Font by Mehr Nastaliq Web

महापुरुष पर उद्धरण

quote

जगत् के सभी महान् पैग़ंबरों का प्राण पर अत्यंत अद्भुत संयम था, जिसके बल से वे प्रबल इच्छाशक्तिसम्पन्न हो गए थे।

स्वामी विवेकानन्द
quote

देह-भूमि पर ईश्वर-साक्षात्कार की फ़सल काट लेने के बाद, सिद्ध पुरुष अपने शरीर की चिंता नहीं करता। फिर वह दूसरों के कष्ट कम करने के लिए अपने शरीर को रोगग्रस्त होने भी देता है, तो भी उसके कभी दूषित हो सकने वाले मन पर उसका प्रभाव नहीं पड़ता।

परमहंस योगानंद
quote

जो महान संत विश्वमाया के स्वप्न से जाग जाते हैं; और इस सत्य को पहचान लेते हैं कि यह विश्व तो ईश्वर के मन की केवल एक कल्पना है, वे शरीर के साथ जो चाहे कर सकते हैं, क्योंकि उन्हें यह ज्ञान हो जाता है शरीर ऊर्जा का केवल एक ऐसा घनीभूत या संघनित रूप है जिसमें जैसा चाहे परिवर्तन किया जा सकता है।

परमहंस योगानंद
quote

प्रकृत सत्य-प्रचारक ही जगत् के प्रकृत मंगलाकांक्षी हैं। उनकी दया से कितने जीवों का जो आत्मोन्नयन होता है, उसकी इयत्ता नहीं।

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र
quote

जो लोग महापुरुष बन गए वे पागल हो सकते हैं।

रघुवीर चौधरी
quote

किसी मूर्त आदर्श में; जिनकी कर्ममय अटूट आसक्ति ने समय या सीमा को अतिक्रम कर, उन्हें सहज भाव से भगवान बना दिया है, जिनके काव्य, दर्शन एवं विज्ञान मन के भले-बुरे विच्छिन्न संस्कारों को भेद कर; उस आदर्श में ही सार्थक हो उठे हैं—वे ही हैं सद्‌गुरु।

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र
quote

गुणवान् व्यक्ति समाज में आदर का पात्र होता है। गुण विरूप व्यक्ति को भी सौभाग्यशाली बना देते हैं।

वात्स्यायन
quote

संत अपनी प्रंशसा नहीं करता, इससे सर्वत्र उसकी प्रंशसा होती है। अपने कार्य के प्रति वह अहंकार नहीं करता, इससे वह स्थायी होता है। वह किसी का विरोध नहीं करता, इसी से कोई भी व्यक्ति उसका विरोध नहीं करता।

लाओत्से
quote

जैसे फल लगने से वृक्ष नम्र हो जाते हैं; जैसे नवीन जल भरने से मेघ भूमि पर झुक जाते है, वैसे ही सत्पुरुष भी संपत्ति प्राप्त कर के उद्धत नहीं होते, किंतु नम्र हो जाते हैं।

भर्तृहरि
quote

महान् बनने के उपदेशों और उद्बोधनों से किसी का लाभ नहीं है। साधारण आदमी उनका पालन नहीं कर सकता। अगर पालन करने लगे, तो मज़े में उसकी ज़िंदगी बरबाद हो सकती है। और जिसे महान् होना ही है, वह महान् होने के लिए इन उपदेशों की राह नहीं देखेगा—उसे ख़ुद राह दिखती है।

हरिशंकर परसाई
quote

नीति जानने वाले चाहे निंदा करें, चाहे स्तुति और लक्ष्मी चाहे घर में बहुत सी आवे, चाहे चली जाए, प्राण चाहे अभी जाए, चाहे कल्पांत में, परंतु धीर लोग न्याय का मार्ग छोड़कर एक पग भी उससे बाहर नहीं चलते।

भर्तृहरि
quote

महापुरुष मूल रूप से विद्रोही होता है, विद्रोही हुए बिना वह महान् हो ही नहीं सकता। भीतर विद्रोह की यह ज्वाला जितनी बलवती होगी, उतना ही महान् उसका जीवन होगा।

हरिशंकर परसाई
quote

प्रथम हृदय है, और फिर बुद्धि। प्रथम सिद्धांत और फिर प्रमाण। प्रथम स्फुरणा और फिर उसके अनुकूल तर्क। प्रथम कर्म और फिर बुद्धि। इसीलिए बुद्धि कर्मानुसारिणी कही गई है। मनुष्य जो भी करता है, या करना चाहता है उसका समर्थन करने के लिए प्रमाण भी ढूँढ़ निकालता है।

महात्मा गांधी
quote

आध्यात्मिक नियम यह अनिवार्य नहीं बनाता कि कोई गुरु या सिद्ध पुरुष; जब-जब दूसरे किसी मनुष्य को रोगमुक्त करें, तो वह स्वयं बीमार हो जाएँ।

परमहंस योगानंद
quote

संत अपने लिए संचय नहीं करता। जितना अधिक वह दूसरों पर ख़र्च करता है, उतना ही वह संपन्न होता है।

लाओत्से
quote

जो आदमी पूर्व में असंबद्ध प्रतीत होने वाले तथ्यों के बीच नया रिश्ता जोड़ता है; वह आइन्सटाइन जैसा महान् वैज्ञानिक होता है, अथवा गांधी और लेनिन जैसा सामाजिक क्रांतिकारी।

राजेंद्र माथुर
quote

विशाल बुद्धि की कार्य-प्रणाली भी विशाल होती है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
quote

जगत् के समस्त ऐश्वर्य-ज्ञान, प्रेम एवं कर्म, जिनके अंदर सहज उत्सारित है और जिनके प्रति आसक्ति से मनुष्य का विच्छित्र जीवन, एवं जगत् के समस्त विरोधों का चरम समाधान लाभ होता है—वे ही हैं मनुष्य के भगवान।

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र
quote

परतंत्र देशवासी के लिए वही मनुष्य पूज्य हो जाता है, जिसने किसी भी देश के लिए बंधन काटने के लिए अपना हाथ बढ़ाया हो।

गणेश शंकर विद्यार्थी
quote

श्रेष्ठता की कसौटी को लेकर हमारे साहित्य में रचनाकारों और आलोचकों के दो-तीन बड़े मज़बूत और सुपरिचित खेमे हैं; इनकी मान्यताएँ और दृष्टियाँ अत्यंत सुपरिभाषित हैं और अपने को एक-दूसरे से भिन्न मानने में ही उनकी सैद्धांतिक सार्थकता समझी जाती है, पर एक मामले में दोनों खेमों के सदस्य एक जैसे हैं। वे एक ओर भावुकता-विरोध को एक स्वतः सिद्ध मूल्य मानते हैं और दूसरी ओर अकेले में वे सभी भावुक होने की अपार क्षमता दिखा सकते हैं—सब नहीं तो अधिकांश। उन्हीं अधिकांश में एक मैं भी हूँ।

श्रीलाल शुक्ल
quote

संसार में जिन लोगों को अत्यधिक श्रद्धा की दृष्टि से देखा गया है, वे दुःख के अवतार होते हैं। सुख-चैन में जीवन बितानेवाले लक्ष्मी के दास कभी पूजनीय नहीं हुए, और भविष्य में होंगे।

रवींद्रनाथ टैगोर
quote

जो व्यक्ति छोटा है वह विश्व-संसार को असंख्य बाधाओं का राज्य समझता है। बाधाएँ उसकी दृष्टि को अवरुद्ध करती हैं और उसकी आशाओं पर आघात करती हैं, इसीलिए वह सत्य को नहीं जानता, बाधाओं को ही सत्य के रूप में देखता है। लेकिन जो व्यक्ति महान् है, वह बाधाओं से मुक्त होकर सत्य को देख सकता है। तभी महान् लोगों की बातें छोटे व्यक्तियों की बातों के बिल्कुल विपरीत होती हैं।

रवींद्रनाथ टैगोर
quote

महापुरुषों के निधन पर पार्कों में होनेवाली सार्वजनिक सभाएँ या बाज़ार की हड़ताल बहुत हद तक रस्म-अदायगी है। पर रस्में भी हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक जीवन का अविभाज्य अंग है और यदि यशपाल जैसे साहित्यकार के रहने पर भी ऐसी रस्में अदा नहीं की जाति तो उससे कुछ ऐसे निष्कर्ष निकलते हैं जिनसे इस देश के साहित्यकर्मियों को साहित्य की स्थिति के विषय में यथार्थ दृष्टि मिल सकती है।

श्रीलाल शुक्ल
quote

अप्रियवचन से दरिद्र, प्रिय वचनों से संपन्न, अपनी ही स्त्री से संतुष्ट और पराई निंदा से रहित जो पुरुष हैं, उनसे कहीं-कहीं पृथ्वी शोभायमान है, अर्थात् ऐसे पुरुष सभी जगह नहीं मिलते।

भर्तृहरि
quote

कलाकार होने मात्र से, रचनाकार होने मात्र से कोई व्यक्ति श्रेष्ठ वांछनीयता का अधिकारी नहीं होता।

गजानन माधव मुक्तिबोध
quote

सत्पुरुषों को ज्ञान मानमदादि नष्ट करने हेतु होता है, और वही ज्ञान दुर्जनों को मदमान उत्पन्न करता है, जैसे एकांत स्थान; संयमी पुरुषों को मुक्ति साधन का हेतु होता है, और कामातुरों को कामसाधन का कारण होता है।

भर्तृहरि
quote

सत्पुरुष वे हैं, जो अपना स्वार्थ छोड़ कर दूसरे के कार्य को साधते हैं, सामान्य पुरुष वे हैं; जो अपने और पराए दोनों के कार्यों को साधन करते हैं और मनुष्यों में राक्षस वे पुरुष हैं, जो अपने हित के लिए पराए के कार्य को नष्ट करते हैं और जो व्यर्थ पराए कार्य की हानि करते हैं।

भर्तृहरि
quote

मनस्वी पुरुष कार्यसिद्धि के लिए सुख-दुःख की चिंता नहीं करता है।

भर्तृहरि
quote

जिनको परमार्थ अर्थात् मोक्षपर्यंत का साधन प्राप्त है; ऐसे पंडितों का अपमान मत करो, क्योंकि तुम्हारी तृण के समान तुच्छ लक्ष्मी उनको रोक सकेगी। जैसे नवीन मद की धारा से शोभित श्याम मस्तक वाले हाथी को, कमल के डंठल का सूत नहीं रोक सकता।

भर्तृहरि
quote

बुद्धि नहीं आएगी, बुद्धि नहीं आएगी यदि महान संतों की बात नहीं सुनोगे। बुद्धि नहीं आएगी, चाहे अनेक प्रकार की विद्या सीख लो।

त्यागराज
quote

जो वास्तव में महापुरुष होते हैं, वे जन्म लेते ही महान युग में स्थान ग्रहण करते हैं। अतीत में भी वे वर्तमान होते हैं और सुविस्तीर्ण भविष्य में भी विराजते हैं।

रवींद्रनाथ टैगोर
quote

आदमी अमर वह होता है, जिसका नाम ख़ुदा देखकर यह पूछा जाए कि यह क्या था।

हरिशंकर परसाई
quote

वे बड़भागी है; कर रखा है सत्य, जिन्होंने उर में धारण।

गुरु नानक
quote

अपने महान पुरुषों को देवता का रूप दे देना और देवता के आसन पर बिठाने के बाद उनके उपदेशों को छोड़ देना, मनुष्य जाति को ज़्यादा पसंद है।

जवाहरलाल नेहरू
quote

जब अन्य सब लोग एक स्वर से कहते है: 'हमारे सामने केवल अंधकार है', तब महापुरुष विश्वास के साथ यह कह सकता है: 'वेदाहमेतं पुरुषं महांतं आदित्यवर्णं तमसः परस्तात्'—समस्त अंधकार से मुक्त होकर मैं उसी को जानता हूँ जो महान् है, ज्योतिर्मय है।

रवींद्रनाथ टैगोर
quote

भारतवर्ष के जिन महापुरुषों का मानव जाति के विचारों पर स्थायी प्रभाव पड़ा है, उनमें श्रीकृष्ण का स्थान प्रमुख है।

वासुदेवशरण अग्रवाल
quote

कोई विरला विचारवान ही जानता है कि इस दुनिया में सर्वश्रेष्ठ कर्म, प्रभु की स्तुति करनी है।

गुरु नानक
quote

दोष और त्रुटियाँ तो उन बड़े-बड़े वीर पुरुषों में भी रही हैं जो अपने माहात्म्य से उन्नतमस्तक हैं। उन त्रुटियों को आत्मसात् करके वे ही बड़े हुए हैं।

रवींद्रनाथ टैगोर
quote

उच्च आचरण के आशिक़ अपनी शारीरिक इंद्रियों को विकारों से बचाने के लिए, कई तरह के तप, कष्ट झेलते हैं।

गुरु नानक
quote

मैं उन सज्जनों-मित्रों पर बलिहारी जाता हूँ, जिस पर माया का पर्दा नहीं पड़ा, जिनकी संगति करके मैंने अपना मन उनसे जोड़ लिया है।

गुरु नानक
quote

किसी महापुरुष के साथ तुम अपनी तुलना करो, किंतु सर्वदा उनका अनुसरण करो।

श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र
quote

कोई भी देश अपनी भौतिक उपलब्धियों के कारण नहीं, बल्कि अपने महापुरुषों के कारण जीवित रहता है।

परमहंस योगानंद
  • संबंधित विषय : देश
quote

पागल बने बिना कोई महान नहीं हो सकता। परंतु इसका यह अर्थ नहीं कि प्रत्येक पागल व्यक्ति महान होता है।

सुभाष चंद्र बोस
quote

संतों की संगति में नाम रूपी ख़ज़ाना मिलता है और आत्मिक जीवन देने वाला, नाम रूपी अमृत भंडार चखा जाता है।

गुरु नानक
quote

सज्जन मनुष्य अपनी क्षुद्रता से दुःखी होता है, दूसरे के कमी पर ध्यान नहीं देता।

कन्फ्यूशियस
quote

महान आत्माओं को हमेशा ही औसत सोच वाले लोगों के प्रबल विरोध का सामना करना पड़ा है।

अल्बर्ट आइंस्टीन
quote

नागरक के समस्त वैभव-सुख को भोग कर चुका कलाविद् गुणवान विट, सपत्नीक होता है और वेश्याओं एवं नागरकों की गोष्ठी में सम्मानित होता है तथा वेश्याओं और नागरकों के संपर्क से जीविका चलाता है।

वात्स्यायन
quote

जो परोपकार में संलग्र होने के कारण अपने स्वार्थ का परित्याग करता है, और गुणी व्यक्ति के साथ सदैव अभिन्नता का आचरण करता है, जिसके हृदय से, स्वभाव से ही सुंदर दातृगौरव स्फुरित होता है, जो शक्तिमान् है—ऐसा कोई उत्तम पुरुष सर्वश्रेष्ठ है।

पण्डितराज जगन्नाथ
quote

शुभ गुणों से युक्त सज्जन, अति विपत्तिग्रस्त होते हुए भी परोपकार ही करता है।

पण्डितराज जगन्नाथ
quote

महापुरुष विपन्न होने पर भी विलक्षण उदारता दिखलाते हैं। कालागरु अग्नि मे जलने पर भी चारों ओर अलौकिक सुगंध प्रकट करता है।

पण्डितराज जगन्नाथ

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए