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औरत जब लड़की में बदल जाए तो बिल्कुल चुप रहो। थक जाए, चुप हो जाए, तो मर्दों का बनाया सबसे झूठा वाक्य बोलो, आप तो ग़ुस्से में और सुंदर हो जाती हैं।
पुरुष जब बिस्तर में बेकार हो जाए, बेरोज़गार हो जाए, बीमार हो जाए तो पत्नी को सारे सच्चे-झूठे झगड़े याद आने लगते हैं। तब वह आततायी बन जाती है। उसके सर्पीले दाँत बाहर निकल आते हैं।
उस भाषा के साहित्य का दुर्भाग्य तय है, जहाँ आलोचक महान् हों, कवि नहीं।
सुंदर औरत नादिरशाही होती है। एक-एक करके सब कुछ लूटती है।
एक रमणीय स्त्री का सारा इतिहास प्रेम का इतिहास होता है।
नाटक में शब्दों से मोह हो जाता है। यह फ़ालतू का मोह जानलेवा हो जाता है। अभिनेता के लिए भी, निर्देशक के लिए भी, यह बात मुझे रंजीत कपूर ने बताई थी।
मेरे पास जूते हैं, मुझे मेरे पैर लौटा दो।
तानाशाह प्रेमिका एक प्रेमी से बहुत जल्द उकता जाती है। पालतू बनाने और निस्तेज करने के लिए उसे नया पुरुष चाहिए।
अपने अनुभव से हासिल किया ज्ञान है कि डाॅक्टर और माशूक़ कभी नहीं बदलने चाहिए। आप फ़ालतू सवालों से बच जाते हैं।
वृद्धों और पागलों पर कोई दया नहीं करता।
बच्चे झट से सत्य के आस-पास पहुँच जाते हैं।
प्रेम खिड़की से अंदर आता है, दरवाज़े से बाहर चला जाता है।
एक विशुद्ध कवि जब सहवास कराता है तो ‘निराला’ हो जाता है। ‘जुही की कली’ और ‘राम की शक्ति-पूजा’। एक महान् कवि सहवास कराता है तो मैथिलीशरण गुप्त हो जाता है। राष्ट्रकवि हमेशा अप्रामाणिक होते हैं।
एक औरत बहुत सुंदर हो तो उससे प्रणय-याचना करनी चाहिए।
औरत एक छोटा-सा सुख तो देती है, लेकिन दुख बहुत लंबा देती है। प्रभुजी का बनाया विनाशकारी जीव। उसका घातक सौंदर्य पहले हमें बाँध लेता है, फिर सर्वनाश कर देता है।
जो आयु को चैलेंज करेगा, आस्कर वाइल्ड की 'पिक्चर ऑफ डोरियन ग्रे' बन जाएगा।
दूसरों द्वारा किए गए अपमान का बदला हम अपने से कमज़ोर से लेते हैं।
प्रेम और युद्ध के तरीक़े एक जैसे। जो हारे, वह युद्धबंदी।
एक बहुत ख़ूबसूरत औरत निर्दयी शक्तियों की मल्लिका होती है।
लेखकों के महान् होने का निणर्य भविष्य करता है।
सुंदर औरत कभी सलाह नहीं माँगती, बर्बाद करती है, नहीं तो हो जाती है।
कवियों को आलोचकों और वेश्याओं ने इतना बरबाद नहीं किया, जितना उनकी बीवियों ने।
सत्य कभी भी दयावान नहीं होता। हम कहाँ चुन सकते हैं अपना भाग्य।
प्यार के दिनों में हम शरीर से सुगंध में बदल जाते हैं।
सौंदर्य से आँखें पराई हो जाती हैं और तब प्राप्ति-लालसा बढ़ जाती है।
हिंदी के हैड हमेशा कवि-आलोचक होते हैं।
एक छोटा-सा वाक्य जो जीवन के नब्बे प्रतिशत छोटे-छोटे निजी अवसाद दूर कर देता है—'आय हम सॉरी।'
कविता का अच्छा होना ही काफ़ी नहीं, सवाल यह है कि कविता कहीं जाती भी है।
मंच-संचालक बन जाने से कोई मूर्ख विद्वान नहीं बन जाता।
भीड़ में जब नया आदमी शामिल हो तो पहले से खड़े लोगों को वह बुरा लगता है।
दुख एकदम मज़बूत भी बनाता है, अपने प्रति क्रुअल भी।
ख़ूबसूरत औरतों को चापलूस और चमचा मर्दों की आदत हो जाती है।