Font by Mehr Nastaliq Web
Balkrishna Bhatt's Photo'

Balkrishna Bhatt

1844 - 1914 | الہٰ آباد, اتر پردیش

کی

باعتبار

चरित्र पालन सभ्यता का प्रधान अंग है। कौम की सच्ची तरक्की तभी कहलावेगी, जब हर एक आदमी उस जाति या कौम के चरित्र-संपन्न और भलमनसाहत की कसौटी में कसे हुए अपने को प्रगट कर सकते हों।

  • विषय :
    اور 2 مزید

आँख हो मनुष्य हृदय से देख सकता है, पर हृदय होने से आँख बेकार है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

मन के पवित्र या अपवित्र करने का द्वार नेत्र है।

मन जब अकलुषित और स्वस्थ है, तभी विविध ज्ञान उसमें उत्पन्न होते हैं—व्यग्र हो जाने पर नहीं।

आँख में आँसू उन्हीं अकुटिल सीधे सत्पुरुषों के आता है, जिनके सच्चे सरल चित्त में कपट और कुटिलाई ने स्थान नहीं पाया है।

  • विषय :
    اور 4 مزید

कवियों का अपनी कल्पना-शक्ति के द्वारा ब्रह्मा के साथ होड़ करना कुछ अनुचित नहीं है, क्योंकि जगत्स्रष्टा तो एक ही बार जो कुछ बन पड़ा; सृष्टि-निर्माण-कौशल दिखला कर आकल्पांत फ़रराग़त हो गए, पर कविजन नित्य नई-नई रचना के गढ़ंत से जाने कितनी सृष्टि-निर्माण-चातुरी दिखलाते हैं।

जो बेकलेजे हैं; उनकी बैल-सी बड़ी-बड़ी आँखें केवल देखने ही को हैं, चित्त की वृत्तियों का उन पर कभी असर होता ही नहीं।

  • विषय :
    اور 3 مزید

आदमी में मन की पवित्रता छिपाए नहीं छिपती, कुटिल और कलुषित मन वाला छिप सकता है।

  • विषय :
    اور 3 مزید

मनुष्य के तन में एक आँख ही सार पदार्थ है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

देश या जाति का एक-एक व्यक्ति, संपूर्ण देश या जाति की सभ्यता रूप कार्य का कारण है।

यौवन सुख केवल अतृप्त लालसाओं के सिवाय और कुछ नहीं है। सच्चे सुख का समय केवल बाल्य अवस्था है।

  • विषय :
    اور 3 مزید

भोलेपन से ख़ाली तथा दगीली ख़ूबसूरती पहले तो कोई ख़ूबसूरती ही नहीं है, और कदाचित् हो भी तो कुटिलाई और बाँकपन लिए; हाव-भाव दूषित, मलिन और अपवित्र मन की खोटाई के साथ, ऊपर से रंगी-चुंगी सुंदरता छूत के समान देखने वालों के मन में अवश्य अपवित्र और दूषित भाव पैदा करेगी।

  • विषय :
    اور 2 مزید

तनिक भी बाहर की चिंता का कपट तथा कुटिलाई की मैल मन पर संक्रामित रहे, तो उसके दो चित्त हो जाने से सूक्ष्म विचारों की स्फ़ूर्ति चली जाती है।

अपने बनावटी रूप का अभिमान करने वालों का अभिमान क्षणिक होता है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

जिस सौंदर्य में भोलेपन की झलक नहीं वह बनावटी सौंदर्य है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

संसार में जो कुछ भलाई हुई है या होगी, उस सब का मूल सदा प्रयत्न है और इस प्रयत्न की जान आशा है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

दुःख एक प्रकार का ऐसा विमल जल है, जिसमें स्नान कर मनुष्य सुगमता से शांति के मंदिर में प्रवेश पा सकता है, जहाँ जाकर इसे उत्कृष्ट सुख का दर्शन अति सुलभ है।

जो मन के पवित्र और दृढ़ हैं, वे क्या नहीं कर सकते।

इल्म और लियाक़त में हम चाहे उत्कृष्ट विद्वान् हों, अधिक धन भी पास हो; पर चरित्र की कसौटी में यदि कसे हुए हों, तो हम चाहे जैसी दशा में हों हमारी मातबरी सबों से अधिक समझी जाएगी।

जिस तरह अक्स लेने के लिए शीशे को पहले ख़ूब धो-धुवाकर साफ़ कर लेते हैं, इसी भाँति सुंदर बात को धारण के लिए हृदय की सफ़ाई की बहुत बड़ी आवश्यकता है।

माधुर्य; जगतकर्त्ता की अद्भुत शक्ति है, जिसके द्वारा सात्विक भावों का उद्‌गार मनुष्य के चित्त पर हुआ करता है।

  • विषय :
    اور 1 مزید

मन, वचन और काम में आपस का मेल होना ही महत्त्व या चारित्र्य है।

हिय की आँख से देखना ही देखना है और इस तरह का देखना जो जानते हैं, उन्हीं का ठीक-ठीक देखना है।

  • विषय :
    اور 1 مزید

पहले समाज का असर भाषा पर होता है, फिर शिक्षा का।

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

यह कहना कि बिना प्रतिभा के कवि होगा ही नहीं, सर्वथा सुसंगत है। प्रतिभाहीन मनुष्य अभ्यास के बल से दो-चार पद गढ़ ले तो गढ़ ले, किन्तु प्रतिभा होने से वह निरी गढ़ंत रहेगी—रस उस उसमें कहीं से टपकेगा।

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

चरित्र-रक्षा एक प्रकार की संदली ज़मीन है, जिस पर यशः सौरभ इत्र के समान बनाए जा सकते हैं।

कविता में प्रसाद-गुण दाखरस के तुल्य है—जो स्वाद में मिस्त्री से अधिक मीठा होता है, पर मुख के किसी अवयव को ज़रा भी उससे क्लेश नहीं होता।

  • विषय :
    اور 2 مزید

जिस देश का उत्थान या पतन होना होता है, वहाँ उस देश के लोगों में पहले ही से क़ौमी तरक़्क़ी या क़ौमी तनज़्ज़ुली के आसार नज़र पड़ने लगते हैं।

  • विषय :
    اور 1 مزید

एक तत्त्वदर्शी विद्वान का देखना यही है कि उसके नेत्र; उस देखे हुए पदार्थ की नस-नस में पैठ, मन का काम में लाकर सोचते-सोचते उसके तत्त्व तक पहुँच जाते हैं।

  • विषय :

स्वार्थ-वश प्रेम तथा द्रोह सभी करते हैं, पर निस्वार्थ प्रेम का भाव केवल मानने ही के कारण से है।

  • विषय :
    اور 1 مزید

देश की दुर्गति के बहुत से कारणों में, स्त्रियों की ओर से मर्दों का निरपेक्ष होना भी एक कारण है।

  • विषय :
    اور 1 مزید

लोक एषणा या लोक रंजन ऐसी बला है कि कैसे ही आप चोखे-से-चोखे सच कहने वाले या सच्चा बर्ताव रखने वाले हो, कुछ-न-कुछ बनावट किए बिना चल ही नहीं सकता।

  • विषय :
    اور 1 مزید

अपनी निज की भाषा के कामकाजी शब्दों को मर जाने का मृतप्राय हो जाने से बचाना अच्छे लेखकों का काम है।

जिनको अपनी प्रतिष्ठा और गौरव का ख़याल है, वे केवल नीचा काम करने से अपने को अलग रखते हैं, बल्कि 'आत्मोत्कर्ष विधान' अपनी तरक्की अपने निज बाहुबल से क्यों कर हो सकती है—इसे भी वे ही जानते हैं।

  • विषय :
    اور 1 مزید

हमें इस सनातन धर्म पर भी बड़ी हँसी आती है, और कुढ़न होती है कि इस सनातन का कुछ ओर-छोर भी है? दुनिया की जितनी बुराई और बेहूदगी है, सब इस सनातनधर्म में भरी हुई है।

  • विषय :
    اور 1 مزید

आत्मगौरव चरित्र-संशोधन की पहिली सीढ़ी है। मनुष्य में चरित्र की पवित्रता की अंतिम सीमा भी यही है।

  • विषय :

वह नौजवान, जो ऊपर को नहीं देखता, निश्चय है, नीचे को ताकेगा।

लोग मन को नाहक चंचल-चंचल कह कर प्रसिद्ध किए हैं। चांचल्य नेत्रों का रहता है, बझता है निरपराधी मन बेचारा।

  • विषय : 1

जिस भाषा का जो अधिक प्रबल अनुशीलन किए रहेगा, वही भाषा वह अपने मामूली बोलचाल में बोलेगा।

लावण्य का लालित्य बढ़ाने में स्वाभाविक सौंदर्य सार पदार्थ है।

  • विषय : 1

आत्मगौरव एक प्रकार का साधन है, जिसे बचाए रखना सहज काम नहीं है।

  • विषय :

बुद्धिमानों ने जिसे शुद्ध पारमार्थिक और निरा अलौकिक निश्चय कर रखा है, लौकिक या लोक रंजन उसमें भी जा घुसा और यहाँ तक उसे बिगाड़ डाला कि शुद्ध परमार्थ की उसमें कहीं महक भी बच रही।

  • विषय :

दुःख ही मनुष्य को उभाड़ने वाला है, और अपने में उभड़ने की इच्छा से ही मनुष्य दुःख उठाकर भी उससे परे होने की अभिलाषा रखता है।

  • विषय : 1

अनेक प्रचलित कुसंस्कारों में हमारे समाज के बीच नाक कट जाने का भय भी ऐसी बड़ी बुराई है कि इससे जानिए कितने घराने घूर में मिल गए।

  • विषय : 1

जब तक किसी भाषा में जान है; अर्थात रोजमर्रे के काम में उसे लोग वर्तते हैं और पुष्ट रीति पर उसके स्थिति बनी रहती है, तब तक नए-नए मुहाविरे नित्य गले में ही बनते ही जाएँगे।

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए