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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

‘स्मृति ही दूसरा समय है’ : परमानंद श्रीवास्तव पर हुई संगोष्ठी का हाल

 

‘स्मृति ही दूसरा समय है’—मंगलेश डबराल की यह काव्यपंक्ति मन में कौंध रही थी, हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक परमानंद श्रीवास्तव की याद में हो रहे गोरखपुर के आयोजन में जाते हुए। प्रेमचंद साहित्य संस्थान और 'साख

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24 सितम्बर 2026

आज का रचनाकार

रचनाकार का समय और समय का रचनाकार

उत्पल बैनर्जी

सुपरिचित कवि-अनुवादक। बांग्ला के कई महत्वपूर्ण रचनाकारों को बांग्ला से अनुवाद के ज़रिए हिंदी में लाने का श्रेय।

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