गांधीवाद पर उद्धरण
गांधीवाद महात्मा गांधी
के आदर्शों, आस्थाओं और जीवन-दर्शन पर आधारित विचारधारा है। इसका प्रभाव युगीन और परवर्ती काव्य पर भी परिलक्षित होता है।
अपने में विश्वास और जिसको दुश्मन मानें उसका उद्धार करने में हमारी रक्षा होती है।
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भारत में यदि कोई ग्रंथ झोंपड़ियों से महलों तक में स्थान पा सका है, तो वह तुलसीकृत रामायण है।
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दिल में जो ज्योति होनी चाहिए उसको प्रकट करने की कोशिश हमें करनी है। हमारे दिल में राम विराजमान हैं और वहाँ भी युद्ध चलता है राम और रावण के बीच में। अगर हृदय में, उसके बाहर नहीं, राम पर रावण की जीत होती है तो उसका मतलब है कि हृदय में ज्योति नहीं है, अँधेरा है। अगर राम की रावण पर जय होती है और रावण बेकार हो जाता है या परास्त हो जाता है, तब हमारे भीतर तो ज्योति है ही, बाहर भी दिया-बत्ती जलाने का हमको हक़ हो जाता है।
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जो अल्पमत में हैं उनकी हमें ज़्यादा दरकार होनी चाहिए, यही तालीम मैं अबतक देता आया हूँ।
हममें से हर एक को भंगी बनकर सेवा करनी चाहिए। जो मनुष्य पहले भंगी नहीं बनता, वह ज़िंदा रह नहीं सकता है और न रहने का उसे हक़ है।
बिना आत्मशुद्धि के प्राणिमात्र के साथ एकता का अनुभव नहीं किया जा सकता है और आत्मशुद्धि के अभाव से अहिंसा धर्म का पालन करना भी हर तरह नामुमकिन है।
इंसान ऐसा बना है कि अगर वह अपने बनाने वाले को समझ ले और यह समझ ले कि मैं उसी भगवान का प्रतिबिंब हूँ, तो दुनिया की कोई ताक़त उसके स्वमान को छीन ही नहीं सकती। उसके स्वमान का हनन कोई कर सकता है तो वह ख़ुद ही कर सकता है
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स्वदेशाभिमान का अर्थ मैं देश का हित समझता हूँ।
सत्याग्रह दुनिया में सबसे बड़ी ताक़त है, जिसके सामने आपका बताया हुआ विरोधी संगठन लंबे समय तक टिक नहीं सकता।
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ईश्वर जीवन है, सत्य है, प्रकाश है। वह प्रेम है, वह सर्वोच्च शिव है—शुभ है।
अख़बार का एक काम तो है लोगों की भावनाएँ जानना और उन्हें ज़ाहिर करना, दूसरा काम है लोगों में अमुक जरूरी भावनाएँ पैदा करना और तीसरा काम है लोगों में दोष हों तो चाहे जितनी मुसीबतें आने पर बेधड़क होकर उन्हें दिखाना।
स्वदेशी वह है जो आत्मा को भाता है।
जो प्रौढ़ और तजुर्बेकार हैं, वे ही स्वराज्य भुगत सकते हैं, न कि बे-लगाम लोग।
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मुझे दुनिया को कोई नई चीज़ नहीं सिखानी है। सत्य और अहिंसा अनादि काल से चले आए हैं।
हम जो बातें पढ़ते हैं वे सभ्यता की हिमायत करने वालों की लिखी बातें होती हैं। उनमें बहुत होशियार और भले आदमी हैं। उनके लेखों से हम चौंधिया जाते हैं। यों एक के बाद दूसरा आदमी उसमें फँसता जाता है।
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आत्म विश्वास रावण जैसा नहीं होना चाहिए जो समझता था कि मेरी बराबरी का कोई है नहीं। आत्म विश्वास होना चाहिए विभीषण जैसा, प्रह्लाद जैसा। उनके जी में यह भाव था कि हम निर्बल हैं मगर ईश्वर हमारे साथ है और हमारी शक्ति अनंत है।
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सत्याग्रह का अर्थ है विरोधी को पीड़ा देकर नहीं, अपितु स्वयं कष्ट उठाकर सत्य की रक्षा करना।
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सत्य और अहिंसा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
विरोधी को समझाकर समाधानी से काम करने का प्रयत्न करना, सत्याग्रही का पहला लक्षण और सत्याग्रह की पहली सीढ़ी है।
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गौ-सेवा के बारे में दिल की बात कहूँ तो आप रोने लग जाएँ, और मैं रोने लग जाऊँ... इतना दर्द मेरे दिल में भरा हुआ है।
श्री गोपालकृष्ण गोखले का नाम मेरे लिए एक पवित्र नाम है। वह मेरे राजनीतिक गुरु हैं।
अहिंसा कोई हल्दी-मिर्च तो है नहीं जो बाज़ार से मोल आ जाएगी।
शास्त्रों ने हमें दो बहुमूल्य वचन दिए हैं। उनमें से एक है—‘अहिंसा परमो धर्मः’ और दूसरा है—‘सत्यान्नास्ति परो धर्मः।’
महलों में रहने वाला आदमी राज्य नहीं चला सकता।
मैं ईसा को महान् कलाकार मानता हूँ; क्योंकि उन्होंने सत्य की उपासना की, उसे ढूँढ़ा और अपने जीवन में उसे प्रगट किया।
जहाँ पर बहुमतवाले; अल्पमतवालों को मार डालें, वह तो ज़ालिम हुकूमत कहलाएगी। उसे स्वराज्य नहीं कहा जा सकता।
अपने दल को बलवान बनाने के लिए प्रधानमंत्री पार्लियामेन्ट से कैसे-कैसे काम करवाता है—इसकी मिसालें जितनी चाहिए उतनी मिल सकती हैं। यह सब सोचने लायक है।
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ईश्वर मुझे काफ़ी सेहत और विवेक दे जिससे मैं मानव जाति की सेवा कर सकूँ।
गाँधीवाद, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता की जो बात की जाती है, वह ख़ास अर्थ नहीं रखती। मूल है, जो भी हाथ पड़ जाए, सत्ता पा लेना।
मेरी राय में हिंदू धर्म में दिखाई पड़ने वाली अस्पृश्यता का वर्तमान रूप, ईश्वर और मनुष्य के ख़िलाफ़ किया गया भयंकर अपराध है और इसलिए वह एक ऐसा विष है जो धीरे-धीरे हिंदू धर्म के प्राण को ही निःशेष किए दे रहा है।
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सत्य में अहिंसा छिपी हुई है और अहिंसा में सत्य।
आत्मविश्वास रावण का सा नहीं होना चाहिए जो समझता था कि मेरी बराबरी का कोई है ही नहीं। आत्मविश्वास होना चाहिए विभीषण जैसा, प्रह्लाद जैसा। उनके जी में यह भाव था कि हम निर्बल हैं, मगर ईश्वर हमारे साथ है और इस कारण हमारी शक्ति अनंत है।
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साधन हमारे बस की बात है, इसलिए अहिंसा परम धर्म हुई और सत्य परमेश्वर हुआ।
शुद्ध बनने का अर्थ है मन से, वचन से और काया से निर्विकार बनना, राग-द्वेषादि से रहित होना।
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अपनी कल्पना के इस सत्य की आराधना करते हुए मनुष्य अंतिम शुद्ध सत्य तक पहुँच ही जाता है। और वही परमात्मा है।
हम दुनिया में किसी को दुश्मन बनाना नहीं चाहते और न हम किसी के दुश्मन बनना चाहते हैं—यह मेरी व्याख्या का स्वराज्य है।
सत्य और अहिंसा, सिक्के की दो पीठों की भाँति, एक ही सनातन वस्तु की दो पीठों के समान हैं।
मैं अपने को सनातनी हिंदू मानता हूँ तो भी ऐसा सनातनी नहीं कि सिवा हिंदू के और किसी को हिंदुस्तान में रहने नहीं दूँ। कोई किसी धर्म का हो लेकिन हिंदुस्तानी है और उसको यहाँ रहने का उतना ही हक़ है, जितना मुझको है।
दो राष्ट्रों के बीच युद्ध छिड़ने पर अहिंसा में विश्वास रखने वाले व्यक्ति का धर्म है कि वह उस युद्ध को रोकें।
हम अपने हृदय को साफ़ करें, गंदी चीज़ को पसंद न करें। गंदी चीज़ को पढ़ना छोड़ दें। अगर ऐसा करेंगे तो अख़बार अपना सच्चा धर्म पालन करेंगे।
जो आदमी अपना धर्म पालन करता है, धर्म ही उसका बदला है।
हिन्दुस्तानी सागर के किनारे पर ही मैल जमा है। उस मैल से जो गंदे हो गये हैं उन्हें साफ होना है।
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अगर देश का हित अँग्रेजों के हाथों होता हो, तो मैं आज अँग्रेजों को झुककर नमस्कार करूँगा।
मुझे लगता है कि एक आदमी जो कहता है, वह वैसा करता है या नहीं इसीसे उसकी जाँच होती है।
मृत्यु हरेक का परम मित्र है, वह अपने कर्म के मुताबिक आवेगा ही।
मैं दुनिया में सिर्फ एक ही तानाशाह को स्वीकार करता हूँ और वह है मेरी अंतरात्मा की आवाज़।
सत्य-अहिंसादि साधनों द्वारा ही अधर्म का विरोध किया जा सकता है—यह सामान्य नियम सर्वत्र लागू होता है।
मुझे प्रधानमंत्रियों से द्वेष नहीं है, लेकिन तजुरबे से मैंने देखा है कि वे सच्चे देशाभिमानी नहीं कहे जा सकते। जिसे हम घूस कहते हैं, वह घूस वे खुल्लम-खुल्ला नहीं लेते-देते, इसलिए भले ही वे ईमानदार कहे जाएँ, लेकिन उनके पास वसीला काम कर सकता है। वे दूसरों से काम निकालने के लिए उपाधि वगैरा की घूस बहुत देते हैं।
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मनुष्यों अपनी ओर खींचने वाला अगर जगत में कोई असली चुंबक है; तो वह केवल प्रेम ही है, इसका मैं साक्षी हूँ।
यह जगत का निजी अनुभव है कि आधा छटाँक भर आचरण का जितना फल होता है उतना मन भर भाषणों अथवा लेखों का नहीं होता।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere