Font by Mehr Nastaliq Web

हिंदी साहित्य पर उद्धरण

quote

हमारे अधिकांश उपन्यास अति सामान्य प्रश्नों (ट्रीविएलिटीज) से जूझते रहते हैं और उनसे हमारा अनुभूति-संसार किसी भी तरह समृद्ध नहीं होता।

श्रीलाल शुक्ल
quote

जायसी प्रेम के कवि के रूप में विख्यात हैं। उनके अनुसार संसार में प्रेम से अधिक सुंदर और काम्य कुछ भी नहीं है।

मैनेजर पांडेय
quote

हिंदी में सबसे प्रचलित और लोकप्रिय पद्धति है—अपनों की प्रशंसा और परायों की निंदा।

हरिशंकर परसाई
quote

हमारे साहित्य में एक बहुचर्चित स्थापना यह है कि भारतीय उपन्यास मूलतः किसान चेतना की महागाथा है—वैसे ही जैसे उन्नसवीं सदी के योरोपीय उपन्यास को मध्यम वर्ग का महाकाव्य कहा गया था।

श्रीलाल शुक्ल
quote

महाकवि विद्यापति मध्यकाल के पहले ऐसे कवि हैं, जिनकी पदावली में जन-भाषा में जनसंस्कृति की अभिव्यक्ति हुई है।

मैनेजर पांडेय
quote

जायसी की दृष्टि में प्रेम अत्यंत गूढ़ और अथाह है। ज़ाहिर है, ऐसे प्रेम की कविता लिखना भी आसान नहीं होगा।

मैनेजर पांडेय
quote

सबसे पहली कमी तो हमारे उपन्यासों में चिंतन और वैचारिकता की ही है।

श्रीलाल शुक्ल
quote

दूसरे कवि अधिक-से-अधिक आँसुओं से प्रेम की कविता लिखते हैं, लेकिन जायसी ने आँखों से टपकने वाले लहू से प्रेम की कविता लिखी है।

मैनेजर पांडेय
quote

उपन्यास की पूरी संभावनाओं का अभी भी हमारे यहाँ दोहन होना है।

श्रीलाल शुक्ल
quote

समकालीनता की मारी आज की हिंदी आलोचना ने, कबीर को आध्यात्म-प्रेमी विदेशियों तथा उनके देशी सहयोगियों को सौंप दिया है, और तुलसीदास को 'जय श्रीराम' का नारा लगाने वाले शाखामृगों की मर्ज़ी पर छोड़ दिया है।

मैनेजर पांडेय
quote

जो सार्थक है, वही समकालीन है—वह नया हो या पुराना।

मैनेजर पांडेय
quote

‘मैला आँचल’ के साथ ही हिंदी में उपन्यासों में एक नई कोटि का प्रचलन होता है, जिसे ‘आंचलिक’ कहते हैं।

श्रीलाल शुक्ल
quote

'पद्मावत' में प्रेम की प्रधानता निर्विवाद है, परंतु उस प्रेम के स्वरूप के बारे में मतभेद है। विवाद का विषय यह है कि वह प्रेम मूलतः लौकिक है या अलौकिक।

मैनेजर पांडेय
quote

आज हम जिसे भारतीय संस्कृति कहते हैं, उसके निर्माण में भक्ति आंदोलन की अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

मैनेजर पांडेय
quote

भक्तिकाव्य की एक विशेषता हिंदी भाषा के काव्यत्व का उत्कर्ष है।

मैनेजर पांडेय
quote

सूर को कबीर की तरह वात्सल्य और माधुर्य की अभिव्यक्ति के लिए; बालक तथा बहुरिया बनने की आवश्यकता नहीं है, और जायसी की तरह प्रेम की अलौकिक आभा दिखाने की चिंता भी नहीं।

मैनेजर पांडेय
quote

हिंदी क्षेत्र में अभी सामंती मूल्यों और रूढ़ियों का जितना अधिक प्रभाव है, उतना देश के किसी अन्य भाग में शायद ही कहीं हो। इसलिए यहाँ स्त्रियों का जैसा शोषण, दमन और उत्पीड़न है—वैसा अन्यत्र कहीं नहीं।

मैनेजर पांडेय
quote

हिंदी आलोचना में सबसे पहले आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने निर्गुण संतों के विरुद्ध सगुण भक्तों को खड़ा किया। उन्होंने निर्गुण संतों को लोक-विरोधी और सगुण भक्तों को लोक-संग्रही घोषित किया।

मैनेजर पांडेय
quote

हिंदी के लेखक अँधेरे में भले ही भटकते हों, किंतु यह नहीं कह जा सकता कि युग-धर्म की जो पहेलियाँ अपने विश्लेषण के लिए सामने उपस्थित हैं, उनकीओर हिंदी का साहित्य क्षेत्र उदासीन है।

गणेश शंकर विद्यार्थी
quote

कबीर ऐसे कवि हैं, जिन्हें किसी तरह की सांप्रदायिकता और कट्टरता तो अपना बना सकती है और पचा सकती है।

मैनेजर पांडेय
quote

हिंदी में ऐसे आलोचकों का अभाव नहीं है; जो कहते हैं कि कविता की व्याख्या में समाज को लाना—कविता के साथ अत्याचार है। लेकिन जिस कविता में समाज होगा, उसकी व्याख्या सामाजिक चिंता के बिना कैसे होगी?

मैनेजर पांडेय
quote

कबीर प्रत्येक लौकिक और अलौकिक वस्तु को जुलाहे की नज़र से देखते हैं। उनके लिए ईश्वर भी एक बुनकर ही है और उसकी यह दुनिया तथा मानव काया—‘झिनी-झिनी बीनी चदरिया है।’

मैनेजर पांडेय
quote

हिंदी साहित्य में महात्मा सूरदास को तो बहुत सम्मान मिला है, लेकिन महाकवि सूरदास के महत्त्व की व्याख्या करने वाला आलोचनात्मक विवेक विरल ही है।

मैनेजर पांडेय
quote

हिंदी के वर्णवादी अध्यापक इसलिए परेशान है कि अगर कबीर दलित ले गए, तो निर्गुण परंपरा का क्या होगा? सामाजिक एकता समरसता का क्या होगा? द्विवेदी जी का क्या होगा? उस उदारता का क्या होगा, जो हमारे हिंदी साहित्य के इतिहास ने भक्ति काल में पैदा की, जिसमें मानव-मानव एक हो गया।

सुधीश पचौरी
quote

हिंदी की सेवा का अर्थ है, उस मानव-समाज की सेवा, जिसके विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम हिंदी है। मनुष्य ही बड़ी चीज़ है, भाषा उसी की सेवा के लिए है। साहित्य-सृष्टि का भी यही अर्थ है।

हजारीप्रसाद द्विवेदी
quote

भक्तिकाव्य में धर्म का जो रूप है; उसका आधार भय नहीं, प्रेम है। आशा तथा आस्था इस प्रेम के दो सहायक तत्त्व हैं।

मैनेजर पांडेय
quote

हिंदी के भक्तिकाव्य में अनेक स्वर है। सगुण भक्तों का स्वर निर्गुण संतों से भिन्न है।

मैनेजर पांडेय
quote

भक्तिकाव्य का प्रेम, भक्ति आंदोलन की विभिन्न धाराओं को आपस में मिलाता है। वह वैष्णवों को सूफ़ियों से और निर्गुण संतों को सगुण भक्तों से जोड़ता है। कहीं वह सामाजिक मूल्य है, तो कहीं सामाजिक कर्त्तव्य।

मैनेजर पांडेय
quote

निराला के कुल्लीभाट में भी व्यंग्य की जो धार; जो प्रभविष्णुता संभव हुई है, वह तथाकथित व्यंग्यकारों के बूते के बाहर की चीज़ है। वह कवि की ही वाग्विभूति है, जो गद्य को फली है।

रमेशचंद्र शाह
quote

हिंदी का सजग लेखक-पाठक, निश्चित रूप से भाषाभाषी लेखकों-पाठकों की तुलना में कहीं अधिक अखिल भारतीय दृष्टि रखनेवाला होता है।

रमेशचंद्र शाह
quote

रामचंद्र शुक्ल और द्विवेदी में और इन दिनों संघ की इतिहास की अवधारणाओं में, एक भयानक समानता यही है कि ये सब इतिहास को एक अटूट धारा मानते हैं और कर्ता के भाव को एक अन्विति में पिरोया जाता मानते है, जिसमें कबीर की आलोचना का तत्व एक विरेचक का काम करता है बस।

सुधीश पचौरी
quote

सूरदास जिस सामंती समाज में रचना कर रहे थे, उसमें मनुष्य से अधिक व्यवस्था के बंधनों का महत्त्व था। उनकी रचना में सामंती व्यवस्था के बंधनों से मुक्ति के लिए बेचैन मनुष्य का चरित्र उभरता है।

मैनेजर पांडेय
quote

'पद्मावत' का अंतर्लोक भी लोक-अनुभवों से भरा हुआ है।

मैनेजर पांडेय
quote

सूरसागर का प्रेमलोक दीप्ति, माधुर्य और कोमलता की स्निग्ध भूमि है।

मैनेजर पांडेय
quote

पॉलिटिकली करेक्ट होने के उथले, उम्र दुराग्रह ने समकालीन हिंदी कथा-साहित्य की उड़ने और ग़ोताख़ोरी करने की क्षमता को बाधित किया है। एक अच्छी किताब अपनी 'पॉलिटिकल करेक्टनैस' अपने आंतरिक तर्कों से अर्जित करती है।

ललित कार्तिकेय
quote

सूरसागर में परंपरा और लोकजीवन से कृष्णकथा को ग्रहण कर, सूरदास ने अपनी कारयित्री प्रतिभा के सहारे उसका नया रूप निर्मित किया है।

मैनेजर पांडेय
quote

कवि के अनुभव का विषय होकर ही कोई विषयवस्तु काव्यवस्तु बनती है, लेकिन कवि उसे अपनी रचना के उद्देश्य और अभिव्यक्ति के अनुरूप पुनर्निर्मित करता है।

मैनेजर पांडेय
quote

कबीर ने जीवनभर जिन धार्मिक और सामाजिक रूढ़ियों का विरोध किया, उन्हीं में कबीर को क़ैद करने की कोशिश कबीरपंथियों ने की है।

मैनेजर पांडेय
quote

मीरा का विद्रोह एक विकल्पविहीन व्यवस्था में, अपनी स्वतंत्रता के लिए विकल्प की खोज का संघर्ष है।

मैनेजर पांडेय
quote

सूरदास मूलतः रूप और प्रेम के कवि हैं। रूप के अंकन और प्रेम की साधना में ही उनकी चित्तवृत्ति विशेष रमी है।

मैनेजर पांडेय
quote

तुलसीदास जिस वैदिक और पौराणिक परंपरा की रक्षा के लिए निर्गुण की आलोचना करते हैं, उसमें विरोधी विचारों के साथ ऐसा व्यवहार बहुत पहले से होता आया है।

मैनेजर पांडेय
quote

हिंदी कविता में आज जहाँ सौभाग्यवश ऐसे कवि उपस्थित हैं, यद्यपि उनकी संख्या बहुत कम है; जो भारतीय तथा विश्व मानवता के सामने खड़े हुए संकटों की जटिलता को पहचान रहे हैं और आदमी होने के विविध पहलुओं से परिचित हैं, वहाँ तथाकथित कवियों और आलोचकों का एक बहुत बड़ा गिरोह नितांत व्यक्तिगत तथा सामयिक लाभांशों के लिए एक बहुत ख़राब कविता को कविता कह रहा है।

विष्णु खरे
quote

कबीरपंथ में कबीर के विचारों की दुर्गति के इतिहास से साबित होता है कि कोई क्रांतिकारी विचारधारा विरोधियों की आलोचनाओं से नहीं मरती, वह इतिहास-प्रक्रिया से बेख़बर अनुयायियों की अंधश्रद्धा, कट्टरवादिता और महत्त्वाकांक्षा से मरती है।

मैनेजर पांडेय
quote

पत्रकार और साहित्यकार की हैसियत से लिखे गए रघुवीर सहाय के लेखों में, रघुवीर सहाय की विनोदप्रियता का भले ही कोई प्रमाण मिलता हो—उसके साहित्य-संस्कृति-प्रेम का परिचय भरपुर मिलता है।

मनोहर श्याम जोशी
quote

सूर का मत है कि प्रेम से संसार की स्थिति है, क्योंकि सारा संसार प्रेम के सूत्र में आबद्ध है। प्रेम पुरुषार्थ है, धर्म साधना का साध्य और साधन दोनों हैं।

मैनेजर पांडेय
quote

भक्ति आंदोलन के व्यापक और स्थाई प्रभाव का एक कारण यह है कि उसमें भारतीय संस्कृति के अतीत की स्मृति है, अपने समय के समाज तथा संस्कृति की सजग चेतना है और भविष्य की गहरी चिंता भी है।

मैनेजर पांडेय
quote

सूरदास की सौंदर्य चेतना की विकसित अवस्था, राधा के सौंदर्य-चित्रण में दिखाई पड़ती है।

मैनेजर पांडेय
quote

सूर का काव्य, हिंदी जाति के सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास से दिलचस्पी रखने वालों के लिए विशेष महत्त्वपूर्ण है।

मैनेजर पांडेय
quote

'पद्मावत' का प्रेम असाधारण ज़रूर हैं, लेकिन अलौकिक नहीं।

मैनेजर पांडेय
quote

मीरा के काव्य में रूढ़िवादी लोकमत का विरोध अत्यंत उग्र है, लेकिन उसमें शास्त्रमत की कोई चिंता नहीं है। उसका कहीं विरोध है और कहीं सहारा। उसके आकर्षण, भय और भ्रम से पूरी तरह मुक्त है—मीरा की कविता।

मैनेजर पांडेय

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here

रजिस्टर कीजिए