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सुखी है वह मनुष्य जो अतिथि को देखकर कभी मुँह नहीं लटका लेता है, अपितु हर अतिथि का प्रसन्नतापूर्वक स्वागत करता है।
स्वच्छ क्रांति तो प्रेम व न्याय के सिद्धांत से ही हो सकती है।
इतिहास का प्रयोजन वर्तमान समय और उसके अनुसार कर्तव्य को महत्त्व देना है।
स्वयं अपने विचार पर विश्वास करना, जो तुम्हारे अपने व्यक्तिगत हृदय में तुम्हारे लिए सत्य है, उस पर विश्वास करना कि वह सबके लिए सत्य है—यही प्रतिभा है।
उपन्यासों का प्रेम इंद्रियों पर भावना की वरीयता है।
बुद्धि के आधिक्य से बुद्धिमान व्यक्ति मूर्ख बन जाता है।
कार्य करने वाले में थोड़ा कट्टरपन हुए बिना तेजस्वी कार्य नहीं हो सकता।
बिना उत्साह के कोई महान उपलब्धि कभी नहीं हुई।
प्रत्येक व्यक्ति यह चिंता करता है कि उसका पड़ोसी उसे न ठग ले। किंतु एक दिन ऐसा आता है जब वह यह चिंता करना प्रारंभ करता है कि कहीं वह अपने पड़ोसी को न ठग ले। तब सब ठीक चलता है। अब वह अपनी बाजार-गाड़ी को सूर्य रथ में परिवर्तित कर चुका है।
यदि मेरे संध्याकालीन अतिथि घड़ी नहीं देख सकते तो उन्हें मेरे मुखमंडल में समय देख लेना चाहिए।
जैसे मनुष्यों की प्रार्थनाएँ उनकी इच्छा का रोग हैं, वैसे ही उनके मतवाद उनकी बुद्धि के रोग हैं।
महापुरुष वे हैं जो देखते हैं कि भौतिक बल से आध्यात्मिक बल अधिक सशक्त है तथा संसार पर विचार शासन करते हैं।
वास्तव में इतिहास है ही नहीं, केवल जीवनचरित्र ही हैं।
मित्र को प्रकृति की उत्कृष्ट कृति माना जा सकता है।
वह महान व्यक्ति है जो कुछ भी है प्रकृति से ही है और जो हमें कभी भी दूसरों का स्मरण नहीं कराता है
जब प्रकृति को कोई कार्य संपन्न कराना होता है तो उन वह उसको करने के लिए एक प्रतिभा का निर्माण करती है।
यथार्थ में इतिहास कुछ नहीं है, केवल जीवनचरित्र है।
मित्र पाने का एक मात्र उपाय (स्वयम्) मित्र बनना है।
प्रातःकाल मनुष्य अपने संपूर्ण शरीर से चलता है किंतु वृद्ध पुरुष कार्य के प्रारंभ में। सायंकाल को केवल टाँगों से।
जो निर्वाचन में भाग नहीं लेते, वे यह विचारते हैं कि एक वोट से कुछ लाभ नहीं होगा। एक पग आगे का यह विचार है कि एक वोट से कोई हानि नहीं होगी।
जिस जहाज़ में हम यात्रा कर रहे हों, उसके अतिरिक्त प्रत्येक जहाज़ रोमानी वस्तु होता है।
हम सदैव जीने के लिए तैयारी कर रहे होते हैं, पर जीते कभी नहीं हैं।