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रिक्तता पर कविताएँ

कुछ होकर भी न होने के

अभावभाव को प्रकट करती रचनाओं से एक चयन।

बसंत

बोरीस पस्तेरनाक

दोपहर

यानिस रित्सोस

घेरा

यानिस रित्सोस

अकेली रात

ज़ेवियर विलोरूशिया

एक विवर

किम ह्ये-सून

नरकदंड

यानोश पिलिंस्की

खुले वाक्य

हैदर एरगुलेन

एक संज्ञान सिद्धांत का मॉडल

हंस माग्नुस एन्त्सेंसबर्गर

बंद हैं दरवाज़े

येहूदा आमिखाई

बियर के ख़ाली डिब्बों की तरह

अर्नेस्तो कार्देनाल

शालीनता में खोया

येहूदा आमिखाई

आज सुबह कोई और

ब्लांका वारेला

रिक्तता

पॉल इल्यार

विधुर

ह्यु मैक्डायर्मिड

उस प्रेम के बारे में

जयंत महापात्र

ख़ालीपन

उज्ज्वल शुक्ल

ख़तरनाक नहीं है यह

खेमकरण ‘सोमन’

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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