संग्रहणीय वस्तु हाथ आते ही उसका उपयोग जानना, उसका प्रकृत परिचय प्राप्त करना, और जीवन के साथ-ही-साथ जीवन का आश्रयस्थल बनाते जाना—यही है रीतिमय शिक्षा।
केवल किसी स्त्री के पास ही यह चुनने की शक्ति है कि अर्पण करना है या नहीं।
अपव्यय और कष्ट जितना ही अधिक प्रयोजनहीन होता है; संचय और परिणामहीन, जय-लाभ का गौरव उतना ही अधिक जान पड़ता है।
परिचय का अर्थ यही है कि जो चीज़ छोड़ने की है उसे छोड़कर, जो चीज़ लेने की है उसे ले लिया जाए।
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संबंधित विषय : रवींद्रनाथ ठाकुर
…चुनाव इस जीवन को जागते हुए या एक प्रकार की जड़ता में बिताने के बीच है।
रचनात्मक प्रक्रिया आपकी मनचाही चीज़ को पाने में आपकी मदद करती है। इसके तीन आसान क़दम है : माँगें, यक़ीन करें और पाएँ।
जो तुमको दुर्बल बनाता है, वह समूल त्याज्य है।
वह काम करें, जिससे आपको ख़ुशी मिलती हो। अगर आप नहीं जानते हैं कि आपको किस चीज़ से ख़ुशी मिलती है, तो पूछें, "मेरी ख़ुशी क्या है?" जब आप अपनी ख़ुशी के प्रति समर्पित हो जाते हैं, तो आप ख़ुशनुमा चीज़ों की बाढ़ को अपनी ओर आकर्षित करेंगे, क्योंकि आप ख़ुशी का संचार कर रहे हैं।
जो युवक नायक दरिद्र होते हुए भी वश में रहने वाला हो, गुणहीन होने पर भी अपनी जीविका चला लेता हो—वह वरण के योग्य है, किंतु गुणों से युक्त होने पर भी अनेक पत्नियों वाला पति विवाह के योग्य नहीं होता।
जो विद्वान् होता है वह सत्य-असत्य की परीक्षा करके, सत्य का ग्रहण और असत्य को छोड़ देता है।
यदि शिल्प मुँहज़ोर है, तो वह कला की शुद्धता को नष्ट कर देगा। आधारभूत तत्व कथ्य है। कथ्य के भीतर पैठ जाएँ, तो शिल्प स्वतः उभरेगा, बिंब स्वतः उभरेंगे, ध्वनि स्वतः उभरेगी। यह सोचने की कोई ज़रूरत नहीं है कि अब नया कुछ करें—ये काले आदमियों पर भूरा रंग पोत रहे हैं, तो हम नीला पोत दें। मुझे भूरे रंग की ज़रूरत महसूस होगी, तो मैं उसे ही इस्तेमाल करूँगा। नीले की ज़रूरत होगी, तो उसे इस्तेमाल करूँगा।
कभी भी एक कलाकार से उसके काम के बारे में सवाल न करें। क्योंकि he is always biased...इससे कोई फ़ायदा नहीं। पसंद हो या नापसंद, प्रतिक्रियाएँ आपकी अपनी हैं। कुछ लोग ग़ुस्सा हो जाएँगे, कुछ प्रसन्न। इससे मुझे क्या लेना-देना?
धन के लोभ से युक्त युवती नायिका, नायक के गुणों, रूप (सौंदर्य) तथा औचित्य की परवाह न करके—अनेक सौतों के होते हुए भी धनी पति को वरण कर ले।
जहाँ जिसका ग्रहण करना उचित हो, वहाँ उसी अर्थ का ग्रहण करना चाहिए।
अस्तेय और अपरिग्रह में बहुत थोड़ा भेद है। जिसकी हमें आज आवश्यकता नहीं है, उसे भविष्य की चिंता से संग्रहकर रखना परिग्रह है।
दूती को चाहिए कि वह स्वयं वर चुन लेने की नायिका को सलाह दे। अपनी बुद्धि और इच्छा से विवाह करके प्रसन्न रहने वाली सजातीय अन्य कन्याएँ तथा शकुंतला आदि की कहानियाँ सुनाकर, नायिका को गांधर्व विवाह के लिए प्रेरित करे और यह बताए कि धनी परिवार में अनेक पत्नियों वाले वर से शादी करके कन्याएँ बहुत दुःखी रहती हैं। अतः उसे अपनी इच्छा से अपने मनोऽनुकूल वर चुनना चाहिए और उसके साथ विवाह कर लेना चाहिए।
चयन और सुसज्जित—प्रत्येक काव्य की प्राथमिक विशेषताएँ हैं।
अगर आपने ग़लत इंसान को छोड़ा नहीं तो सही इंसान कभी नहीं मिलेगा।
अर्थ और प्रीति में; प्रीति को छोड़कर अर्थ को महत्त्व देना चाहिए, क्योंकि धन प्रधान है।
सत्य और स्वयं में जो चुनता है, वह सत्य को भी पा लेता है और स्वयं को भी। और जो स्वयं को चुनता है, वह दोनों को खो देता है।
मैं जिस वस्तु को छोड़ता और उसके बदल में जिसे लेता, उसमें से बिलकुल ही नए और अधिक रसों का निर्माण हो जाता।
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संबंधित विषय : महात्मा गांधी
प्रतिष्ठित और प्रचलित, दोनों के विरुद्ध अपना रास्ता निकालना—हर बार चुनौतियों भरा होता है।
अकेला महसूस कराने वाले लोगों के साथ होने से अच्छा है अकेला होना और ख़ुश रहना।
तुम जो चुनते हो, तुम वही बन जाते हो।
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संबंधित विषय : आत्म-चिंतन
आप जो कुछ भी अपनाते हैं, उसी के आधार पर आपके जीवन का अर्थ तय होता है। अगर आपको लगता है कि ज़िंदगी बेकार है तो इसके लिए ज़िम्मेदार भी, आप और केवल आप ही हैं।
वस्तु को अपनाना और वस्तु को छोड़ देना, दोनों में ही सत्य है। ये दोनों सत्य एक-दूसरे पर निर्भर हैं, और दोनों को यथार्थ रूप से मिलाकर ही पूर्णता-लाभ संभव है।
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संबंधित विषय : रवींद्रनाथ ठाकुर
जो नायक गुणयुक्त होने पर भी नीच कुल का हो, पतित हो, वृद्ध हो तथा परदेश में रहने वाला हो—वह पुरुष विवाह के योग्य नहीं होता।
जो आपके काम का नहीं है, उसे हटाएँगे तभी नए और बेहतर अनुभवों के लिए जगह बनेगी।
मैंने वही अवसर चुने जहाँ मेरी कलात्मक स्वतंत्रता सुरक्षित रहे। इस तथ्य को जानते हुए भी कि फ़िल्म उद्योग लाभोन्मुख है और सिद्धाँतों के ऊपर कलेक्शन को महत्व देता है और निश्चित सिद्धाँतों के प्रति सहनशक्ति भी कम रखता है।
यदि कोई आपके साथ बुरा व्यवहार कर रहा है या आपके लिए समस्याएँ पैदा कर रहा है, तो आप इसका विरोध करने का चयन कर सकते हैं, या आप कुछ भी न करने का चयन कर सकते हैं।कट्टर स्वामित्व के साथ, हमेशा चयन का अधिकार आपको ही होता है।
जो चीज़ें अनुपयोगी 'व्यस्तता' में योगदान देती हैं, उन्हें हटा दें।
एक मनुष्य से सब कुछ छीना जा सकता है, मानवीय स्वतंत्रता से जुड़ी हर चीज़ छीनी जा सकती है। मगर उससे यह चुनाव करने की क्षमता नहीं छीनी जा सकती कि वह किन्हीं परिस्थितियों का सामना किस रवैये के साथ करेगा और अपने लिए कौन सा मार्ग चुनेगा।
एक दिन के प्रयोजन से अधिक जो संचय नहीं करता; हमारी प्राचीन संहिताओं में उस द्विज-गृहस्थ की प्रशंसा की गई है, क्योंकि एक बार हमने संचय करना प्रारंभ किया नहीं कि फिर हम धीरे-धीरे संचय करने की मशीन हो जाते हैं, तब हमारा संचय प्रयोजन को ही बहुत दूर छोड़कर आगे चला जाता है। फिर प्रयोजन को ही वंचित और पीड़ित करता रहता है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere