सुंदर है, वह पेंटिंग में ख़राब हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि इसमें बहुत अधिक सुंदरता है। एक अच्छी तस्वीर को जिस तरह से चमकना चाहिए, उसके लिए उसमें कुछ बुरा होना आवश्यक है। उसे अँधेरे की आवश्यकता होती है।
सौंदर्य की उपासना हमें कई बार असुंदरता की देहरी पर ला देती है।
करुणा में एक उदास सौंदर्य की उपलब्धि एक सर्वसाधारण अनुभव है।
जीवन के किसी क्षण में दुनिया की सुंदरता पर्याप्त हो जाती है। आपको इसके फ़ोटो लेने, इसे रँगने, या यहाँ तक कि इसे याद रखने की भी ज़रूरत नहीं है। वह स्वयं में पर्याप्त है।
संसार भर में कहाँ है नारी के नेत्र के समान सौंदर्य सिखाने वाला अन्य लेखक?
नायक के धन से सारे शरीर पर अलंकार योग अर्थात् ख़ुद के लिए आभूषण आदि बनवाना, भवन को कलात्मक ढंग से सजाना, क़ीमती बरतनों को ख़रीदवाना, परिचारकों द्वारा घर को स्वच्छ रखना—ये रूपाजीवा नायिका के विशेष लाभ हैं।
सूरदास की सौंदर्य-चेतना और नैतिक चेतना में कोई अंतराल नहीं है। उनका काव्य, नैतिकता के उपदेश का काव्य नहीं है।
यौन आवेग से प्रभावित होकर सौंदर्य-संबंधी मान्यताएँ बदल जाती हैं। प्रेमी की दृष्टि से बहुत-सी बातें सुंदर होती हैं, जो अप्रेमी की दृष्टि से सुंदर नहीं हैं और प्रेमी जिस हद तक अपने आवेग से विचलित होगा, उसी हद तक उसकी सौंदर्य-संबंधी मान्यताएँ बदल जाएँगी।
राम में सौंदर्य, शक्ति और शील, तीनों की चरम अभिव्यक्ति एक साथ समन्वित होकर; मनुष्य के संपूर्ण हृदय को—उसके किसी एक ही अंश को नहीं—आकर्षित कर लेती है।
मिलने आने वाली प्रेमिका के वस्त्र; यदि वर्षा के कारण भीग गए हों और वह शृंगार-भ्रष्ट हो गई हो, तो नायक का कर्तव्य है कि वह ख़ुद ही प्रेमिका के वस्त्र बदल, उसका पुनः शृंगार करे।
सभ्यता के हर बड़े केंद्र में सौंदर्य का राष्ट्रीय आदर्श, अद्भुत दिशाओं में पल्लवित होता रहता है और वैदेशिक आदर्शों तथा फ़ैशनों को, देशी आदर्शों तथा फ़ैशनों के मुक़ाबले में तरजीह दी जाती है।
संवेदना, सरोकार और सौंदर्य की आकांक्षा के अभाव में सृजन संभव ही नहीं है।
मानव में रूप, गुण और यौवन के होते हुए भी यदि उदारता नहीं है, तो सभी विशेषताएँ निरर्थक हो जाती हैं।
जिन मनोवृत्तियों का अधिकतर बुरा रूप हम संसार में देखा करते हैं, उनका भी सुंदर रूप कविता ढूँढ़कर दिखाती है।
सुंदर अर्थ की शोभा बढ़ाने में जो अलंकार प्रयुक्त नहीं, वे काव्यालंकार नहीं हैं। वे ऐसे ही हैं, जैसे शरीर पर से उतारकर किसी अलग कोने में रखा हुआ गहनों का ढेर। किसी भाव या मार्मिक भावना से असम्पृक्त अलंकार, चमत्कार या तमाशे हैं।
भारतवर्षीय संहिता में नर-नारी का संयत संबंध, कठिन अनुशासन के भीतर आदिष्ट है—कालिदास के काव्य में वही सौंदर्य के उपकरण में गठित है।
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जो लोग सौंदर्य के उपभोग में उन्मत्त हैं, उनकी यंत्रणा कैसी है, इसका अनुभव मैं भोजन करने के लिए बैठने पर ही करता हूँ। मेरे जीवन में घोर दुःख यह है कि अन्न-व्यंजन थाली में रखते-रखते ही ठंडे हो जाते हैं। उसी प्रकार सौंदर्य-रूपी मोटे चावल का भात है, प्रेम-रूपी केला के पत्तल पर डालते ही ठंडा हो जाता है—फिर कौन रुचि से उसे खाए? अंत में वेश-भूषा-रूपी इमली की चटनी मिलाकर, ज़रा अदरक-नमक के क़तरे डालकर किसी तरह निगल जाना पड़ता है।
कविता सृष्टि-सौंदर्य का अनुभव कराती है, और मनुष्य को सुंदर वस्तुओं में अनुरक्त करती है।
घुमक्कड़ प्रकृति या मानवता को तटस्थ दृष्टि से नहीं देखता, उनके प्रति उसकी अपार सहानुभूति होती है और यदि वह वहाँ पहुँचता है; तो केवल अपनी घुमक्कड़ी प्यास ही पूरा नहीं करता, बल्कि दुनिया का ध्यान उन पिछड़ी जातियों की ओर आकृष्ट करता है।
मनुष्य के कठोर, मधुर और तीक्ष्ण—दो पक्ष हैं और बराबर रहेंगे। काव्यकला की पूरी रमणीयता इन दोनों पक्षों के समन्वय के बीच, मंगल या सौंदर्य के विकास में दिखाई पड़ती है।
नागरक को चाहिए कि नगर, राजधानी तथा गाँव में उस स्थान पर मकान बनवाए, जहाँ पर जलाशय हों। मकान के चयन में नागरक को इसका ध्यान रखना चाहिए कि नदी, सरोवर आदि के किनारे वृक्ष, वाटिका, उद्यान से सुशोभित भवन होना चाहिए। नागरक के घर में दो खंड होने चाहिए—एक अंतःप्रकोष्ठ, दूसरा बहिःप्रकोष्ठ।
जो किसी मुख के लावण्य, वन-स्थली की सुषमा, नदी या शैलतटी की रमणीयता, कुसुमविकास की प्रफुल्लता, ग्रामदृश्यों की सरल माधुरी देख मुग्ध नहीं होता, जो किसी प्राणी के कष्ट-व्यंजक रूप और चेष्टा पर करुणार्द्र नहीं होता; जो किसी पर निष्ठुर अत्याचार होते देख क्रोध से नहीं तिलमिलाता—उसमें काव्य का सच्चा प्रभाव ग्रहण करने की क्षमता कभी नहीं हो सकती।
जीवन का रहस्य ही अंतिम जिज्ञासा है। यही तो मानवीय प्रज्ञा का सुंदर पहलू है।
मूर्धन्य कवियों में कुछ ही ऐसे हुए हैं, जिन्होंने अपनी कल्पनाओं के शुद्ध सौंदर्य को उसकी निर्वसन सत्यता और तेजस्विता में प्रस्तुत किया हो।
जो रहस्य से घिरा होता है, वह अधिक सुंदर दिखता है।
मौत सुंदरता की जननी है। केवल नाशवान वस्तु सुंदर हो सकती है, इसीलिए हम पर नक़ली फूलों का कोई असर नहीं होता है।
जब भी आप अपने आस-पास सुंदरता का निर्माण कर रहे होते हैं, आप अपनी आत्मा को बहाल कर रहे होते हैं।
यह सब झूठ था, सब बदबू कर रहा था, झूठ की बदबू, यह सब अर्थ, ख़ुशी और सुंदरता का भ्रम देता था।
तुम्हें मुझे समझना होगा, क्योंकि मैं कोई किताब नहीं हूँ। इसलिए मेरे मरने के बाद मुझे कोई नहीं पढ़ सकता, मुझे जीते जी ही समझना होगा।
देखा; किंतु मुझे उसकी सुंदरता के बारे में बताया गया है। मैं जानती हूँ कि उसकी सुंदरता सदैव ही अधूरी और टूटी-फूटी होती है। वह आसमान पर कभी भी पूर्णाकार में प्रकट नहीं होता। यही बात उन सभी चीज़ों के बारे में सही है जिन्हें हम पृथ्वी वाले जानते हैं। जिस तरह इंद्रधनुष का वृत्त खंडित होता है, उसी तरह जीवन भी अधूरा है और हममें से हरेक के लिए टूटा-फूटा है। हम ब्राउनिंग के इन शब्दों, ‘‘पृथ्वी पर टूटे हुए बिंब, स्वर्ग में एक पूर्ण चंद्र’’ का अर्थ तब तक नहीं समझ सकेंगे, जब तक हम अपने खंड जीवन से अनंत की ओर क़दम नहीं बढ़ा लेते।
औरत जब लड़की में बदल जाए तो बिल्कुल चुप रहो। थक जाए, चुप हो जाए, तो मर्दों का बनाया सबसे झूठा वाक्य बोलो, आप तो ग़ुस्से में और सुंदर हो जाती हैं।
ख़ूबसूरत चीज़ें कुछ नहीं बिगाड़तीं।
अगर आप कहीं जाने की राह पर हैं तो ज़िंदगी ख़ूबसूरत है।
दो लोगों का प्यार में दुनिया से दूर, अकेले होना, यह सुंदर है।
दर्पण में उसकी छवि को देख कर एक ख़ूबसूरत महिला पूरी तरह से मान सकती है कि छवि उसकी ही है। एक बदसूरत महिला जानती है कि ऐसा नहीं है।
आप जैसे ही अपनी आँखों से सौंदर्य का आनंद लेते हैं, आपका दिमाग़ आपको बताता है कि सुंदरता खोखली है और सौंदर्य ख़त्म हो जाता है।
वह कभी नहीं जान पाएगा कि मैं उससे प्रेम करती हूँ : और यह भी कि ऐसा उसकी ख़ूबसूरती के चलते नहीं है, बल्कि वह मुझसे भी बढ़कर मेरा हिस्सा है। हम दोनों की आत्माएँ जिस भी चीज़ की बनी हों, वे एक हैं।
दुनिया में सबसे ख़ूबसूरत चीज़, निस्संदेह, दुनिया ही है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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