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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

18 अक्तूबर 2026

‘रील रसाचार्य : रील में भागते लोग’

‘रील रसाचार्य : रील में भागते लोग’

यह देश एक महामेला है। वैसे तो पूरी दुनिया ही मेलों से बनी-बढ़ी है और मेले और बाज़ार ही थे जिन्होंने इस उपमहाद्वीप को हमेशा के लिए बदल दिया। पुर्तगाली, यूनानी, डच, फ़्रांसीसी, अँग्रेज़ यह सब यहाँ की हा

17 अक्तूबर 2026

आवारा कुत्तों का मसीहा

आवारा कुत्तों का मसीहा

उन दिनों की बात है, जब गाँव में थोड़ी अनबन चल रही थी। उन्हीं दिनों एक आदमी अफ़ीम बेचता था और पैसे कमाता था, लेकिन उन पैसों के बारे में किसी को पता नहीं चलने देता था। बहुत कम लोगों को पता था कि वह अफ़

16 अक्तूबर 2026

‘कोर्ट मार्शल’ की सवर्ण सीमा : जब दलित बोलने लगे तो नाटक ख़त्म हो जाता है

‘कोर्ट मार्शल’ की सवर्ण सीमा : जब दलित बोलने लगे तो नाटक ख़त्म हो जाता है

चंडीगढ़ आने के कुछ साल बाद मेरी माँ की क़रीबी दोस्त वहाँ अपने ननिहाल आईं तो मुझे भी अपनी मौसी के घर ले गईं। बुज़ुर्ग मौसी ने बड़े स्टाइल से दोपहर का भोजन कराया। कई स्वादिष्ट सब्ज़ियाँ और अचार थे। नौक

16 अक्तूबर 2026

दुनिया गोल ही है

दुनिया गोल ही है

हर गोल पूरी तरह गोल नहीं है। जैसे अपनी पृथ्वी जिसे हम गोल कहते हैं, लेकिन वह कहीं-कहीं उभरी हुई है और कहीं गहरी धँसी हुई। सूरज के चारों ओर घूमने वाली पृथ्वी की कक्षा भी तो पूरी तरह गोल नहीं, बल्कि अं

16 अक्तूबर 2026

जगह-जगह 2.0 : अलिफ़ शफ़क़ के दो उपन्यास : सभ्यताओं का नमक और इतिहास की चुप्पियाँ

जगह-जगह 2.0 : अलिफ़ शफ़क़ के दो उपन्यास : सभ्यताओं का नमक और इतिहास की चुप्पियाँ

तुर्की उपन्यासों का नमक सभ्यताओं के बीच संवाद और उनका अंतर्विरोध है। 20वीं सदी के बड़े तुर्की उपन्यासकार गाहे-बगाहे अपनी सही जगह तलाशते रहे हैं। उनके यहाँ आधुनिकता और इस्लाम के बीच फाँक है, यूरोपीय औ

15 अक्तूबर 2026

अनफ़्रेम्ड : टैरेंटीनो के बहाने, हॉलीवुड से इलाहाबाद तक

अनफ़्रेम्ड : टैरेंटीनो के बहाने, हॉलीवुड से इलाहाबाद तक

क़रीब सात साल पहले इन्हीं दिनों क्वेंटिन टैरेंटीनो की फ़िल्म ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन हॉलीवुड’ देखी थी। अक्सर बदलता मौसम आपको पुरानी पढ़ी किताबों, देखी गई फ़िल्मों और ज़माने पहले सुने गए संगीत की याद दिला

15 अक्तूबर 2026

वीरेनियत-8 : तारीख़ की गवाही

वीरेनियत-8 : तारीख़ की गवाही

जीवन को अपनी इच्छा से जीने का रोमांच कितना सुंदर होता है! जीवन के रोमानी बोध मात्र से हृदय खिल उठता है, आस-पास के वातावरण में स्निग्धता घुल जाती है। अनचाहे दृश्य और अनचाहे शोर भी सुंदर लगने लगते हैं।

15 अक्तूबर 2026

कमल-क्रंदन : एक प्रतीक से पुष्प की ओर…

कमल-क्रंदन : एक प्रतीक से पुष्प की ओर…

एक समय था जब मैं केवल एक फूल था किसी सरोवर का। मैं उस दिन सबसे अधिक प्रसन्न था, जिस दिन मेरा कोई नाम नहीं था। सूरज का प्रकाश मेरे ऊपर उतरता था, जल मुझे अपनी गोद में थामे रहता था और ओस की बूँदें आसमान

14 अक्तूबर 2026

प्रोटेस्ट में पहली बार, तजुर्बे बेशुमार

प्रोटेस्ट में पहली बार, तजुर्बे बेशुमार

11 अक्टूबर 2026, रविवार  दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की लाइब्रेरी में बैठा हूँ। दिल्ली में आज सीजेपी का तमाम युवा संगठनों के साथ प्रोटेस्ट है। कई साथियों की तरह बनारस से भी एक साथी का फ़ोन

14 अक्तूबर 2026

रागदर्पण : नियति को मुझसे प्रेम है

रागदर्पण : नियति को मुझसे प्रेम है

नए साल का पहला महीना जब आधा बीतने को था, मैं गए बरस की यादावरी में रही। तमाम लोग अपनी दीवारों पर बीते बरस के नफ़े-नुक़सान का हिसाब-किताब लगाकर, क्या खोया-क्या पाया लिख चुके थे। साल-ए-नौ की आमद का जश्