साहित्य और संस्कृति की घड़ी
“तुम्हारा Review कर दिया है हाल ही में। इसके अलावा एक Manifesto भी खड़ा कर दिया है, Hungry Generation... बांग्ला में ‘क्षुत्कातर सम्प्रदाय’। हर तरह की भूख की बात कही गई है।” हंगरी जेनरेशन की शुरुआत
जब ख़लील और मैरी मिले, तब ख़लील इक्कीस वर्ष के थे—एक संघर्षरत युवा कलाकार। मैरी उनसे दस वर्ष बड़ी थीं और बोस्टन के एक प्रतिष्ठित बालिका विद्यालय की प्रधानाध्यापिका थीं। ख़लील ने उनसे विवाह का प्रस्ता
01 नवम्बर 2026
प्रिय जामिया, कितनी पवित्र तारीख़ थी वह, जब हम पहली बार मिले थे। 6 जनवरी की शाम। उस शाम के एक-एक पल, एक-एक घटनाएँ मुझे याद हैं। तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो तुम को देखें कि तुम से बात करें
करवा चौथ की रील के इंतिज़ार में यह सप्ताह पिछले सालों के करवा चौथ के कुछ ऐतिहासिक वीडियोज़ से दो-चार होते हुए गुज़रा। किसी वीडियो में एक पुरुष 30 सेकंड की रील में उतना निरीह लग रहा है, जितनी निरीह इस
‘हिन्दवी’ की शुरुआत से ही हमारी कोशिश रही है कि हिंदी भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों को एक जीवंत और नियमित मंच दिया जाए। इसी प्रयत्न का एक विस्तार है ‘हिन्दवी बेला’—एक ऐसा अदबी ठि
उन्वान एक छलावा है। छलावा इसलिए कि मुसन्निफ़ यदि शीर्षक की मुराद पूरी करके खिसक ले, तो लेखन मोनोटोनस जान पड़ता है। उस शेर की तरह, जो कहते-सुनते बखत तो सुंदर प्रतीत होता है, किंतु म'आनी-आफ़रीनी से अछू
प्रिय वियोगिनी ठाकुर जी, आपके लिखे ‘अश्लील स्थितियों में फँसना’ पढ़ते हुए कुछ बातें मन में आईं। लगा कि आपसे उन पर बात की जानी चाहिए। आपके लिखे प्रसंगों में अश्लीलता, स्त्री-देह, सामाजिक पूर्वाग्रह
गाँव-घर में कहा जाता है कि सपने में अपने किसी प्रियजन को मरा हुआ देखो, तो उसे यह बात मत बताओ। ऐसा करने से उसकी उम्र बढ़ती है और अगर बता दिया, तो उसकी उम्र घट जाती है। मैंने अपना वह सपना कभी आबै को नह
30 अक्तूबर 2026
रात गहरी है, देर तक जगने वाली लड़कियाँ भी सो चुकी हैं। छात्रावास के गलियारों में निस्तब्धता है और ऊपर दिखते आकाश से निरभ्र शांति झर रही है, पर यह शांति मेरी सीनियर के अशांत मन को सहला नहीं पा रही है।
स्वस्ति श्री सर्वोपमायोग्य कल्पना शास्त्री जी, यहाँ से मनीष का राम-राम। चकित होऊ नका; मैं भी जानता हूँ कि चिट्ठी-पत्री की परंपरा तो अब बहुत पुरानी हो चुकी है। सो भी, मैं आपको चिट्ठी लिखने बैठ गया।