Font by Mehr Nastaliq Web

एकता पर कविताएँ

उद्देश्य, विचार, भाव

आदि में एकमत होना एकता है। एकता में बल है। आधुनिक राज-समाज में विभिन्न आशयों में इस एकबद्धता की पुष्टि आदर्श साध्य है। इस समूहबद्धता का इतना ही महत्त्व शक्ति-समूहों के प्रतिरोध की संतुलनकारी आवश्यकता में है। कविता इन दोनों ही पक्षों से एकता की अवधारणा पर हमेशा से मुखर रही है।

हम अनेक किंतु एक

द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

मातृभूमि

सोहनलाल द्विवेदी

बात बोलेगी

शमशेर बहादुर सिंह

जोखिम

अमित तिवारी

तब ईद सोहाय न होली पिया

परवाना प्रतापगढ़ी

बसइ गाँवइँ मा हिन्दुस्तान

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

जगि रहे बापू केर सपन

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

सहकारी खेती

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

ईस्वरु

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

बसाउ अपन गाम

श्याम दरिहरे

मनभोली अवधी

मोहनलाल यादव

आपन साख बढ़ावति हिन्दी

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

ई देश हमर

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

आइ राष्ट्रकेँ पड़ल प्रयोजन

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

चेतउनी

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

बालक

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

आजादी

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

सायुज्य

धूमकेतु

मुला बस अवधी मा

मनोज मिश्र ‘कप्तान'

चकमक की चिनगारियाँ

गजानन माधव मुक्तिबोध

जिन जात औ पात कै बात करा

परवाना प्रतापगढ़ी

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere