Font by Mehr Nastaliq Web

आलसी पर उद्धरण

quote

जब मन आलस्य और भीरुतावश सच-झूठ, भला-बुरा सबको बिना प्रश्न मान लेता है, तभी से मनुष्यत्व की सर्वांगीण दुर्गति आरंभ हो जाती है।

रवींद्रनाथ टैगोर
quote

आलसी पाठकों से मुझे अत्यंत घृणा है।

फ़्रेडरिक नीत्शे
quote

आलस्य मनुष्यों के शरीर में महाशत्रु है और उद्योग के समान दूसरा कोई बंधु नहीं है, जिसके करने से दुःख नहीं आता।

भर्तृहरि
quote

विफलता दुर्बलता नहीं है, बल्कि चेष्टा करना ही है दुर्बलता।

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र
quote

दिल्ली से लेकर शिवपालगंज तक; काम करनेवाली देसी बुद्धि सब जगह एक-सी है।

श्रीलाल शुक्ल
quote

आलसी सोने वाले मनुष्य को दरिद्रता प्राप्त होती है तथा कार्य-कुशल मनुष्य निश्चय ही अभीष्ट फल पाकर ऐश्वर्य का उपभोग करता है।

वेदव्यास
quote

जिन कामों को हम अपने-आप कर सकते हैं, उन सबको अलग छोड़कर केवल दूसरों पर अभियोग लगाना और सदा-सर्वदा कर्महीन उत्तेजना में दिन बिताना—इसे मैं राष्ट्रीय कर्तव्य नहीं समझता।

रवींद्रनाथ टैगोर
quote

रुप्पन बाबू अठारह साल के थे। वे स्थानीय कॉलिज की दसवीं कक्षा में पढ़ते थे। पढ़ने से और ख़ासतौर से दसवीं कक्षा में पढ़ने से, उन्हें बहुत प्रेम था; इसलिए वे उसमें पिछले तीन साल से पढ़ रहे थे।

श्रीलाल शुक्ल
quote

निश्चय ही इस संसार में इच्छारहित प्राणी को संपदाएँ नहीं अपनाती और संपूर्ण कल्याणों की उपस्थिति उनके हाथ में नित्य रहती है जो आलसी नहीं हैं।

दण्डी
quote

आलस्य सुखरूप प्रतीत होता है परंतु उसका अंत दुःख है तथा कार्यदक्षता दुःखरूप प्रतीत होती है परंतु उससे सुख का उदय होता है।

वेदव्यास
quote

तरक़्क़ी मिलने की शुरुआत आराम त्यागने के साथ ही होती है।

साइमन गिलहम
quote

जो बोलने में कम; काम में अधिक है, वही है प्रथम श्रेणी का कर्मी। जो जैसा बोलता है; वैसा ही करता है, वह है मध्यम श्रेणी का कर्मी। जो बोलता अधिक है; करता कम है, वह है तृतीय श्रेणी का कर्मी और जिसे बोलने में भी आलस्य, करने में भी आलस्य, वही है अधम।

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र
quote

इतना काम है कि सारा काम ठप्प पड़ा है।

श्रीलाल शुक्ल
quote

पड़े-पड़े मरने से चलकर मरना अच्छा है।

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र
quote

मध्यकाल का कोई सिंहासन रहा होगा जो अब घिसकर आरामकुर्सी बन गया था। दारोग़ाजी उस पर बैठे भी थे, लेटे भी थे।

श्रीलाल शुक्ल
quote

काम करते जाओ, अदृष्ट सोचकर हताश मत हो जाओ। आलसी मत बनो, जैसा काम करोगे तुम्हारे अदृष्ट वैसे ही बनकर दृष्ट होंगे। सत्-कर्मी का कभी भी अकल्याण नहीं होता, चाहे एक दिन पहले या पीछे।

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र
quote

'अलसस्य कुतो शिल्पं, अशिल्पस्य कुतो धनम्!'—एक आलसी के लिए शिल्प कहाँ, एक शिल्प-विहीन के लिए धन कहाँ।

अवनींद्रनाथ ठाकुर
quote

आलस्य से ही मूढ़ता आती है, और मूढ़ता ही है अज्ञानता।

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र
quote

संसारी जन बड़े आलसी होते हैं जो सुलभ सौहार्द वाले महापुरुषों के मनों को जिस किसी वस्तु से नहीं ख़रीदते हैं।

बाणभट्ट
quote

धीर बनो, धीर बनो, दीर्घसूत्री मत बनो।

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए