ओरहान पामुक के उद्धरण
मुझे लगता है कि एक लड़की के लिए किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करना आसान होगा जिसे वह नहीं जानती, क्योंकि जितना अधिक आप पुरुषों को जानोगे; उनसे प्यार करना उतना ही कठिन होगा।
ख़ुद को किताब की समस्याओं में डुबाना प्यार के बारे में सोचने से बचने का अच्छा तरीक़ा है।
मैंने एक दिन एक किताब पढ़ी और मेरा पूरा जीवन बदल गया।
अगर किसी प्रेमी का चेहरा आपके दिल पर अंकित है, तो दुनिया अभी भी आपका घर है।
कोई कुछ भी कहे, जीवन में सबसे महत्त्वपूर्ण चीज़ ख़ुश रहना है।
किताबें, जिन्हें हम सांत्वना समझने की भूल करते हैं; केवल हमारे दुःख को और गहरा करती हैं।
करुणा और समर्पण के बीच का अंतर प्रेम का सबसे अंधकारमय, सबसे गहरा क्षेत्र है।
असली संग्रहालय वे स्थान हैं, जहाँ समय स्थान में परिवर्तित हो जाता है।
पहली बात जो मैंने स्कूल में सीखी वह यह थी कि कुछ लोग बेवक़ूफ़ होते हैं, दूसरी बात जो मैंने सीखी वह यह कि कुछ तो इससे भी बदतर हैं।
मुझे अपनी कल्पना को साकार करने के लिए अकेलेपन के दर्द की ज़रूरत है।
पेंटिंग विचार का मौन और दृष्टि का संगीत है।
मैं जब तक जीवित रहूँगा, उनकी नक़ल नहीं करूँगा या उनसे अलग होने के लिए ख़ुद से नफ़रत नहीं करूँगा।
जो चीज़ हमें एक साथ बाँधती है, वह यह है कि हम दोनों ने जीवन के प्रति अपनी उम्मीदें कम कर दी हैं।
मेरे शब्दों और रंगों की पसंद से यह जानने का प्रयास कीजिए कि मैं कौन हूँ, क्योंकि आपके जैसे चौकस लोग चोर को पकड़ने के लिए पैरों के निशान की जाँच कर सकते हैं।
कुत्ते भी बोलते हैं, लेकिन केवल उन्हीं से जो सुनना जानते हैं।
भगवान में विश्वास करने से इनकार करने में बहुत गर्व शामिल है।
लोग केवल तभी झूठ बोलते हैं, जब कोई ऐसी चीज़ होती है जिसे खोने का उन्हें बहुत डर होता है।
पेंटिंग ने साहित्य को वर्णन करना सिखाया।
मेरा दुःख मुझे जीवन से बचाता है।
मुझे बताओ, प्यार किसी को मूर्ख बनाता है या केवल मूर्ख ही प्यार करते हैं?
ख़ुशी का मतलब है कि आप जिससे प्यार करते हैं, उसके क़रीब रहना; बस इतनी-सी बात है।
अगर आप कहीं जाने की राह पर हैं तो ज़िंदगी ख़ूबसूरत है।
ख़ुशी किसी को अपनी बाँहों में भर लेने और यह जानने में है कि पूरी दुनिया आपकी बाँहों में है।
मैं पेड़ नहीं, इसका अर्थ बनना चाहता हूँ।
संकीर्ण मानसिकता से रहित और किसी सामाजिक निषेद्ध या राष्ट्रीय मिथकों से मुक्त आदर्श पाठक जैसी कोई चीज़ नहीं होती, उसी तरह जैसे आदर्श उपन्यासकार जैसी कोई चीज़ नहीं होती।
एक उपन्यासकार की आदर्श पाठक की तलाश—वह चाहे राष्ट्रीय हो या अंतर्राष्ट्रीय—उपन्यासकार के अपने को उसके रूप में कल्पना करने और फिर उसे दिमाग़ में रखकर किताबें लिखने से शुरू होती है।