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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

मिर्ज़ापुर : कहानीहीन अंतहीन सिनेमा

 

सर पानी में डूबता है, गोली सिर के पीछे से माथे को चीरती हुई निकलती है, पूरा का पूरा पानी सुर्ख़ लाल हो जाता है और इसी कलात्मकता के साथ फ़िल्म सबसे पहले अपने नाम से आपको रूबरू करवाती है। एक पारंपरिक भा

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16 सितम्बर 2026

आज का रचनाकार

रचनाकार का समय और समय का रचनाकार

आलोकधन्वा

समादृत कवि। ‘गोली दाग़ो पोस्टर’, ‘भागी हुई लड़कियाँ’ और ‘सफ़ेद रात’ सरीखी कविताओं के लिए लोकप्रिय।

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