Font by Mehr Nastaliq Web

मोक्ष पर उद्धरण

भारतीय दर्शन में दुखों

की आत्यंतिक निवृत्ति को मोक्ष कहा गया है। मोक्ष प्राप्ति को जीवन का अंतिम ध्येय माना गया है ,जहाँ जीव जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति पा लेता है। अद्वैत दर्शन में ‘अविद्या: निवृत्ति: एव मोक्ष:’ की बात कही गई है। ज्ञान और भक्ति दोनों को ही मोक्ष का उपाय माना गया है। बौद्ध और जैन जैसी अवैदिक परंपराओं में भी मोक्ष की अवधारणा पाई जाती है। बुद्ध ने इसे ‘निर्वाण’ कहा है।

quote

स्वर्ग-नरक तथा आकाश के परे, राज करने वाले शासकों से संबद्ध अनेक कथाओं अथवा अंधविश्वासों के द्वारा मनुष्य को भुलावे में डालकर, उसे आत्मसमर्पण के लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जाता है। इन सब अंधविश्वासों से दूर रहकर, तत्वज्ञानी वासना के त्याग द्वारा जान-बूझकर इस लक्ष्य की ओर आगे बढ़ता है।

स्वामी विवेकानन्द
quote

भारतवर्ष में जितने वेदमतानुयायी दर्शनशास्त्र हैं, उन सबका एक ही लक्ष्य है और वह है—पूर्णता प्राप्त करके आत्मा को मुक्त कर लेना। इसका उपाय है योग। 'योग' शब्द बहुभावव्यापी है। सांख्य और वेदांत उभय मत, किसी किसी प्रकार से योग का समर्थन करते हैं।

स्वामी विवेकानन्द
quote

मौन से समृद्ध कुछ नहीं है। मौन में समस्त कोलाहल मोक्ष पा जाते हैं।

रघुवीर चौधरी
quote

कर्तव्य तो एक व्यर्थ की बकवास है। मैं मुक्त हूँ—मेरे सारे बंधन कट चुके हैं। यह शरीर कहीं भी रहे या रहे, इसकी मुझे क्या परवाह।

स्वामी विवेकानन्द
quote

काया और स्थूल के अतीत धाम में जहाँ जीव जाता है, वहीं वह 'सहज' समाहित है।

आचार्य क्षितिमोहन सेन
quote

संस्कार को हम स्वतंत्र होने की यात्रा का ‘अथ’ कह सकते हैं और मोक्ष को उसकी ‘इति’। संस्कार हमें मनुष्य के स्वभाव-धर्म में ला खड़ा कर, स्वतंत्र कर्म का अधिकारी बनाता है। ‘धर्म’ के साध्य रूप का द्वार खोलता है, पथ प्रशस्त करता है। कर्म के कई मार्गों में हमें ले जाता है—हम कह सकते हैं कि स्वतंत्र-भाव की परिधि बढ़ाता है।

मुकुंद लाठ
quote

धनी हो या दरिद्र, दुःखी हो या सुखी, निर्दोष हो या सदोष (जैसा भी हो), मित्र परम गति है।

वाल्मीकि
quote

प्रेम में मोक्ष और बंधन परस्पर विरोधी हैं, क्योंकि प्रेम मोक्ष की भी चरम स्थिति है और बंधन की भी।

रवींद्रनाथ टैगोर
quote

हे अर्जुन! सर्दी-गर्मी और सुख:दुख को देने वाले इंद्रियों और विषयों के संयोग तो क्षणभंगुर और अनित्य हैं, इसीलिए उनको तू सहन कर, क्योंकि हे पुरुषश्रेष्ठ! दुःख-सुख को समान समझने वाले जिस धीर पुरुष को ये इंद्रियों के विषय व्याकुल नहीं कर सकते, वह मोक्ष के लिए योग्य होता है।

वेदव्यास
quote

भारतीय विचारक यह मानते हैं कि मनुष्य की सच्ची मुक्ति अविद्या से मुक्ति पाना है।

रवींद्रनाथ टैगोर
quote

उपकारी जब उपकृत द्वारा विध्वस्त होता है, तब मूढ़, अहं, कृतज्ञतारूपी अर्गला को तोड़कर, दंभ-कंटकाकीर्ण मृत्युपथ को उन्मुक्त करता है।

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र
quote

वेदवेत्ता विद्वान तप से ही परम अमृत मोक्ष को प्राप्त होते हैं।

वेदव्यास
quote

जो अपनी आत्मा के साथ तो क्या, प्रकृति के साथ भी सामंजस्य में नहीं जीते और इस के विपरीत निसर्गविरुद्ध जटिलताओं में उलझते हुए; शरीर और मन में प्रकृति द्वारा प्रदत्त मधुर स्वस्थताओं को आघात पहुँचाते जाते हैं, ऐसे लोगों के लिए दस लाख़ वर्षों की दुगुनी अवधि भी मुक्ति के लिए अपर्याप्त है।

परमहंस योगानंद
quote

ब्रह्मनिष्ठ मोक्ष पाता है, अतः मुमुक्षु को दृश्य का अवश्य त्याग करना चाहिए।

श्री पीताम्बर पंडित
quote

मोक्ष ही मनुष्य जीवन की सार्थकता है।

महात्मा गांधी
quote

भव-पीड़ा के आधारभूत अज्ञान के हटने के लिए मोक्ष-प्राप्ति के आधारभूत तत्त्व के दर्शन को ही 'ज्ञान' कहते हैं।

तिरुवल्लुवर
quote

ब्रह्म आत्मा की एकता का अपरोक्ष ज्ञान, मोक्ष का साज्ञात् साधन है।

श्री पीताम्बर पंडित
quote

जिस तरह मन विषयों में रमता है, उसी तरह यदि आत्म-साक्षात्कार करने में रमे तो, हे योगीजन! जीव शीघ्र ही निर्वाण पा जाए।

महावीर
quote

जिन्हें मुक्ति की इच्छा नहीं, ऐसे महान भक्तों को प्रणाम है।

माधवदेव
quote

तो अकिंचनता (दरिद्रता) में मोक्ष है और किंचनता (संपन्नता) में बन्धन ही है। धन और निर्धनता दोनों ही अवस्थाओं में ज्ञान से ही जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

वेदव्यास
quote

हमें चाहिए मुक्ति, जन्म भारत में पावैं।

वियोगी हरि
quote

यदि आप इस जीवन में मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकते, तो इसका क्या प्रमाण है कि आप आने वाले जीवन में मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं?

स्वामी विवेकानन्द
quote

सुवासना और दुर्वासना—ये दोनों मोक्ष और बंधन के मूल कारण हैं।

माधवदेव
quote

निष्काम कर्मोपासनादि मोक्ष के अवान्तर साधन है।

श्री पीताम्बर पंडित
quote

यह समझकर कि शरीर बड़ा धोखेबाज़ है, इसी क्षण मोक्ष की तैयारी करें।

महात्मा गांधी
  • संबंधित विषय : देह
quote

हमारा कर्म भी जब संकीर्ण स्वार्थ में ही चक्कर खाता रहता है, तब वही कर्म हमारे लिए भयंकर बंधन हो जाता है।

रवींद्रनाथ टैगोर

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए