Font by Mehr Nastaliq Web
M. N. Ray's Photo'

M. N. Ray

1887 - 1954 | دوسرا, مغربی بنگال

کی

باعتبار

शक्तिशाली लोगों में कुदरत के साथ चलने का भाव होता है। वह वासना त्याग की बातें ज़्यादा नहीं करते। जो लोग वासना त्याग की प्रैक्टिस करते हैं, वे लोग फ़ेल हो जाते हैं। इसलिए धार्मिकता की आदत डाली जाती है और इस आदत में तमाम मनोवैज्ञानिक और शारीरिक क्रियाओं में संघर्ष मचता है।

प्रकृति की भौतिक वास्तविकता को नकार देने पर वैज्ञानिक शोध निरर्थक हो जाता है।

  • विषय :
    اور 4 مزید

किसी एक लक्ष्य पर एकाग्र होने से अगर वह बौद्धिक क़िस्म का नहीं है, तो माइंड (सेरिब्रल) की क्रिया (फंक्शनिंग) का बैलेंस ख़त्म हो जाता है और फलस्वरूप एक हिस्टीरिया अवस्था प्राप्त होती है। और आदमी अपने विश्वासों और सुझावों की मनचाही आकृति ही नहीं देखता है; बल्कि अवचेतन में व्याप्त विभिन्न भावनाओं द्वारा जनित, उसे मतिभ्रम (हैल्यूसिनेशन) भी होने शुरू हो जाते हैं।

काम भावना का हनन ही गूढ़ अनुभवों की राह खोलता है और यह हनन उन्हें कहाँ ले जाता है, यह जानने के बाद एक शख़्स सिर्फ़ यही कहेगा कि गूढ़ अनुभव मात्र मतिभ्रम और हिस्टीरिया की बीमारी है।

सभी आध्यात्मिक गुणों की जड़ में जीवन होता है और एक निर्जीव पूरे तौर पर जड़ होता है। जो चीज़ जीवधारियों को जड़ पदार्थ से अलग करती है, वह जीवन है और वह एक रासायनिक प्रक्रिया है। मादा रज×नर शुक्राणु = नव जीवन। इस प्रक्रिया में आत्मा का कोई काम नहीं।

हमारे अनुभव में घटमान विश्व केवल हमारी चेतना में अस्तित्ववान है, उस का कोई भौतिक आधार नहीं है।

धार्मिकता कोई भारत की बपौती नहीं। यह इस देश में इतनी ज़्यादा इसलिए पाई जाती है, क्योंकि भारत के अलावा किसी अन्य देश में इतनी अज्ञानता नहीं पाई जाती है।

  • विषय :

धार्मिक अनुभव वग़ैरह मनोवैज्ञानिक उन्माद है, एक बनावटी मेंटल रोग है। अंधविश्वाश केवल असामान्यता को बढ़ावा दे सकता है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

सुसंगत ढंग से विकसित थियोलॉजी की परिणति सर्वेश्वरवाद में होती है। वैदिक सर्वेश्वरवाद, उपनिषदों के ईश्वरवाद का तर्कसम्मत नतीजा है। सर्वेश्वरवादी रूप में थियोलॉजी अपने को ही खा जाती है, क्योंकि सुसंगत सर्वेश्वरवाद नास्तिकवाद की ओर ले जाता है।

  • विषय :
    اور 4 مزید

भारतीय राष्ट्रवाद बहुत ही क्षणभंगुर है। अपनी योजनाओं तक में विश्वास नहीं करता। राष्ट्रवादी आंदोलन, राजनीतिक जद्दोजहद ख़ुद इसका अकाट्य प्रमाण है कि भारतीय लोग भी वैसे ही जीवन स्तर और व्यवस्थित जीवन के इच्छुक हैं, जितने कि अन्य लोग।

प्रतिक्रियावादी दर्शन में पुरातन के लिए वफ़ादारी, पराश्रयी व्यवस्था, भ्रष्ट सामाजिक संस्थानों और अलोकतांत्रिक भावनाओं के प्रति वफ़ादारी; राष्ट्रवादी नेता को वहाँ पहुँचा देते हैं, जहाँ वे तरह-तरह के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं।

आत्मा की अमरता का विचार आदमी ने उस स्तर पर अर्जित नहीं किया; जब वह आध्यात्मिकता की पराकाष्ठा पर पहुँचा, बल्कि यह बहुत ही आदिम-युगीन विचार है। इसकी उत्पत्ति आध्यात्मिक ज्ञान नहीं है, बल्कि अज्ञानता है।

इंद्रियों के अनुभव से जो ज्ञान पैदा होता है, वही ज्ञान है और वही ज्ञान संस्कृति का आधार है। यदि आप इंद्रिय सुख पर रोक लगा रहे हैं, तो आप आदमी की ज्ञानार्जन वृत्ति पर भी रोक लगा रहे हैं।

  • विषय :
    اور 4 مزید

विश्व के आधार-तत्त्व के बारे में नए ज्ञान का निहितार्थ, पदार्थ की वास्तविकता का निषेध नहीं है।

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

विज्ञान का कार्य केवल प्रकृति पर विजय नहीं; बल्कि प्रकृति और उस से अपने संबंधों के साथ-साथ, प्रकृति के ही अंश अन्य मनुष्यों से भी संबंधों को समझने में सहायक होना है।

सामान्य बोध विचित्रता पर अविश्वास करता है। वह रहस्यों और चमत्कारों से आसानी से नहीं ठगा जा सकता।

  • विषय :
    اور 2 مزید

आदमी का रुझान और प्रवृत्ति ही, अप्रकट अनुभवों की जननी है। एक स्वतंत्र आदमी भी पूर्वग्रहों से लैस हो सकता है।

आत्मा, मस्तिष्क और व्यक्तित्व अनुभवगम्य वस्तुओं की तरह स्थिर वस्तुएँ नहीं हैं। यह विगत अनुभवों का समुच्य मात्र हैं, जिसका बड़ा भाग अवचेतन में पड़ा रहता है। भावनात्मक और आध्यात्मिक जीवन पर अवचेतन मन में दबी प्रवृत्तियों का प्रभाव पड़ता है, इसलिए मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया गूढ़ बन जाती है।

विश्व का रहस्यवादी विचार दर्शन का खंडन है। वह दर्शन को समाप्त करता और विश्वास को पुनर्जीवित करता है।

केवल अकर्मण्य लोग ही कामवासना से अधिक प्रेरित और पीड़ित रहते हैं और जो लोग अपने अहम् (इगो) से संबद्ध चीज़ों में ज्यादा व्यस्त रहते हैं, उनका मन वासनाओं की तरफ़ से हटा रहता है।

दर्शन की आधारभूत समस्या ब्रह्मांड के रहस्य को, मात्र वैज्ञानिक ज्ञान की मदद से ही समझा जा सकता है।

  • विषय :
    اور 3 مزید

किसी भी देश का प्राचीन और मध्ययुगीन साहित्य इतना वासनामय नहीं है, जितना भारत का।

  • विषय :
    اور 2 مزید

संयम की अवधारणा सर्वहारा के जीवन स्तर को जहाँ का तहाँ रखने की गारंटी है।

दर्शन का कार्य एक समग्र के रूप में अस्तित्व की व्याख्या करना है।

सर्वहारा के शारीरिक और भावनात्मक जीवन पर जबरिया रोक लगा कर, सुख-चैन ढूँढ़ने के माने हैं―आदमी के भविष्य को ताक पर रख कर, यथास्थितिवाद को क़ायम रखना।

धार्मिक प्रवृत्ति हर आदमी में बहुत ही भीतर तक जड़ें जमाए रहती है। जब तक वह ज्ञान के सागर में गोते नहीं लगा लेता, ज्ञानी के ज्ञान पर उसके पुरखों का ज्ञान हावी रहता है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

वास्तव में धार्मिक अनुभवों में मनोविज्ञान की दास्तान बहुत पुरानी है। यह दास्तान तमाम पौराणिक साहित्य और मशहूर संत महात्माओं की जीवनियों से भरी पड़ी है।

जब तक सर्वहारा को अपने आप पर संयम रखना नहीं सिखाया जाता; यानी जीवन की बुनियादी ज़रूरतों के बिना भी रहने की आदत नहीं डाली जाती, तब तक उनकी श्रम शक्ति से पैदा फालतू उत्पादन उच्च वर्ग के हाथों में नहीं सिमट सकता।

संयम-धर्म, पूँजीवादी व्यवस्था पर आधारित था और उत्पादन के फैलाव को रोकता था। संपूर्ण उत्पादन को जानबूझ कर, उच्च वर्ग की शान-शौकत क़ायम रखने के लिए सीमित किया गया था। यह तभी संभव था; जब उत्पादन मशीनरी को यानी सर्वहारा को, सादा जीवन जीने के लिए मज़बूर किया जाता या उन्हें डाँट-डपट कर वैसा करने को बाध्य किया जाता कि जितना ही सादा जीवन उतना ही अच्छा।

  • विषय :
    اور 3 مزید

वासना एक महत्त्वपूर्ण प्रवृत्ति है। वास्तव में मूल प्रवृत्ति है। आध्यात्मिक विकास की पहली शर्त है जीवन और जीवन का वजूद वंश परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने में है।

आधुनिक वैज्ञानिक दर्शन, किसी भी तरह द्वैतवादी सिद्धांत के निश्चित रूप से विरुद्ध है।

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

जिस प्रकार जीवन के सिद्धांत में परिवर्तन और पुनः समायोजन जीवन को नष्ट नहीं करते, उसी प्रकार पदार्थ की अवधारणा में समुपस्थित क्रांति; पदार्थ को नष्ट नहीं करती, भौतिकी को पराभौतिकी में नहीं मिला देता।

भोगवाद से विरक्ति के कारण, सांसारिकता का त्याग क्रिश्चियन धर्म की विशेषता रही है।

  • विषय :
    اور 1 مزید

आप विज्ञान को नकार दें और विज्ञान सम्मत विचारधारा को त्याग दें; तो विज्ञान कुछ भी नहीं कर सकता, बल्कि वह तुम्हें तुम्हारे ही हाल पर छोड़ देगा। दूसरी ओर तुम धार्मिक अंधविश्वासों पर प्रयोग-सिद्ध-ज्ञान से आगे बढ़ोगे, तो तुम ख़तरनाक रास्तों पर चलोगे।

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

आत्मा का सिद्धांत और उसका पुनर्जन्म, हाईपरफ़िजिकल स्कूल से विकसित हुआ है।

अगर हम भविष्य में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो हमें भूत से नाता तोड़ने की हिम्मत करनी पड़ेगी।

  • विषय :
    اور 2 مزید

जीवन में गूढ़ या आध्यात्मिक शक्ति हो या हो, बुद्धिमत्ता ही सर्वोच्च प्रकाश है।

ब्रह्मचारी एक धार्मिक लोफर के सिवा और कुछ नहीं होता।

विकास की एक विशिष्ट प्रक्रिया एक क्रांति में परिपूर्ण होती है, जो एक नई प्रजाति की उत्पत्ति का संकेत देती है।

मनुष्य के आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य पर विवेकाधीन अंकुश लगाए बिना, दर्शन अनन्तता की अवधारणा से छुटकारा नहीं पा सकता।

विज्ञान द्वारा धर्म की पराजय, धर्म के तर्कबुद्धिवादी बीजकोष का युक्तियुक्त परिणाम है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

जब तक यह विश्वास होता है कि एक चीज़ सत्य है, तुम उसको साबित करने की ज़रूरत नहीं समझते। अगर तुम ऐसा करते हो; तो उन लोगों को संतुष्ट करने के लिए करते हो, जो तुम्हारी आस्था में विश्वास नहीं रखते।

  • विषय :
    اور 2 مزید

पदार्थीय सत्य सांसारिक वास्तविकता है। मैं सत्य को भौतिक (फिजिकल) घटना मानता हूँ, जो थोड़ा स्पष्टीकरण माँगता है। शब्द भौतिक (फिजिकल) में जैविक (बायोलोजिकल) और रासायनिक दोनों प्रक्रियाएँ शामिल हैं। तत्त्वज्ञानी इससे ग़ुरेज कर सकते हैं लेकिन ग़ुरेज या ग़ुस्सा या आवरणयुक्त अभिव्यक्ति, कोई तर्कसंगत बात नहीं होती।

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

परम सत्त्व की केवल अमूर्त कल्पना की जा सकती है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

बुद्धि एक शरीरवैज्ञानिक वृत्ति है, मस्तिष्क विचार का उपकरण है और विचार मस्तिष्क की वृत्ति है।

  • विषय : 1

हम केवल वही परिभाषित कर सकते हैं, जो हम जानते हैं। सुनिश्चित ज्ञान पर्यवेक्षण और प्रयोग से ही प्राप्त किया जा सकता है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

विश्वास का अपना तर्क हाता है, और धार्मिक दर्शन की आलोचना का काम उस तर्क की भ्रामकता का स्पष्ट कर देना है।

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

आत्मवाद के मानने वालों ने पुनर्जंम का आधार सूक्ष्म शरीर माना है।

बुद्धि और विवेक को त्याग कर सत्य नहीं पाया जा सकता। ज्ञात वास्तविकताओं के प्रकाश पुंज से ही गर्त में छिपे सत्य ढूँढ़े जा सकते हैं।

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

आज का भारतीय प्रगतिशील आंदोलन प्रतिक्रियावादी असबाब से लदा हुआ है, जो अंतर्विरोध पैदा करता है।

  • विषय :
    اور 1 مزید

Recitation