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Wallace Stevens

1879 - 1955

کی

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शैतान की मौत कल्पना के लिए त्रासदी थी।

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कविता विद्वान की कला है।

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कवि दुनिया को वैसे ही देखता है, जैसे आदमी किसी औरत को देखता है।

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मानव स्वभाव पानी जैसा है। वह अपने बर्तन के आकार में ढल जाता है।

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कवि अदृश्य का पुजारी होता है।

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मन को कभी संतुष्ट नहीं किया जा सकता है।

स्वर्ग और नर्क के बारे में महान कविताएँ लिखी जा चुकी हैं, मगर पृथ्वी पर महान कविता लिखी जानी अभी बाक़ी है।

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ईश्वर और कल्पना एक ही हैं।

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पैसा एक तरह की कविता है।

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मौत सुंदरता की जननी है। केवल नाशवान वस्तु सुंदर हो सकती है, इसीलिए हम पर नक़ली फूलों का कोई असर नहीं होता है।

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विकट यथार्थ की स्थिति में, चेतना कल्पना की जगह ले लेती है।

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रोशनी और परिभाषाओं को फेंक दो, और वह बताओ जो तुम अँधेरे में देखते हो।

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दुनिया में सबसे ख़ूबसूरत चीज़, निस्संदेह, दुनिया ही है।

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कविता का उद्देश्य जीवन को स्वयं में पूर्ण बनाना है।

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मन आँख से छोटा होता है।

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कल्पना प्रकृति पर मनुष्य की हुकूमत है।

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ईश्वर नहीं, बल्कि उसमें विश्वास मायने रखता है।

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जब मैं नौ से छह बजे तक कार्यालय में होता हूँ, तब मैं निस्संदेह ज़िंदा नहीं होता हूँ।

कवि कीड़ों से रेशम के कपड़े बनाता है।

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असली खलनायक बेहद आकर्षक होते हैं।

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दुनिया ख़ुद को हर रोज़ कविता में नहीं सँवारती है।

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कल्पना चीज़ों की अभिलाषा है।

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इस चढ़ते सूरज की तेज़ चमक से मुझे एहसास होता है कि मैं कितना काला पड़ गया हूँ।

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मैं वही हूँ जो मेरे आस-पास है।

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मोहभंग आख़िरी भ्रम है।

वास्तविकता घिसी-पिटी होती है, जिससे हम रूपक का इस्तेमाल करके बच जाते हैं।

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गर्मियों की रात विचार की पराकाष्ठा जैसी होती है।

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ईश्वर मुझमें है, वरना ईश्वर मुझमें है, वरना बिल्कुल नहीं है। बिल्कुल नहीं है।

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घर नीरव था और दुनिया शांत थी। पाठक पुस्तक बन गया था।

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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