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Samuel Smiles

1812 - 1904

کی

باعتبار

हमारे पूर्वजों ने अधिकारों के लिए संघर्ष किया, आज की पीढ़ी को कर्तव्य के लिए संघर्ष करना है।

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अंतःकरण प्रत्येक व्यक्ति के चरित्र का सार है।

स्वतंत्रता से भी अधिक शक्तिशाली एक और शब्द है—'अंतःकरण'।

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इस विश्व में हर वस्तु का अंत होता है। पुस्तक की अंतिम पंक्ति, अंतिम उपदेश, अंतिम भाषण, जीवन का अंतिम कार्य और मृत्यु के समय कहे हुए अंतिम शब्द- सब इसी अटूट सत्य की ओर निर्देश करते हैं।

आज के समाज में प्रतिभा तो बहुत है, परंतु श्रद्धा नहीं है। ज्ञान तो है परंतु व्यावहारिक बुद्धि नहीं है। आडंबरपूर्ण सभ्यता तो है, परंतु प्रेम सहानुभूति नहीं है।

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कर्त्तव्य, दया, तथा प्रेम से प्रेरित होकर किए कार्य उन कार्यों से हज़ार गुना श्रेष्ठ होते हैं जो केवल धन के लिए किए जाते हैं। पहली प्रकार के कार्य आत्म-त्याग और साहस की प्रेरणा देते हैं, जबकि दूसरी प्रकार के कार्य धन प्राप्ति के साथ ही समाप्त हो जाते हैं।

हृदय आत्मा से शून्य बुद्धि शरीर केवल हड्डियों का एक ढाँचा है। कोरी बुद्धि और तर्क से हम सृष्टि के रहस्यों को नहीं समझ सकते।

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किसी के मरने पर लोग पूछेंगे—वह कौन-सी संपत्ति छोड़ गया है? परंतु देवता पूछेंगे—तुम अपने पीछे कौन से अच्छे कर्म छोड़ आए हो?

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बुरी पुस्तकें एक ऐसा विष होती हैं, जो समाज में बुराई के बीज डालती हैं। इन पुस्तकों के लेखक अपनी क़ब्रों से भी भावी पीढ़ियों की हत्या करते रहते हैं।

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जीवन एक ऐसी अनूठी पुस्तक है, जो अंत तक मनुष्य का साथ देती है, परंतु इसके कठिन पृष्ठों को समझने के लिए बुद्धि की आवश्यकता है।

कर्म ही सबसे बड़ा शिक्षक है।

निर्धनों की आवश्यकताओं और कठिनाइयों को अमीर कभी नहीं समझ सकते।

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व्यवहार की छोटी-छोटी बातें ही व्यक्ति के चरित्र का दर्पण होती हैं, कि लंबी-चौड़ी बातें।

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बाहरी चमक-दमक होते हुए भी कोई देश भीतर से खोखला हो सकता है।

जो व्यक्ति छोटे कामों को ईमानदारी से करता है, वही बड़े कामों को ईमानदारी से कर सकता है।

यह कितने दुर्भाग्य की बात है कि जिन सिद्धांतों को हमारे पूर्वज अपने जीवन के व्यवहार में लाते थे, हम उन पर केवल चर्चा ही करते रहते हैं।

आत्मत्याग, प्रेम तथा कर्तव्य से प्रेरित होकर किए गए छोटे-बड़े कार्यों से ही चरित्र का निर्माण होता है।

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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