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शैतान की मौत कल्पना के लिए त्रासदी थी।
कवि दुनिया को वैसे ही देखता है, जैसे आदमी किसी औरत को देखता है।
मानव स्वभाव पानी जैसा है। वह अपने बर्तन के आकार में ढल जाता है।
स्वर्ग और नर्क के बारे में महान कविताएँ लिखी जा चुकी हैं, मगर पृथ्वी पर महान कविता लिखी जानी अभी बाक़ी है।
मौत सुंदरता की जननी है। केवल नाशवान वस्तु सुंदर हो सकती है, इसीलिए हम पर नक़ली फूलों का कोई असर नहीं होता है।
विकट यथार्थ की स्थिति में, चेतना कल्पना की जगह ले लेती है।
रोशनी और परिभाषाओं को फेंक दो, और वह बताओ जो तुम अँधेरे में देखते हो।
दुनिया में सबसे ख़ूबसूरत चीज़, निस्संदेह, दुनिया ही है।
कविता का उद्देश्य जीवन को स्वयं में पूर्ण बनाना है।
ईश्वर नहीं, बल्कि उसमें विश्वास मायने रखता है।
जब मैं नौ से छह बजे तक कार्यालय में होता हूँ, तब मैं निस्संदेह ज़िंदा नहीं होता हूँ।
दुनिया ख़ुद को हर रोज़ कविता में नहीं सँवारती है।
इस चढ़ते सूरज की तेज़ चमक से मुझे एहसास होता है कि मैं कितना काला पड़ गया हूँ।
वास्तविकता घिसी-पिटी होती है, जिससे हम रूपक का इस्तेमाल करके बच जाते हैं।
गर्मियों की रात विचार की पराकाष्ठा जैसी होती है।
ईश्वर मुझमें है, वरना ईश्वर मुझमें है, वरना बिल्कुल नहीं है। बिल्कुल नहीं है।