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पुरुष पर उद्धरण

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प्रेम-मिलन में वर और कन्या दोनों ही परस्पर के पूरक हैं। तुलना की तो वहाँ पर बात ही नहीं उठती, वहाँ दोनों ही—'वागर्थाविव सम्स्पृक्तौ"—वाणी और अर्थ की तरह मिले हुए हैं।

आचार्य क्षितिमोहन सेन
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मुझे लगता है कि एक लड़की के लिए किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करना आसान होगा जिसे वह नहीं जानती, क्योंकि जितना अधिक आप पुरुषों को जानोगे; उनसे प्यार करना उतना ही कठिन होगा।

ओरहान पामुक
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एक पुरुष के प्रति अन्याय की कल्पना से ही सारा पुरुष समाज उस स्त्री से प्रतिशोध लेने को उतारू हो जाता है और एक स्त्री के साथ क्रूरतम अन्याय का प्रमाण पाकर भी सब स्त्रियाँ उसके अकारण दंड को अधिक भारी बनाए बिना नहीं रहतीं।

महादेवी वर्मा
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पुरुषों और स्त्रियों को जिस समाज में वे रहते हैं, मुख्यतः उसकी राय और शिष्टाचार के अनुरूप शिक्षित होना चाहिए।

मैरी वोलस्टोनक्राफ़्ट
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मैं अब से पढ़ते हुए पुरुषों और बुनाई करती हुई स्त्रियों की तस्वीरें नहीं बनाऊँगा। मैं उन जीवित साथियों की तस्वीरें बनाऊँगा जो ज़िंदगी को जीना जानते हैं और उसे महसूस करते हैं, जो तकलीफ़ें सहते हैं और प्रेम करते हैं।

एडवर्ड मुंक
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पितृसत्ता में स्त्री-पुरुष में भेद नहीं होता है।

बेल हुक्स
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वह एक युद्ध है जो स्त्री और पुरुष के बीच हमेशा चलता रहता है, जिसे बहुत लोग प्रेम कहकर पुकारते हैं।

एडवर्ड मुंक
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पुरुष को स्त्री को जानने में कोई दिलचस्पी नहीं थी, इसलिए उसने उसे परम रहस्य कहकर पुरस्कृत किया; लेकिन वास्तव में घमंड के बहाने उसके अधिकार की उपेक्षा की गई।

रघुवीर चौधरी
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मेरे पास उसे यह बताने का साहस नहीं था कि महान् प्रेम-कहानियाँ पुरुषों और स्त्रियों के बीच दर्द और अलगाव के बारे में बताती हैं।

एडना ओ’ब्रायन
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इतिहास ने जिन स्त्री-पुरुषों को मानवता की सेवा का अवसर देकर समादृत किया है, उनमें से अधिकांश को विपरीत परिस्थितियों का अनुभव हुआ है।

हेलेन केलर
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संसार में जितनी बड़ी-बड़ी जीतें हुई हैं, बड़े-बड़े आक्रमण हुए हैं, सबको महान बनाया है माताओं, बहिनों और पत्नियों के त्याग ने। किस युद्ध में कितने पुरुषों ने रक्त दिया—यह इतिहास में लिखा हुआ है, लेकिन उसके समीप में यह नहीं लिखा है कि कितनी स्त्रियों ने अपना सुहाग दान किया, कितनी माताओं ने कलेजा निकाल कर दिया, कितनी बहिनों ने सेवाएँ अर्पित की।

क़ाज़ी नज़रुल इस्लाम
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स्त्रियों को तर्कसंगत प्राणी और स्वतंत्र नागरिक बनाएँ, और अगर पुरुष पतियों और पिता के कर्त्तव्यों की उपेक्षा नहीं करते हैं तो वे जल्द ही अच्छी पत्नियाँ बन जाएँगी।

मैरी वोलस्टोनक्राफ़्ट
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यथार्थ प्यार करने में स्त्रियों की शक्ति और साहस पुरुष से कहीं अधिक है। वे कुछ नहीं मानतीं। पुरुष जहाँ भय विह्वल हो जाते हैं, स्त्रियाँ वहाँ स्पष्ट बातें उच्च स्वर से घोषित करने में दुविधा नहीं करतीं।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय
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कोई समाज और धर्म स्त्रियों के नहीं। बहन! सब पुरुषों के हैं। सब हृदय को कुचलने वाले क्रूर हैं, फिर भी मैं समझती हूँ कि स्त्रियों का एक धर्म है, वह है आघात सहने की क्षमता रखना। दुर्देव के विधान ने उसके लिए यही पूर्णता बना दी है। यह उनकी रचना है।

जयशंकर प्रसाद
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नारी केवल नर को रिझाने अथवा उसे प्रेरणा देने को नहीं बनी है। जीवन-यज्ञ में उसका भी अपना हिस्सा है और वह हिस्सा घर तक ही सीमित नहीं, बाहर भी है। जिसे भी पुरुष अपना क्षेत्र मानता है, वह नारी का भी कर्मक्षेत्र है।

रामधारी सिंह दिनकर
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त्वचा, हड्डियों और भूरे रंग का पानी—इन तीनों के मेल में, पुरुष और स्त्री के बीच के सारे फ़र्क़ ख़त्म हो जाते हैं।

हेर्टा म्युलर
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अगर एक स्त्री अकेली सोती है तो यह सभी पुरुषों के लिए शर्मनाक है। ईश्वर के पास बड़ा दिल है, लेकिन एक ऐसा भी पाप है जिसे वह माफ़ नहीं करता : अगर एक स्त्री किसी पुरुष को बिस्तर पर बुलाती है और वह नहीं जाता।

निकोस कज़ानज़ाकिस
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नारी पुरुष से पूजा नहीं चाहती। वह जीवन में सहयोग चाहती है दुःख और सुख के साथ। तन और मन का विलीनीकरण। दो जीवनों का एक होना।

हरिकृष्ण प्रेमी
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पुरुष को मनुष्य के रूप में और स्त्री को स्त्री के रूप में परिभाषित किया जाता है—जब भी वह मनुष्य की तरह व्यवहार करती है, उस पर पुरुष की नक़ल करने का आरोप लगाया जाता है।

सिमोन द बोउवार
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स्त्री-हृदय के मर्मकोष को जाने बिना ही बहुत कुछ कहा गया है।

रघुवीर चौधरी
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युवती नायिकाएँ चाहती हुई भी लज्जावश नायकों से नहीं मिल पातीं। अतः उन्हें संकेतों और चेष्टाओं के द्वारा अपने मनोभावों को प्रकट करें, और प्रेमी युवकों को चाहिए कि वह युवती नायिकाओं के संकेतों, इशारों, चेष्टाओं, मुखमुद्राओं से उनके मनोभावों को समझें।

वात्स्यायन
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पुरुष-संस्कृति पारस्परिकता के बिना स्त्रियों की भावनात्मक ताक़त पर पोषित होने वाली परजीवी संस्कृति थी और है।

शुलामिथ फ़ायरस्टोन
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प्यार नहीं मरता है, पुरुष और स्त्रियाँ मरा करते हैं।

विलियम फॉकनर
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धर्माचरण द्वारा हल्के बने हुए पुरुष संसार सागर में जल में पड़ी नौका के समान तैरते रहते हैं, किंतु पाप से भारी बने हुए व्यक्ति पानी में फेंके गए शस्त्र की भाँति डूब जाते हैं।

वेदव्यास
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पुरुष डरते हैं कि स्त्रियाँ उनकी हँसी उड़ाएँगी। स्त्रियाँ डरती हैं कि पुरुष उन्हें मार डालेंगे।

मार्गरेट एटवुड
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जब देश में कोई विशेष नियम प्रतिष्ठित होता है, तब वह एक ही दिन में नहीं, बल्कि बहुत धीरे-धीरे संपन्न हुआ करता है। उस समय वे लोग पिता नहीं होते, भाई नहीं होते, पति नहीं होते-होते हैं केवल पुरुष। जिन लोगों के संबंध में वे नियम बनाए जाते है, वे भी आत्मीया नहीं होती, बल्कि होती हैं केवल नारियाँ।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय
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क्या प्रीति का लक्षण यही है कि पुरुष स्त्री को काँच की गुड़िया के समान संभाल कर रखे? वस्तुतः अपने जैसा ही उसे बनाना सच्चे प्रेम का लक्षण है। इसलिए मुझे अपने जैसा ही श्रमजीवी बना लो क्योंकि घर मंदिर नहीं है और मैं गृहिणी हूँ, देवी नहीं।

यशवंत दिनकर पेंढरकर
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जो नायक नवविवाहिता कन्या को अत्यंत लज्जावती समझकर उसकी उपेक्षा करता है, स्त्रियों के अभिप्राय को समझने वाला वह पुरुष—पशुओं के समान तिरस्कृत होता है।

वात्स्यायन
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जिसकी पत्नी पतिव्रता है, पति को प्राणों से भी अधिक प्यार करने वाली है तथा पति के ही हित में संलग्न है, वह पुरुष इस पृथ्वी पर धन्य है।

विष्णु शर्मा
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जो स्त्री सोचती है कि वह बुद्धिमान है, वह पुरुषों से समान अधिकार की माँग करती है। बुद्धिमान स्त्री ऐसा नहीं करती है।

कोलेट
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जब कोई पुरुष किसी महिला से प्रेम करता है, तो समय-समय पर उसे ख़ुद को दूर खींचने की ज़रूरत होती है और उसके बाद ही वह उसके ज़्यादा क़रीब सकता है।

जॉन ग्रे
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पुरुष दुश्मन नहीं है, बल्कि सहचर पीड़ित है। असली शत्रु स्त्रियों द्वारा ख़ुद की आलोचना करना है।

बेट्टी फ्रीडन
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शतायु पुरुष अपने जीवन-काल को चार आश्रमों में विभाजित कर धर्म, अर्थ, काम—इस त्रिवर्ग का इस प्रकार सेवन करे कि जिससे ये तीनों परस्पर, एक-दूसरे से संबद्ध भी रहें और एक-दूसरे के बाधक भी हों।

वात्स्यायन
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यदि समग्र भाव से समस्त नारी जाति के दुःख-सुख और मंगल-अमंगल की तह में देखा जाए, तो पिता, भाई और पति की सारी हीनताएँ और सारी धोखेबाज़ियाँ क्षण भर में ही सूर्य के प्रकाश के समान आप से आप सामने जाती हैं।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय
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पुरुष निर्दयी है, माना, लेकिन है तो इन्हीं माताओं का अंश, क्यों माता ने पुत्र को ऐसी शिक्षा नहीं दी कि वह माता या स्त्री-जाति की पूजा करता?

प्रेमचंद
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महिला का दुखड़ा सुनना, पुरुष के लिए कई बार इतना ज़्यादा मुश्किल या दूभर होता है। जब वह किसी चीज़ पर निराश या दु:खी होती है; तो पुरुष को ऐसा महसूस होता है, जैसे वह असफल हो गया हो।

जॉन ग्रे
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बुद्धि से धन प्राप्त होता है और मूर्खता दरिद्रता का कारण है—ऐसा कोई नियम नहीं है। संसार चक्र के वृत्तांत को केवल विद्वान पुरुष ही जानते हैं, दूसरे लोग नहीं।

वेदव्यास
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समाज की दो आधार शिलाएँ हैं—अर्थ का विभाजन और स्त्री-पुरुष का संबंध। इनमें से यदि एक की भी स्थिति में विषमता उत्पत्र होने लगती है, तो समाज का संपूर्ण प्रासाद हिले बिना नहीं रह सकता।

महादेवी वर्मा
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अर्धनारीश्वर केवल इसी बात का प्रतीक नहीं है कि नारी और नर जब तक अलग हैं तब तक दोनों अधूरे हैं, बल्कि इस बात का भी कि जिस पुरुष में नारीत्व नहीं, वह अधूरा है एवं जिस नारी में पुरुषत्व नहीं, वह भी अपूर्ण है।

रामधारी सिंह दिनकर
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अगर मन कोलाहल है, तो अवचेतन मौन रंगमंच है।

सामंथा हार्वे
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जब बुराई को अच्छाई के साथ प्रतिस्पर्धा करने दी जाती है, तो बुराई में भावात्मक जनवादी गुहार होती है जो तब तक जीतती रहती है जब तक कि अच्छे पुरुष और स्त्रियाँ दुर्व्यवहार के ख़िलाफ़ एक अग्र-दल के रूप में खड़े हो जाएँ।

हाना आरेन्ट
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स्त्रियों के बारे में सभी झगड़ों के पीछे असली कारण पुरुष का ख़ुद के प्रति वचनबद्ध हो पाना है।

शुलामिथ फ़ायरस्टोन
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पुरुषों के प्रति स्त्रियों का हृदय, प्रायः विषम और प्रतिकूल रहता है। जब लोग कहते हैं कि वे एक आँख से रोती हैं तो दूसरी से हँसती हैं, तब कोई भूल नहीं करते। हाँ, यह बात दूसरी है कि पुरुषों के इस विचार में व्यंग्यपूर्ण दृष्टिकोण का अंश है।

जयशंकर प्रसाद
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हम सभी—पुरुषों और स्त्रियों—के लिए मुख्य समस्या सीखना नहीं है, बल्कि सीखे हुए को भूल जाना है।

ग्लोरिया स्टाइनम
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यदि स्त्रियों के साथ भेदभाव केवल सतही शारीरिक विशेषताओं के कारण किया जाता है तो वास्तव में पुरुष जैसे हैं, वे उससे कहीं अधिक विशिष्ट और अचल दिखाई देते हैं।

शुलामिथ फ़ायरस्टोन
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लोग अब भी ताक़तवर पुरुष को जन्मजात नेता और ताक़तवर स्त्री को विसंगति मानते हैं।

मार्गरेट एटवुड
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…वह (पुरुष) अपनी क़ब्र में छला हुआ महसूस करते हुए जाएगा, कभी यह नहीं समझ पाएगा कि एक स्त्री और दूसरी स्त्री के बीच बहुत अंतर नहीं है, और फ़र्क़ सिर्फ़ प्यार करने से पड़ता है।

शुलामिथ फ़ायरस्टोन
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पुरुषों द्वारा स्त्रियों की तरफ़ छिटपुट ध्यान देकर उनको व्यवस्थित रूप से अपमानित किया जाता है, जबकि वास्तव में, ऐसा करके पुरुष अपनी श्रेष्ठता का समर्थन कर रहे होते हैं।

मैरी वोलस्टोनक्राफ़्ट
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युगों से पुरुष स्त्री को उसकी शक्ति के लिए नहीं, सहनशक्ति के लिए हो दंड देता रहा है।

महादेवी वर्मा
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अगर स्त्री का मुद्दा इतना बेतुका है, तो ऐसा इसलिए है क्योंकि पुरुष के अहंकार ने इसे चर्चा का विषय बना लिया है।

सिमोन द बोउवार

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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