تمام تمام
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किसी एक लक्ष्य पर एकाग्र होने से अगर वह बौद्धिक क़िस्म का नहीं है, तो माइंड (सेरिब्रल) की क्रिया (फंक्शनिंग) का बैलेंस ख़त्म हो जाता है और फलस्वरूप एक हिस्टीरिया अवस्था प्राप्त होती है। और आदमी अपने विश्वासों और सुझावों की मनचाही आकृति ही नहीं देखता है; बल्कि अवचेतन में व्याप्त विभिन्न भावनाओं द्वारा जनित, उसे मतिभ्रम (हैल्यूसिनेशन) भी होने शुरू हो जाते हैं।