Font by Mehr Nastaliq Web

कृष्ण पर उद्धरण

सगुण भक्ति काव्यधारा

में राम और कृष्ण दो प्रमुख अराध्य देव के रूप में प्रतिष्ठित हुए। इसमें कृष्ण बहुआयामी और गरिमामय व्यक्तित्व द्वारा मानवता को एक तागे से जोड़ने का आदर्श प्रस्तुत करते हैं। सगुण कवियों ने प्रेम और हरि को अभेद्य माना, प्रेम कृष्ण का रूप है और स्वयं कृष्ण प्रेम-स्वरुप हैं। प्रस्तुत चयन में भारतीय संस्कृति की पूर्णता के आदर्श कृष्ण के बेहतरीन दोहों और कविताओं का संकलन किया गया है।

quote

सूरदास के काव्य में कृष्ण से राधा और दूसरी गोपियों का प्रेम, सामंती नैतिकता के बंधनों से मुक्त प्रेम है।

मैनेजर पांडेय
quote

आर्य संस्कृति और आर्यों में ‘ऋग्वेद’ का प्रमुख देवता इन्द्र था। यद्यपि ब्रह्मा, विष्णु, महेश—तीनों का नाम लिया जाता है। ब्रह्मा की महिमा धीरे-धीरे घटती गई। इन्द्र की महिमा घटती गई और कृष्ण आते गए। इसका मूल स्रोत कहीं लोकजीवन से जोड़कर देखना चाहिए।

नामवर सिंह
quote

विष्णु पोषण करते हैं इसलिए उनके अवतार राम और कृष्ण की पूजा भी कम नहीं होती।

अमृतलाल वेगड़
quote

कृष्ण भारतवर्ष के लिए अमूल्य निधि है।

वासुदेवशरण अग्रवाल
quote

स्मृति और पुराण; सीमित बुद्धिवाले व्यक्तियों की रचनाएँ हैं और भ्रम, त्रुटि, प्रमाद, भेद तथा द्वेष भाव से परिपूर्ण हैं। उनके केवल कुछ अंश जिनमें आत्मा की व्यापकता और प्रेम की भावना विद्यमान है—ग्रहण करने योग्य हैं, शेष सबका त्याग कर देना चाहिए। उपनिषद् और गीता सच्चे शास्त्र हैं और राम, कृष्ण, बुद्ध, चैतन्य, नानक, कबीर आदि सच्चे अवतार हैं, क्योंकि उनके हृदय आकाश के समान विशाल थे और इन सबमें श्रेष्ठ हैं रामकृष्ण। रामानुज, शंकर इत्यादि संकीर्ण हृदय वाले, केवल पंडित मालूम होते हैं।

स्वामी विवेकानन्द
quote

कृष्णभक्त अपनी साधना के लिए एक ऐसे प्रेमक्षेत्र के भीतर अपने आराध्य की प्रतिष्ठा करते हैं, जो लोक से न्यारा है। जिसमें लोक मर्यादा चलती है, वेदमर्यादा।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
quote

सूरसागर में कृष्ण के चरित्र में मनोवैज्ञानिक विश्वसनीयता और रहस्यात्मकता का पुट है, मानवीय चरित्र तथा दिव्य लीला का सामंजस्य है।

मैनेजर पांडेय
quote

सूर की गोपियों का प्रेम, कोई सीमा नहीं जानता। वह कोई बंधन नहीं मानता, संयोग में और वियोग में—उसका लक्ष्य है तन्मयता।

मैनेजर पांडेय
quote

सूरसागर का गोपीकृष्ण-प्रेम, स्वछंद प्रेम है। इस प्रेम की दूसरी विशेषता है, उसका सहज क्रमिक विकास। गोपीकृष्ण-प्रेम के स्वाभाविक विकास क्रम को, सूर ने अत्यंत सतर्कता से चित्रित किया है।

मैनेजर पांडेय
quote

सूरसागर में परंपरा और लोकजीवन से कृष्णकथा को ग्रहण कर, सूरदास ने अपनी कारयित्री प्रतिभा के सहारे उसका नया रूप निर्मित किया है।

मैनेजर पांडेय
quote

कृष्ण के लिए अर्जुन का धर्म-संकट, सचमुच का धर्म-संकट नहीं—मन की झूठी गाँठ है, तुच्छ है।

मुकुंद लाठ
quote

धर्म की उलटबाँसियों, विडंबनाओं के भीतर भी धर्मप्रज्ञा जागरूक रहती है, और कृष्ण ने ठीक ही कहा है कि धर्मप्रज्ञा को किसी स्थिर तत्त्व या विधान से बाँधा नहीं जा सकता।

मुकुंद लाठ
quote

राम या कृष्ण की दैवी छवि के 'भाव' का; एक परिचित अभिनेता के व्यक्तित्व में विघटित हो जाना उस आदि मिथक-शक्ति का अवमूल्यन है, जिसे कविता आह्वानात्मक ढंग से इस्तेमाल करती है।

कुँवर नारायण
quote

श्रीकृष्ण की संपूर्ण प्रेमलीला का प्रेरक तत्त्व है उनका अलौकिक सौंदर्य।

मैनेजर पांडेय
quote

प्रीति के वशीभूत होकर ही भगवान श्रीकृष्ण नरलीला करते हैं।

मैनेजर पांडेय
quote

भागवत में श्रीकृष्ण का जन्म नहीं, अवतरण होता है। वे अपने चतुर्भुजी ऐश्वर्यमय रूप में अवतरित होते हैं और पुनः बालक बन जाते हैं। इनका बचपन अलौकिक कर्मों और दिव्य लीलाओं से परिपूर्ण है।

मैनेजर पांडेय
quote

सूरदास ने कृष्ण के ब्रज से जाने के बाद के उनके चरित्र को विशेष महत्त्व नहीं दिया है। सूर ने मथुरावासी कृष्ण के चरित्र का कोई प्रभावशाली चित्रण नहीं किया है।

मैनेजर पांडेय
quote

गोपियों की विरह-वेदना की अभिव्यक्ति में सूरदास की सहानुभूति गोपियों के साथ है। सूर की कविता में गोपियों की आत्मा की आवाज़ सुनाई पड़ती है। यह सूरदास की मानवतावादी चेतना के कारण संभव हुआ है।

मैनेजर पांडेय
quote

जब हरि मुरली अधर धरत।

थिर चर, चर थिर, पवन थकित रहैं, जमुना-जल बहत॥

सूरदास
quote

श्रीकृष्ण के सौंदर्य के आलोक से गोपियों का मानस आलोकित है। गोपियाँ कृष्ण के रूप-लावण्य पर मुग्ध हैं, प्रेम विवश हैं।

मैनेजर पांडेय
quote

वृंदावन में श्रीकृष्ण की लीला नित्य भी है और क्रमिक भी, गुप्त भी है और प्रकट भी। श्रीकृष्ण के दो रूप हैं—ऐश्वर्यमय और प्रेममय।

मैनेजर पांडेय
quote

कृष्ण मूलतः कलासक्त हैं।

दुर्गा भागवत
  • संबंधित विषय : कला
quote

भागवत के विमर्श से यह निष्कर्ष निकलता है कि भागवतकार के मानस से महाभारत और उसकी कृष्णकथा विस्मृत नहीं है। इसलिए भागवतकार ने महाभारत की कृष्णकथा का सार-संग्रह भागवत के प्रारंभ में किया है, किंतु उसका लीलारसिक मन, कृष्ण की रसवत वात्सल्य और कैशोर लीलाओं की मार्मिक व्यंजना में ही लीन हुआ है।

मैनेजर पांडेय
quote

सूरदास की भक्ति प्रेमाभक्ति है, जिसका आधार श्रीकृष्ण का सगुण, सरूप सौंदर्य हैं।

मैनेजर पांडेय
quote

मनुष्यता के सौंदर्यपूर्ण और माधुर्यपूर्ण पक्ष को दिखा कर इन कृष्णोपासक वैष्णव कवियों ने जीवन के प्रति अनुराग जगाया, या कम से कम जीने की चाह बनी रहने दी।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
quote

राधा-कृष्ण के प्रेम की वजह से भारतीय प्रेमकथा को नई कोमलता मिली।

दुर्गा भागवत
quote

गीता, गंगा, गायत्री और गोविंद—इन गकार-युक्त चार नामों को हृदय में धारण कर लेने पर मनुष्य का फिर इस संसार में जन्म नहीं होता।

वेदव्यास
quote

यदि तुम यह समझते हो कि ईसा या बुद्ध या कृष्ण या किसी अन्य महात्मा के नाम के कारण तुम्हारा उद्धार हो रहा है, तो स्मरण रखो कि ईसा, बुद्ध, कृष्ण या किसी दूसरे व्यक्ति में यथार्थ गुण निहित नहीं हैं, वास्तविक शक्ति तो तुम्हारी आत्मा में है।

रामतीर्थ
quote

करोड़ों हिंदुस्तानियों ने, युग-युगांतर के अंतर में, हज़ारों बरस में राम, कृष्ण और शिव को बनाया। उनमें अपनी हँसी और सपने के रंग भरे और तब राम और कृष्ण और शिव जैसी चीज़ें सामने हैं।

राममनोहर लोहिया
quote

कृष्ण राधा की आस्था हैं और राधा कृष्ण की कामना। कृष्ण और राधा का संयोग-वियोग, आस्था और कामना का ही संयोग-वियोग है।

मैनेजर पांडेय
quote

असंख्य मनुष्यों का जीवन आज कृष्ण के आदर्श से प्रभावित होता है।

वासुदेवशरण अग्रवाल
quote

संसार में एक कृष्ण ही हुआ जिसने दर्शन को गीत बनाया।

राममनोहर लोहिया
quote

श्रीकृष्ण का लोकरक्षक और लोकरंजक रूप गीता में और भागवत पुराण में स्फुरित है। पर धीरे-धीरे वह स्वरूप आवृत्त होता गया है और प्रेम का आलंबन मधुर रूप ही शेष रह गया।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
quote

'सत्संग' नामक देश में 'भक्ति' नाम का नगर है। उसमें जाकर 'प्रेम' की गली पूछना। विरह-ताप-रूपी पहरेदार से मिलकर महल में घुसना और सेवारूपी सीढ़ी पर चढ़कर समीप पहुँच जाना। फिर दीनता के पात्र में अपने मन की मणि को रखकर उसे भगवान् को भेंट चढ़ा देना। अहं तथा घमंड के भावों को न्योछावर कर तुम श्रीकृष्ण का वरण करना।

दयाराम
quote

प्रियतम तुम मेरे प्राण हो। मैंने देह, मन, कुल, शील, जाति, मान सब तुम्हें सौंप दिया। हे अखिल के नाथ श्याम, तुम योगियों के आराध्य धन हो। हम गोपियाँ हैं, बड़ी दrन हैं, भजन-पूजन कुछ नहीं जानतीं। सब लोग हम पर कलंक लगाते हैं, पर उसका मलाल नहीं है। तुम्हारे लिए कलंक का हार गले में धारण करना सुख की बात है।

चंडीदास
quote

राम और कृष्ण के मिथक संकल्प और संवेग के चैतन्य स्रोत हैं।

कुबेरनाथ राय
quote

व्यवहार में गंभीरता, वचन में गंभीरता और भावों में गंभीरता—इन तीन गंभीरताओं के साथ कृष्ण का स्मरण करें तो महामंगल मिलेगा।

माधवदेव
quote

वैष्णवों का कृष्ण—लोकल और क्लासिकल का संयुक्त रूप है।

नामवर सिंह
quote

जिनका मन श्रीकृष्ण के प्रेम से रहित है उनके क्रिया-नैपुण्य को धिक्कार है, उदारता (दानशीलता) को धिक्कार है, अधिक पढ़ी हुई विद्या को धिक्कार है, आत्मज्ञता को धिक्कार है, शील को धिक्कार है, यज्ञ आदि की रचना को धिक्कार है, पुरुषार्थ को तथा बुद्धि को धिक्कार है; ध्यान, आसन, धारणा को धिक्कार है, मंत्र-तंत्र की जानकारी को धिक्कार है, जन्म को तथा जीवन को धिक्कार है।

कवि कर्णपूर
quote

जहाँ योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धर अर्जुन हैं, वहाँ श्री, विजय, वैभव और ध्रुवनीति रहेंगे, यह मेरा मत है।

वेदव्यास
  • संबंधित विषय : जीत
    और 1 अन्य
quote

दक्षिण ने जिस कृष्ण की मूर्ति ‘श्रीमद्भागवत’ में गढ़ी और जो दक्षिण में रचा गया था—वह महाभारत के कृष्ण से अलग है।

नामवर सिंह
quote

भारतवर्ष के जिन महापुरुषों का मानव जाति के विचारों पर स्थायी प्रभाव पड़ा है, उनमें श्रीकृष्ण का स्थान प्रमुख है।

वासुदेवशरण अग्रवाल
quote

कृष्ण में यह विशिष्टता है कि वे सदा अच्छे ही लगते हैं, इसी से मन में समाए रहते हैं।

तुलसीदास
quote

गाँव से भागती अन्नपूर्णा और मनीषा की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण के चरित्र का आह्वान जरूरी है।

कृष्ण बिहारी मिश्र
quote

सर्वदा और सर्वत्र सर्व गुणों के प्रकाश से श्रीकृष्ण तेजस्वी थे। वह अपराजेय, अपराजित, विशुद्ध, पुण्यमय, प्रेममय, दयामय, दृढ़कर्मी, धर्मात्मा, वेदज्ञ, नीतिज्ञ, धर्मज्ञ, लोकहितैषी, न्यायशील, क्षमाशील, निरपेक्ष, शास्ता, मोह-रहित, निरहंकार, योगी और तपस्वी थे। वह मानुषी शक्ति से कार्य करते थे, परंतु उनका चरित्र अमानुषिक था।

बंकिम चंद्र चटर्जी
quote

यदि कृष्ण होते तो स्पर्धा की स्पृहा का कमनीय स्वरुप प्रकट ही नहीं होता।

दुर्गा भागवत
quote

उग्र तप, ज्ञान, गुण विकास, यज्ञ, योग, दान, पुण्य आदि सबका प्रयोजन ही क्या है जब तक सब जगत् के निज आत्मा, मोक्ष-सुख देने वाले इष्ट देव कृष्ण के चरणों में भक्ति नहीं?

माधवदेव
quote

महाभारत में कृष्ण और विष्णु के ऐक्य का प्रयास है।

मैनेजर पांडेय
quote

कृष्ण का बालजीवन तो एक काव्य ही है।

वासुदेवशरण अग्रवाल
quote

हे कृष्ण! मन चंचल और प्रमथन स्वभाव वाला, दृढ बलवान है। उसको वश में करना मैं वायु को वश में करने के समान अति दुष्कर मानता हूँ।

वेदव्यास

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव 2026

रजिस्टर कीजिए