सांप्रदायिकता पर उद्धरण
सांप्रदायिकता संप्रदाय
विशेष से संबद्धता का प्रबल भाव है जो हितों के संघर्ष, कट्टरता और दूसरे संप्रदाय का अहित करने के रूप में प्रकट होता है। आधुनिक भारत में इस प्रवृत्ति का उभार एक प्रमुख चुनौती और ख़तरे के रूप में हुआ है और इससे संवाद में कविताओं ने बढ़-चढ़कर भूमिका निभाई है। इस चयन में सांप्रदायिकता को विषय बनाती और उसके संकट को रेखांकित करती कविताएँ संकलित की गई हैं।
जितने दिन तक मनुष्य कर्मकांड और सांप्रदायिक ज्ञान से मुक्त नहीं होता, उतने दिन तक वह सर्वमानव के उपयुक्त नहीं होता।
कबीर ऐसे कवि हैं, जिन्हें किसी तरह की सांप्रदायिकता और कट्टरता न तो अपना बना सकती है और न पचा सकती है।
हिंदू-मुस्लिम विद्वेष या राजनीतिक विडंबना को दूर करने का प्रयत्न तब तक सफल नहीं हो सकता, जब तक कि प्रत्येक देशवासी, भारतवर्ष के वातावरण को सौहार्द और पारस्परिक औदार्य से परिप्लावित न कर देगा।
सारी समस्याएँ मुहावरों, नारों और अपीलों से सुलझ जाती हैं। सांप्रदायिकता की समस्या को इस नारे से हल कर लिया गया—हिंदू-मुस्लिम, भाई-भाई।
हमारे देश में साम्प्रदायिक द्वेष की जड़ मध्ययुग का इतिहास है, जो अर्द्धसत्य और ग़लत नज़रिए से प्रचारित किया जाता है और पढ़ाया जाता है।
संप्रदाय-विशेष-पूजित काठ-पत्थरों के प्रतीक और उसकी पूजा या आचार-संस्कार, मनुष्य में मनुष्य को सदा ही विच्छिन्न रखते हैं। इसीलिए अपने अंतर में सत्य-स्वरूप और प्रेम-स्वरूप 'एक' को उपलब्ध करने के सिवा, मिलन का और क्या उपाए हो सकता है?
धार्मिक कट्टरता साधारण मनुष्य को किसी-किसी अवसर पर मनुष्य नहीं रहने देती, उसे पशु बना देती है।
भारत को एक ऐसी ताक़त का निर्माण करना होगा, जो सांप्रदायिकता जैसे उन तमाम ‘वादों’ से छुटकारा पा चुकी हो—जो उसकी तरक़्क़ी में रुकावट पैदा करते हैं और उसे बाँटते हैं।
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फ़िरक़ापरस्ती की किसी भी सूरत से ताल्लुक़ रखने का मतलब है, हिंदुस्तान में प्रतिक्रियावादी ताक़तों को और ब्रिटिश साम्राज्यवाद को मज़बूत बनाना।
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कट्टरपंथियों ने अपने उद्देश्यों के अनुसार तुलसीदासजी का उपयोग किया, जिस प्रकार आज जनसंघ और हिंदू महासभा ने शिवाजी और रामदास का उपयोग किया।
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सम्प्रदायवाद सामन्तवाद का ही एक अस्त्र है और मध्यकालीन संत कवियों का सम्प्रदायवाद-विरोध, उनके व्यापक सामन्तवाद-विरोधी संघर्ष का ही एक अंग है।
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मैंने अपने समूचे साहित्य में ऐसा कोई चित्रण नहीं देखा, जहाँ किसी कट्टर सनातनी हिंदू को आदरणीय तथा आदर्श व्यक्ति समझा जा सके।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere