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समझना पर उद्धरण

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शरीर एक बदलता हुआ प्रवाह है और मन भी। उन्हें जो किनारे समझ लेते है, वे डूब जाते है।

ओशो
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तीन रात तक संयम धारण करने के बाद; पति को एकांत स्थान केलिगृह में पत्नी के पास जाकर, मीठी-मीठी मनोरञ्जक बातें और स्पर्श आदि मृदु उपचारों से नवविवाहिता वधू में विश्वास पैदा करने और उसकी लज्जा दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए। उस समय संयत भाव से कोमलता एवं मधुरता का व्यवहार करने की आवश्यकता होती है, ज़ोर-ज़बर्दस्ती नहीं करनी चाहिए। ज़ोर-ज़बर्दस्ती करने से कटुता बढ़ती है और दाम्पत्य जीवन दुःखमय बन जाता है। इसलिए पत्नी की इच्छा के विरुद्ध कोई काम नहीं करना चाहिए।

वात्स्यायन
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हमारे भीतर बुद्धिमानी का ज़्यादातर हिस्सा तीस साल पार करने के बाद आता है। उसके बाद हम अपने तौर-तरीक़ों में ढलते जाते हैं और बुद्धिमान होने के साथ-साथ, प्रतिक्रियावादी होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

वेंकी रामकृष्णन
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जो नायक नवविवाहिता कन्या को अत्यंत लज्जावती समझकर उसकी उपेक्षा करता है, स्त्रियों के अभिप्राय को समझने वाला वह पुरुष—पशुओं के समान तिरस्कृत होता है।

वात्स्यायन
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यदि आध्यात्मिक शिक्षा द्वारा नहीं; तो विज्ञान द्वारा ही सही, मनुष्य को यह दार्शनिक सत्य समझ लेना चाहिए कि भौतिक जगत् नाम की कोई चीज़ ही नहीं है। उसका ताना-बाना भी केवल भ्रम है, माया है।

परमहंस योगानंद
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यदि किसी उत्तम काव्य या चित्र की विशेषता समझने के कारण; हम कवि या चित्रकार पर श्रद्धा कर सके, तो यह हमारा अनाड़ीपन है—हमारे रुचि-संस्कार की त्रुटि है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
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जब ग़लतफ़हमियाँ पैदा हों, तो याद रखें कि हम अलग भाषाएँ बोलते हैं; पार्टनर की बात का असली अर्थ क्या है या वह सचमुच क्या कहना चाहता है, उसका अनुवाद करने में थोड़ा समय लगाएँ। इसके लिए निश्चित रूप से अभ्यास की ज़रूरत होती है, लेकिन यह इतना महत्त्वपूर्ण काम है कि आपको इसे करना चाहिए।

जॉन ग्रे
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मेरे विचार से जिस आदमी में थोड़ा-सा भी विवेक होता है, वह हमेशा अपनी परिस्थितियों को तर्कसंगत ढंग से समझना चाहता है।

भगत सिंह
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जब महिलाएँ समस्याओं के बारे में बोलती हैं, तो आम तौर पर पुरुष प्रतिरोध करते हैं। पुरुष को लगता है कि महिला उसके सामने अपनी समस्याओं का दुखड़ा इसलिए रो रही है, क्योंकि वह उसे ज़िम्मेदार ठहरा रही है।

जॉन ग्रे
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हर अच्छी कविता की तरह सूर की कविता भी, श्रद्धा से अधिक समझ की माँग करती है।

मैनेजर पांडेय
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मनुष्य जितना समझता है, उससे कहीं अधिक जानता है।

अल्फ़्रेड एडलर
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इसमें क्या ग़लत है कि अगर दुनिया में कोई आदमी ऐसा हो जिसे आपको समझने की कोशिश करना अच्छा लगता है?

हारुकी मुराकामी
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हर नवीन अनुसंधान करनेवाला विद्रोही होता है, वह प्रकृति से विद्रोह करता है। प्रकृति हर चीज़ को ज़मीन की ओर खींचती है।

हरिशंकर परसाई
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उधार या भाड़े पर लिया गया कोई भी ऐसा व्यक्ति; जो तुम्हारे वर्ग का नहीं है, वह लेशमात्र भी तुम्हारे हितों को नहीं साध सकता।

भीमराव आंबेडकर
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चरित्र को जल्दी भाँप लेने की क्षमता—जिस क्षेत्र में स्त्रियाँ प्रामाणिक तौर पर पुरुषों से आगे हैं—उन्हें स्वाभाविक रूप से सत्ता की योग्य अधिकारिणी बना देता है।

जॉन स्टुअर्ट मिल
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समझ और प्रेम अलग-अलग चीजों से बने होते हैं। समझदारी लोगों को गांठों में बांध देती है और इसमें कोई ख़तरा नहीं लेता है, लेकिन प्यार में कई उलझनें हैं और इसमें हर तरह के ख़तरे हैं।

शम्स तबरेज़ी
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अगर आप पुरुष हैं, तो मेरा सुझाव है कि अगले सप्ताह जब भी कोई महिला बोले, तो आप सुनने का अभ्यास करें। वह किस स्थिति से गुज़र रही है, उसे सम्मानपूर्वक समझने के एकमात्र इरादे के साथ सुनें। जब भी आपके मन में समाधान सुझाने या उसके अहसास को बदलने की इच्छा जाग्रत हो, तो दाँतों तले जीभ दबा लें। ऐसा करने पर वह आपकी इतनी क़द्र करेगी कि आप हैरान रह जाएँगे।

जॉन ग्रे
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संबंधों में महिलाओं की सबसे बड़ी शिकायत यह रहती है—"मुझे यह महसूस ही नहीं होता कि सामने वाले ने मेरी पूरी बात सुनी है।"

जॉन ग्रे
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सहमति या असहमति की बात केवल तब उठती है, जब आप चीज़ों को समझते हैं। अन्यथा यह एक अंधी असहमति होती है, जो किसी भी सवाल को लेकर एक सुसंस्कृत तरीक़ा नहीं हो सकता।

जवाहरलाल नेहरू
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स्त्री को कौन समझ सकता है।

विलियम शेक्सपियर
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जो प्राकृतिक दृश्यों को केवल कामोद्दीन की सामग्री समझते हैं, उनकी रुचि भ्रष्ट हो गई है और संस्कारसापेक्ष है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
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गृहस्थी चलाने के लिए समझदारी की नोक तोड़ देनी चाहिए। आख़िरकार यह मान कर चलना चाहिए कि इस ज़माने में संबंध सिर्फ़ वे ही निभा सकते हैं, जो मूर्ख हैं।

धूमिल
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अशिक्षा या अज्ञान में ऐसी कोई शक्ति नहीं है कि वह किसी मनुष्य को, मानवीयता की सौतेली संतान के नाम से संबोधित करे।

गणेश शंकर विद्यार्थी
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यह बात पूरे विश्वास के साथ कही जा सकती है कि सिर्फ़ वही दो व्यक्ति एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह से जान सकते हैं, जो अंतरंग तो हों ही, साथ ही बराबर भी हों।

जॉन स्टुअर्ट मिल
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तत्त्वज्ञ पुरुष को चाहिए कि वह अपमान को अमृत के समान समझकर उससे संतुष्ट हो और विद्वान मनुष्य सम्मान को विष के तुल्य समझकर उससे सदा डरता रहे।

वेदव्यास
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प्राचीन ग्रंथों को समझने के लिए यह आवश्यक है कि शब्द और यथार्थ के तात्कालिक संबंध को ऐतिहासिक दृष्टि से समझा जाए।

विजयदान देथा
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सच, कर्म और चरित्र को क्रांति के बाद की चीज़ नहीं समझना चाहिए। इन्हें तो क्रांति के साथ-साथ चलना चाहिए।

राममनोहर लोहिया
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क्रूर और नीच मनुष्य यदि कभी आकर नम्रता प्रकट करे तो उसे बहुत डर की बात समझना चाहिए।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
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शिक्षक सब कुछ जानता है और छात्र कुछ भी नहीं जानते।

पॉलो फ़्रेरा
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मेरी डाक में आने वाले खतों में कुछ खत तो गालियों से ही भरे होते हैं। उन गालियों का तो मेरे ऊपर कोई असर नहीं होता, क्योंकि मैं इन गालियों को ही स्तुति समझता हूँ, परंतु वे लोग गालियाँ इसलिए नहीं देते कि मैं उनको स्तुति समझता हूँ बल्कि इसलिए कि मैं जैसा उनकी निगाह में होना चाहिए वैसा नहीं हूँ। एक वक़्त वह था जब वे मेरी स्तुति भी करते था। इसलिए गालियाँ देना या स्तुति करना तो दुनिया का एक खेल हूँ।

महात्मा गांधी
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एक व्यक्ति जो दूसरों के विचार या राय को नहीं समझ सकता है, तो इसका मतलब यह हुआ कि उसका दिमाग़ और संस्कृति सीमित है।

जवाहरलाल नेहरू
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कोई-कोई पुरुष समझता है कि वह स्त्रियों को बहुत अच्छी तरह से जानता है, क्योंकि वह उनमें से बहुतों के साथ प्रेम-संबंध बना चुका है।

जॉन स्टुअर्ट मिल
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नायक द्वारा नायिका की प्रकृति के अनुकूल, देशाचार के अनुकूल तथा नायिका की अभिरुचि से पशु-पक्षियों के भावों के अनुसार, रतिक्रीड़ा का प्रयोग किए जाने पर—नायक के प्रति नायिका का स्नेह, अनुराग और सम्मान बढ़ता है।

वात्स्यायन
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लेखक को समझना, अपने पालतू कुत्ते को समझने के मुक़ाबले ज़्यादा महत्त्वपूर्ण सामाजिक कार्य है।

श्रीलाल शुक्ल
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जिस प्रकार पुरुष अपने उपायों, योग्यताओं की सफलता पर विचार करता है, उसी प्रकार सरलता से वश में होने वाली स्त्रियों की प्रकृति को भी समझना चाहिए।

वात्स्यायन
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सत्य के थोड़े से हिस्से को ही समझना और ज़िंदगी में उसे अमल में लाना, कुछ समझने और अस्तित्व के रहस्य को खोज पाने की बेकार कोशिश में, इधर-उधर भटकने के मुक़ाबले में बेहतर है।

जवाहरलाल नेहरू
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स्वभावतः सूक्ष्म होने के कारण, अत्यंत लोभ के कारण, स्वभाव से अज्ञानी होने के कारण—स्त्रियों की काम-भावना को समझना बड़ा कठिन है।

वात्स्यायन
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आतंक के आलावा सामूहिक निर्णय का बल और उसके आगे झुकने की विवशता भी बच्चों के समझ के बाहर की चीज़ है।

कृष्ण कुमार
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बिना विचारे अतिशीघ्रता से काम करने का फल, मरणपर्यंत हृदय को जलाता है और कंटक के समान खटकता है।

भर्तृहरि
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जीवन एक ऐसी अनूठी पुस्तक है, जो अंत तक मनुष्य का साथ देती है, परंतु इसके कठिन पृष्ठों को समझने के लिए बुद्धि की आवश्यकता है।

सैमुअल स्माइल्स
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पति को जो वास्तव में धर्म समझकर, परलोक की वस्तु समझकर ग्रहण कर सकी है, उसके पैरों की बेड़ी चाहे तोड़ दी और चाहे बंधी रहने दी, उसके सतीत्व की परीक्षा अपने-आप हो ही गई, समझ लो।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय
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स्वभाव, रुचि, अभ्यास, संगति, संप्रदाय और विवेक बुद्धि के न्यूनाधिक विकास के अनुसार सबको सब चीज़ें एक सी हृदयंगम नहीं होतीं।

महावीर प्रसाद द्विवेदी
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भास, कालिदास आदि के पालन करने वाले भास्कर कोश-गृहों को समझने में कठिन वेद रूपी पर्वत से निकलकर बहनेवाली निर्मल नदियों, उन्नत उपनिषद देवताओं के मंदिरों, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष वाले पौधों के खेतों, यशस्वी आर्यों के जयस्तम्भ श्रेष्ठ पुराणो! तुम्हें मेरा प्रणाम!

वल्लथोल नारायण मेनन
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जिस गाँव में गुण-अवगुण को सुनने समझने वाला कोई नहीं है और जहाँ अराजकता फैली हुई है, हे राजिया! वहाँ रहना कठिन है।

कृपाराम खिड़िया
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संगति और सामंजस्य ऐसी चीज़ नहीं हैं जो सतत कायम रह सके।

जे. कृष्णमूर्ति
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कई बार समय समझदारी पैदा करता है।

महमूद दरवेश
  • संबंधित विषय : समय
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जब किसी के बारे में लिखो तो यह समझकर लिखो कि वह तुम्हारे सामने ही बैठा है और तुमसे जवाब तलब कर सकता है।

गणेश शंकर विद्यार्थी
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समझदारी वह हुनर है, जिससे किसी को शत्रु बनाए बग़ैर अपनी बात रखी जा सकती है।

आइज़क न्यूटन
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जब कोई व्यक्ति जानता है और दूसरों को समझा नहीं सकता, तो वह क्या करता है?

कार्सन मैक्कुलर्स
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तृणतुल्य भी उपकार क्यों हो, उसके फल को समझने वाले उसे ताड़ के समान मानेंगे।

तिरुवल्लुवर

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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