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एकता पर उद्धरण

उद्देश्य, विचार, भाव

आदि में एकमत होना एकता है। एकता में बल है। आधुनिक राज-समाज में विभिन्न आशयों में इस एकबद्धता की पुष्टि आदर्श साध्य है। इस समूहबद्धता का इतना ही महत्त्व शक्ति-समूहों के प्रतिरोध की संतुलनकारी आवश्यकता में है। कविता इन दोनों ही पक्षों से एकता की अवधारणा पर हमेशा से मुखर रही है।

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जो हिंदुस्तान में पैदा हुआ है उसका स्थान हिंदुस्तान में है—चाहे फिर वह किसी धर्म का हो।

महात्मा गांधी
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जो अल्पमत में हैं उनकी हमें ज़्यादा दरकार होनी चाहिए, यही तालीम मैं अबतक देता आया हूँ।

महात्मा गांधी
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सबकी भलाई में हमारी भलाई निहित है।

महात्मा गांधी
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जो मानव भिन्नत्व में एकत्व को देखता है वही प्राज्ञ माना जा सकता है।

गुरजाड अप्पाराव
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मनुष्य का सर्वोपरि उद्देश्य, सर्वश्रेष्ठ पराक्रम धर्म ही है और यह सब से आसान है।

स्वामी विवेकानन्द
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जिस प्रकार गंगा की धारा को पर्वत-प्रदेशीय, या उत्तरप्रदेशीय या बिहारी, या बंगाली कहना निरर्थक है, उसी प्रकार सत्य, धर्म और संस्कृति प्रभृति महासंपद् भी अविच्छेद्य और सीमातीत है।

आचार्य क्षितिमोहन सेन
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विश्वबंधुत्व द्वारा शांति की स्थापना संसार का सर्वोच्च आदर्श है।

परमहंस योगानंद
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जहाँ पर बहुमतवाले; अल्पमतवालों को मार डालें, वह तो ज़ालिम हुकूमत कहलाएगी। उसे स्वराज्य नहीं कहा जा सकता।

महात्मा गांधी
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सामाजिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक कल्याण की एक ही नींव है, और वह यह जानना कि ‘मैं और मेरा भाई एक हैं।’ यह सब देशों और सब जातियों के लिए सत्य है।

स्वामी विवेकानन्द
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मानव-समाज का सर्व प्रधान तत्त्व है, मनुष्य-मात्र का ऐक्य। सभ्यता का अर्थ है, एकत्र होने का अनुशीलन।

रवींद्रनाथ टैगोर
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सृष्टि के पूर्व एकत्व रहता है, सृष्टि हुई कि वैविध्य शुरू हुआ। अतः यदि यह विविधता समाप्त हो जाए, तो सृष्टि का ही लोप हो जाएगा।

स्वामी विवेकानन्द
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किसी परिमित वर्ग के कल्याण से संबंध रखनेवाले धर्म की अपेक्षा, विस्तृत जनसमूह के कल्याण से संबंध रखनेवाले धर्म उच्च कोटि का है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
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प्रेमानंद में प्रेमी अपनी आत्मा का प्रिय की आत्मा से संयोग करता है।

मैनेजर पांडेय
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संसार के सर्वसाधारण के साथ साधारण रूप से हमारा मेल है।

रवींद्रनाथ टैगोर
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मैं अपने को सनातनी हिंदू मानता हूँ तो भी ऐसा सनातनी नहीं कि सिवा हिंदू के और किसी को हिंदुस्तान में रहने नहीं दूँ। कोई किसी धर्म का हो लेकिन हिंदुस्तानी है और उसको यहाँ रहने का उतना ही हक़ है, जितना मुझको है।

महात्मा गांधी
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भारत में तीन मनुष्य एक साथ मिलकर, पाँच मिनट के लिए भी कोई काम नहीं कर सकते। हर एक मनुष्य अधिकार प्राप्त करने के लिए प्रयास करता है और अंत में संगठन की दुरवस्था हो जाती है।

स्वामी विवेकानन्द
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मनुष्य को समूह बनाकर रहने की प्रेरणा पशु-जगत् के समान प्रकृति से मिली है, इसमें संदेह नहीं; परंतु उसका क्रमिक विकास विवेक पर आश्रित है, अंध प्रवृत्तिमात्र पर नहीं।

महादेवी वर्मा
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सभी धर्म, निम्नतम मूर्तिपूजा से लेकर उच्चतम निरपेक्षता तक, मानव आत्मा द्वारा अनंत को समझने और अनुभव करने के अनेक प्रयास मात्र हैं।

स्वामी विवेकानन्द
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सभी धर्म मेरे लिए पवित्र हैं।

स्वामी विवेकानन्द
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ऐक्य के अभाव से मनुष्य बर्बर हो जाता है; ऐक्य की शिथिलता से मनुष्यत्व व्यर्थ हो जाता है, क्योंकि सहकारिता ही मनुष्य का सत्य धर्म है, उसकी श्रेष्ठता का आधार है।

रवींद्रनाथ टैगोर
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कर्ता की एकता और अन्विति ही वह तत्व है, जो सातत्य को बनाता है।

सुधीश पचौरी
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दरअसल धर्म का अर्थ मज़हब या ‘रिलिजन’ से ज़्यादा विस्तृत है। इसकी व्यत्पत्ति जिस धातु-शब्द से हुई है—उसके मानी हैं ‘एक साथ पकड़ना।’

जवाहरलाल नेहरू
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हिंदी का तो जन्म ही मानो इसीलिए हुआ था कि उसमें कोई सुपरिभाषित प्रादेशिक अस्मिता नहीं, बल्कि एक समग्र भारतीय अस्मिता बोले।

रमेशचंद्र शाह
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सृष्टि के द्वैत से ऊपर उठकर, उसके पीछे विद्यमान स्त्रष्टा की अखंड एकता को पहचानना ही मनुष्य का सर्वोच्च लक्ष्य माना गया।

परमहंस योगानंद
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अगर कोई कहे कि विषमता में से गुज़रकर ही हम अंत में समत्व और एकत्व को प्राप्त कर लेंगे, तो हमारा उत्तर यह है कि जिस धर्म की दुहाई देकर ये बातें कही जाती है, वही बारंबार कहता है कि कीचड़ से कीचड़ नहीं धुल सकता। मानों अनैतिकता से कोई नैतिक या सच्चरित्र बन सकता है।

स्वामी विवेकानन्द
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मुक्ति अकेले की नहीं होती। अलग से अपना भला नहीं हो सकता। मनुष्य की छटपटाहट है—मुक्ति के लिए, सुख के लिए, न्याय के लिए। पर यह बड़ी लड़ाई अकेले नहीं लड़ी जा सकती है।

हरिशंकर परसाई
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ऐक्य-बोध का उपदेश जिस गंभीरता से उपनिषदों में दिया गया है, वैसा किसी दूसरे देश के शास्त्रों में नहीं मिलता।

रवींद्रनाथ टैगोर
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काश्मीर से लेकर कन्याकुमारी जो लोग पड़े है वे सब हिंदुस्तानी है। उनमें आर्य और अनार्य या आर्यावर्त और द्राविड़स्तान का भेदभाव करना, कोरी अज्ञानता है।

महात्मा गांधी
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वेदांत-दर्शन का एक मात्र विषय है—एकत्व की खोज।

स्वामी विवेकानन्द
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जब कोई एक विराट भाव-धारा एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश पर बह चलती है, तब वह धारा ही सर्वप्रदेशों में योग-ऐक्य के सूत्र का काम करती है।

आचार्य क्षितिमोहन सेन
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स्मरण रहे, एकता, किसी भाव की भी एकता—राष्ट्रीय उन्नति का मूलमंत्र है।

गणेश शंकर विद्यार्थी
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सचमुच जब लोग ख़ुद मार-पीट करके या रिश्तेदारों को पंच बनाकर अपना झगड़ा निबटा लेते थे तब वे बहादुर थे। अदालतें आयीं और वे कायर बन गए।

महात्मा गांधी
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शासक वर्गों को साम्यवादी क्रांति होने पर काँपने दो। सर्वहाराओं पर अपनी बेड़ियों के अतिरिक्त अन्य कुछ है ही नहीं, जिसकी हानि होगी। जीतने के लिए उनके सामने एक संसार है। सभी देशों के श्रमिकों संगठित बनो।

कार्ल मार्क्स
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अब जात-पाँत के, ऊँच-नीच के, संप्रदायों के भेद-भाव भूलकर सब एक हो जाइए। मेल रखिए और निडर बनिए। तुम्हारे मन समान हों। घर में बैठकर काम करने का समय नहीं है। बीती हुई घड़ियाँ ज्योतिषी भी नहीं देखता।

सरदार वल्लभ भाई पटेल
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हे धृतराष्ट्र! जलती हुई लकड़ियाँ अलग-अलग होने पर धुआँ फेंकती हैं और एक साथ होने पर प्रज्वलित हो उठती हैं। इसी प्रकार जाति-बंधु भी आपस में फूट होने पर दुख उठाते हैं और एकता होने पर सुखी रहते हैं।

वेदव्यास
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सच्चा हिंदू धर्म वही है जिसमें सब धर्मों का समावेश हो।

महात्मा गांधी
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सच्चा आत्मस्वातंत्र्य प्राप्त करने के लिए सामूहिकता आवश्यक है। सामूहिकता की विशाल उर्वर भूमि मे ही व्यक्ति के वृक्ष और लताएँ फूलती और फलती हैं।

गजानन माधव मुक्तिबोध
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वे सब, जिन्हें समाज घृणा की दृष्टि से देखता है, अपनी शक्तियों को एकत्र करें तो इन महाप्रभुओं और उच्च वंशाभिमानियों का अभिमान चूर कर सकते हैं।

हरिकृष्ण प्रेमी
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अगर हम रामराज्य या ईश्वर का राज्य हिंदुस्तान में स्थापित करना चाहते हैं, तो मैं कहूँगा कि हमारा प्रथम कार्य यह है कि हम अपने दोषों को पहाड़-जैसे देखें और मुसलमानों के दोषों को कुछ नहीं।

महात्मा गांधी
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हमारी आत्मा में अखंड ऐक्य का आदर्श है। हम जो कुछ जानते हैं—किसी-न-किसी ऐक्य सूत्र से जानते हैं।

रवींद्रनाथ टैगोर
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भेद और विरोध ऊपरी हैं। भीतर मनुष्य एक है। इस एक को दृढ़ता के साथ पहचानने का यत्न कीजिए। जो लोग भेद-भाव को पकड़कर ही अपना रास्ता निकालना चाहते हैं, वे ग़लती करते हैं। विरोध रहे तो उन्हें आगे भी बने ही रहना चाहिए, यह कोई काम की बात नहीं हुई। हमें नए सिरे से सब कुछ गढ़ना है, तोड़ना नहीं है। टूटे को जोड़ना है।

हजारीप्रसाद द्विवेदी
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जेल में रहते-रहते आत्मनिष्ठ सत्य एक हो जाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो भाव और स्मृति सत्य में परिणत हो गए हैं। मेरा भी ऐसा ही हाल है। भाव ही इस समय मेरे लिए सत्य है। इसका कारण भी स्पष्ट है—एकत्व-बोध में ही शांति है।

सुभाष चंद्र बोस
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शांति से ही हिन्दू-मुस्लिम एकता क़ायम हो सकेगी। मैं जानता हूँ कि यह बड़ा कठिन काम है।

महात्मा गांधी
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किसी देश में उस समय तक एकता और प्रेम नहीं हो सकता, जब तक उस देश के निवासी एक-दूसरे के दोषों पर ज़ोर देते रहते हैं।

रामतीर्थ
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अगर यहाँ हिंदू, मुसलमान, ईसाई, पारसी और सिख—सबको रहना है तो हिंदी और उर्दू के संगम से जो भाषा बनी है—उसी को राष्ट्र भाषा के रूप में अपनाना होगा।

महात्मा गांधी
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हम मनुष्य भी अपनी कोशिकाओं से बहुत अलग नहीं हैं। हम समूहों में अपनी भूमिकाएँ निभाते हैं: कंपनियाँ, शहर और समाज। किसी बड़ी कंपनी से एक कर्मचारी के चले जाने पर उस कंपनी का कामकाज प्रभावित नहीं होता और शहर या देश के मामले में यह और भी कम होता है। ठीक इसी तरह, किसी एक पेड़ के मर जाने से जंगल के अस्तित्व के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन अगर बहुत महत्त्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति, जैसे पूरा सीनियर मैनेजमेंट अचानक कंपनी छोड़ दें, तो कंपनी की सेहत और भविष्य, दोनों संदिग्ध हो जाएँगे।

वेंकी रामकृष्णन
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हम पर अपने अल्पसंख्यक समुदायों के साथ-साथ, उन सभी समुदायों को लेकर ख़ास ज़िम्मेदारी है, जो आर्थिक या शिक्षा के स्तर पर पिछड़े हुए हैं और जो भारत की कुल जनसंख्या का सबसे बड़ा हिस्सा है।

जवाहरलाल नेहरू
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क्रांति तो नेताओं द्वारा जनता के लिए होती है, जनता द्वारा नेताओं के लिए—वह तो दोनों की अटल एकजुटता में होती है

पॉलो फ़्रेरा
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यह कहने में मुझे कोई नामुनासिब बात नहीं मालूम होती कि हिंदू-धर्म की महत्ता को किसी भी तरह कम किए बग़ैर, मैं मुसलमान, ईसाई, पारसी और यहूदी-धर्म में जो महत्ता है, उसके प्रति हिंदू-धर्म के बराबर ही श्रद्धा ज़ाहिर कर सकता हूँ।

महात्मा गांधी
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दुनिया के किसी भी हिस्से में एक राष्ट्र का अर्थ एक धर्म नहीं किया गया है, हिन्दुस्तान में तो ऐसा था ही नहीं।

महात्मा गांधी

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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