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आत्म पर उद्धरण

आत्म का संबंध आत्मा

या मन से है और यह ‘निज’ का बोध कराता है। कवि कई बातें ‘मैं’ के अवलंब से कहने की इच्छा रखता है जो कविता को आत्मीय बनाती है। कविता का आत्म कवि को कविता का कर्ता और विषय—दोनों बनाने की इच्छा रखता है। आधुनिक युग में मनुष्य की निजता के विस्तार के साथ कविता में आत्मपरकता की वृद्धि की बात भी स्वीकार की जाती है।

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अपने स्वयं के शिल्प का विकास केवल वही कवि कर सकता है, जिसके पास अपने निज का कोई ऐसा मौलिक-विशेष हो, जो यह चाहता हो कि उसकी अभिव्यक्ति उसी के मनस्तत्वों के आकार की, उन्हीं मनस्तत्वों के रंग की, उन्हीं के स्पर्श और गंध की ही हो।

गजानन माधव मुक्तिबोध
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‘स्व’ से ऊपर उठना, ख़ुद की घेरेबंदी तोड़कर कल्पना-सज्जित सहानुभूति के द्वारा अन्य के मर्म में प्रवेश करना—मनुष्यता का सबसे बड़ा लक्षण है।

गजानन माधव मुक्तिबोध
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शांति को चाहो। लेकिन ध्यान रहे कि उसे तुम अपने ही भीतर नहीं पाते हो, तो कहीं भी नहीं पा सकोगे। शांति कोई बाह्य वस्तु नहीं है।

ओशो
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तुम्हारे पास क्या है; उससे नहीं, वरन् तुम क्या हो उससे ही तुम्हारी पहचान है।

ओशो
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वह (स्त्री) ख़ुद से तब प्यार कर पाती है, जब कोई पुरुष उसे प्यार के क़ाबिल पाता है।

शुलामिथ फ़ायरस्टोन
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सफल होने के लिए—एक कलाकार के पास—साहसी आत्मा होनी चाहिए। …वह आत्मा जो हिम्मत करती है और चुनौती देती है।

केट शोपैं
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भाषा स्वयं सुनती है।

यून फ़ुस्से
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यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि दूसरों में रुचि का कारण मनुष्य की स्वयं में रुचि है। यह संसार स्वार्थ से जुड़ा है। यह ठोस वास्तविकता है लेकिन मनुष्य केवल वास्तविकता के सहारे नहीं जी सकता। आकाश के बिना इसका काम नहीं चल सकता। भले ही कोई आकाश को शून्य स्थान कहे…

रघुवीर चौधरी
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मैं अनावश्यक चीज़ों को छोड़ दूँगी, मैं अपना धन दे दूँगी, मैं अपने बच्चों के लिए अपनी जान दे दूँगी; लेकिन मैं ख़ुद को नहीं दूँगी।

केट शोपैं
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घायल दिल पहले कम आत्म-सम्मान पर क़ाबू पाकर आत्म-प्रेम सीखता है।

बेल हुक्स
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प्यार करने का चुनाव जुड़ने का विकल्प है—दूसरे में ख़ुद को खोजने का विकल्प।

बेल हुक्स
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मेरे इतने लोकप्रिय होने का कारण यह है कि मैं दूसरों को वह लौटाती हूँ जो उन्हें स्वयं में खोजने की आवश्यकता होती है।

अज़र नफ़ीसी
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जब मैं भाषा के माध्यम से विचार करता हूँ तो मौखिक अभिव्यक्तियों के अतिरिक्त मेरे मन में कोई दूसरे ‘अर्थ’ नहीं होते : भाषा तो स्वयं ही विचार की वाहक होती है।

लुडविग विट्गेन्स्टाइन
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मैं जब तक जीवित रहूँगा, उनकी नक़ल नहीं करूँगा या उनसे अलग होने के लिए ख़ुद से नफ़रत नहीं करूँगा।

ओरहान पामुक
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कैसे मैं, जो जीवन को इतनी तीव्रता से चाहता है, स्वयं को लंबे समय तक किताबों की निरर्थक बातों और स्याही से काले पड़े पन्नों में उलझा हुआ छोड़ सकता था!

निकोस कज़ानज़ाकिस
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मन की अथाह गहराई में उतरकर लिखो, जो मन में आए वह लिखो।

जैक केरुआक
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व्यक्तिगत स्वतंत्रता बड़ी अच्छी चीज़ है, बड़ी अच्छी और अत्यंत ऊँची; परंतु राष्ट्र की स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए उसे संकुचित कर देना एक ऐसा त्याग है, जिसकी समता नहीं हो सकती, जो सब त्यागों में श्रेष्ठ है।

गणेश शंकर विद्यार्थी
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मेरी मुश्किलें मेरी अपनी हैं।

अल्फ़्रेड एडलर
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स्मरण-शक्ति के साथ लिखो और ख़ुद के आश्चर्य के लिए लिखो।

जैक केरुआक
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व्यक्ति किसी और से प्यार करने और किसी और से प्यार प्राप्त करने के सरल कृत्यों से ख़ुद से प्यार करना सीखता है।

हारुकी मुराकामी
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क्या यह सच नहीं है कि लेखक केवल अपने बारे में लिख सकता है?

मिलान कुंदेरा
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सरल मन वाले दीवाने संत सरीखे बनो।

जैक केरुआक
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इंसान का गुण स्वयं का विस्तार करने, स्वयं से बाहर निकलने और अन्य लोगों में और उनके लिए मौजूद रहने की क्षमता में निहित है।

मिलान कुंदेरा
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आदमी ध्यान आकर्षित करने के लिए युद्ध करते हैं। सभी हत्याएँ आत्म-घृणा की अभिव्यक्ति हैं।

एलिस वॉकर
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आप कितनी भी दूर की यात्रा कर लें, आप कभी भी ख़ुद से दूर नहीं हो सकते।

हारुकी मुराकामी
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जब भी आप अपने आस-पास सुंदरता का निर्माण कर रहे होते हैं, आप अपनी आत्मा को बहाल कर रहे होते हैं।

एलिस वॉकर
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जब हमें नहीं पता होता कि किससे नफ़रत करें, हम ख़ुद से शुरुआत करते हैं।

चक पैलनिक
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अगर आप अपनी फ़ुरसत को खो रहे हैं, तो ख़बरदार! हो सकता है कि आप अपनी आत्मा को खो रहे हों।

वर्जीनिया वुल्फ़
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प्रेम की प्राप्ति के लिए एक ज़रूरी शर्त है—अपनी ‘आत्म-मुग्धता’ से उबरने में सफलता।

एरिक फ़्रॉम
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स्वयं को जानने का अर्थ किसी अन्य व्यक्ति के साथ कार्य करते हुए स्वयं का अध्ययन करना है।

ब्रूस ली
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लोकरुचि अथवा लोक-उक्तियों के अनुसार जो अपना जीवन-यापन करते हैं, वे अपने पड़ोसियों की प्रशंसा के पात्र भले ही बन जाएँ, पर उनका जीवन औरों के लिए नहीं होता है।

गणेश शंकर विद्यार्थी
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समुद्र की आवाज़ आत्मा से बात करती है।

केट शोपैं
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ख़ुद के प्रति समर्पण ही सच्ची शक्ति है—वह शक्ति जो भीतर से आती है।

शम्स तबरेज़ी
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चीज़ों को गंभीरता से विचारने के जोखिम से बचने का एक बारीक तरीक़ा है—आत्म-निंदा में लिप्त हो जाना।

ललित कार्तिकेय
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आमूल-परिवर्तनवादी कभी आत्मपरकतावादी नहीं होता।

पॉलो फ़्रेरा
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मैं वही हूँ जो मेरे आस-पास है।

वॉलेस स्टीवंस
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महिलाओं के 'स्व' का अहसास, उनकी भावनाओं और उनके संबंधों की गुणवत्ता से परिभाषित होता है।

जॉन ग्रे
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ख़ुद से प्रेम करने की अपनी योग्यता को बढ़ाने के लिए, हमें प्रेम मिलना भी ज़रूरी होता है।

जॉन ग्रे
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दे दिया जाता हूँ।

रघुवीर सहाय
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जब आप समग्र रूप से सावधान होते हैं, तो वहाँ कोई 'स्व' नहीं हो सकता।

जे. कृष्णमूर्ति
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स्व सदा सीमित होता है और इसीलिए यह द्वंद्व का कारण है। हमारे समस्त संघर्ष, दुःख, चिंता आदि का यही है केंद्रीय बिंदु।

जे. कृष्णमूर्ति
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आत्मसंस्कृति ही शिल्प है। इस शिल्प के द्वारा मनुष्य सारे संसार को छंदोंमय बना लेते हैं।

राधावल्लभ त्रिपाठी
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कविता में 'मैं' की व्याख्या केवल आत्मकेंद्रण या व्यक्तिवाद के अर्थ में करना, उसके बृहत्तर आशयों और संभावनाओं—दोनों को संकुचित करना है।

कुँवर नारायण
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किसी भी युग में; किसी भी मनुष्य ने अपने स्वत्वों का अपहरण होते देखकर, क्षुद्रता की छाप लगाए फिरना स्वीकार नहीं किया।

गणेश शंकर विद्यार्थी
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दुनिया में कोई व्यक्ति अपना निर्माण स्वयं नहीं करता।

पॉलो फ़्रेरा
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आज उपकृत हुआ हूँ; इसलिए कल फिर स्वार्थांध होकर अपकृत होने का बहाना कर, अकृतज्ञता को मत्त बुला लो। इससे बढ़कर इतरता और क्या है? जिस किसी से पूछ लो।

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र
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डरने वाला व्यक्ति स्वयं ही डरता है, उसको कोई डराता नहीं है।

महात्मा गांधी
  • संबंधित विषय : डर
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आपको ख़ुद पर काम करने की ज़रूरत है। जब तक आप ख़ुद को नहीं भर लेते, तब तक आपके पास किसी दूसरे को देने के लिए कुछ नहीं होता है।

रॉन्डा बर्न
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सौंदर्य बाहर की कोई वस्तु नहीं है, मन के भीतर की वस्तु है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
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कला में वस्तुतः आत्माभिव्यक्ति नहीं हुआ करती। अभिव्यक्ति होती है, किंतु जीने और भोगनेवाले अपने मन की, अपनी आत्मा की, वह सच्ची अभिव्यक्ति है—यह कहने का साहस नहीं हो पाता।

गजानन माधव मुक्तिबोध

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere