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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

जगह-जगह 2.0 : नज़्म की पूँछ

 

प्रस्तुत आलेख शाइर और अनुवादक रियाज़ लतीफ़ की किताब ‘नज़्म की पूँछ’ पर एकाग्र है। आलेख में अपनी बात रखने के लिए उनकी अन्य रचनाओं के भी कुछ हवाले दिए गए हैं। ‘नज़्म की पूँछ’ 2024 में सुख़नकदा, अहमदा

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25 सितम्बर 2026

आज का रचनाकार

रचनाकार का समय और समय का रचनाकार

गोपालदास नीरज

हिंदी के बेहद लोकप्रिय गीतकार। पद्म भूषण समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित।

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आज की कविता

कविता अब भी संभावना है

आज की रात बड़ी शोख़ बड़ी नटखट है

आज की रात बड़ी शोख़ बड़ी नटखट है

आज तो तेरे बिना नींद नहीं आएगी

गोपालदास नीरज

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