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Surykant Tripathi 'Nirala''s Photo'

Surykant Tripathi 'Nirala'

1896 - 1961 | مغربی بنگال

کی

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दुःख को देवता समझो।

  • विषय : 1

बिना इंद्रियों को जीते धर्माचरण निष्फल है।

  • विषय : 1

जितने भी धर्म प्रचारित किए गए, सब अपनी व्यापकता तथा सहृदयता के बल पर फैले।

  • विषय : 1

नेता? नेता कौन है? मनुष्य? एक मनुष्य सब विषयों की पूर्णता पा सकता है? 'न। इसीलिए नेता मनुष्य नहीं। सभी विषयों की संकलित ज्ञान-राशि का नाम नेता है।

  • विषय :
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साथ निवास करने वाले दुष्टों में जल तथा कमल के समान मित्रता का अभाव ही रहता है। सज्जनों के दूर रहने पर भी कुमुद और चंद्रमा के समान प्रेम होता है।

  • विषय :
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पेट जितना भी भरा रहे, आशा कभी नहीं भरती। वह जीवों को कोई-न-कोई अप्राप्य, कुछ नहीं तो केवल रंगों की माया का इंद्रधनुष प्राप्त करने के मायावी दलदल में फँसा ही देती है।

  • विषय :
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धन घर रह जाता है तथा बांधव श्मशान में छूट जाते हैं। आत्मा के प्रयाण काल में पाप तथा पुण्य ही जीवात्मा के साथ जाते हैं।

  • विषय : 1
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पापों का फल तत्काल समझ में नहीं आता। उसका ज़हर अवस्था की तरह ठीक अपने समय पर चढ़ता है।

  • विषय :
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जो गिरना नहीं चाहता, उसे कोई गिरा नहीं सकता।

  • विषय :

ज़िंदा को मुर्दा और मुर्दा को ज़िंदा समझना भ्रम भी है और ज्ञान भी।

  • विषय :
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निःसीम काल का सौ वर्ष कितना सा अंश है? मनुष्य की वह परम आयु है अतः वह कैसे सो सकता है?

  • विषय :
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मन, बुद्धि और अहंकार का लय प्रलय है।

  • विषय : 1

घी से सिक्त होने पर थोड़ी सी भी अग्नि धधक उठती है। एक बीज हज़ारों बीजों में परिणत हो जाता है। उत्थान और पतन बहुत अधिक हो सकता है। अतः मनुष्य को अपने थोड़े से धन की भी अवमानना नहीं करना चाहिए।

  • विषय :
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पेट में जब तक दीनता के पिल्ले कूँ-कूँ करते रहेंगे, मनुष्य को अपनी पहचान अपने आप होगी, वह किसी ऊँची बात का अर्थ नहीं समझ सकता।

  • विषय :
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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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