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स्पर्श पर उद्धरण

त्वचा हमारी पाँच ज्ञानेंद्रियों

में से एक है, जो स्पर्श के माध्यम से हमें वस्तुओं का ज्ञान देती है। मानवीय भावनाओं के इजहार में स्पर्श की विशिष्ट भूमिका होती है। प्रस्तुत चयन में स्पर्श के भाव-प्रसंग से बुनी कविताओं को शामिल किया गया है।

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मनुष्य किसी भी चीज़ से उतना नहीं डरता जितना कि अज्ञात के स्पर्श से।

एलायस कनेटी
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हे नारी! तुम्हारे स्पर्श से ही पृथ्वी को रूप मिला है और सुधा रस का स्पर्श मिला है! जीवन कुसुम को परिवेष्टित कर कवियों ने विश्व गुंजा दिया जिससे काव्य का सुरस विकसित हो उठा।

नलिनीबाला देवी
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हृदय के मर्मस्थल का स्पर्श तभी होता है; जब जगत् या जीवन का कोई सुंदर रूप, मार्मिक दशा या तथ्य मन में उपस्थित होता है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
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चर्म की नींव पर ही सब प्रकार की इंद्रियानुभूतियाँ विकसित हुई हैं, और चूँकि यौन इंद्रियानुभूति सब तरह की इंद्रियानुभूतियों में प्राचीनतम है; इसलिए यह मुख्यतः तथा अनिवार्य रूप से, साधारण स्पर्शनुभूति का ही एक सुधरा हुआ स्वरूप है।

हेवलॉक एलिस
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स्पर्श प्रेमक्रीड़ा का बहुत प्राथमिक और आदिम स्वरूप है।

हेवलॉक एलिस
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स्पर्श ही वास्तविक रूप से प्राथमिक तथा आदिम कामानुभूति है।

हेवलॉक एलिस
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तुम वही शरद्कालीन अमृतमयी ज्योत्स्ना हो, जो विषाद की घन घटाओं को दूर करती है। तुम्हारे हृदय के पुण्य स्पर्श मात्र से दरिद्र की कुटिया शांति निकेतन बन जाती है।

नलिनीबाला देवी
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यौन-मिलन स्वयं एक बड़ी हद तक विशेष ढंग की चार्मिक प्रतिक्रिया है।

हेवलॉक एलिस
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रस और स्पर्श अकेले घृणा नहीं उत्पन्न कर सकते।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
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कामकाजी दृष्टि मनुष्य के स्वार्थ के साथ दृश्य वस्तु को जोड़कर देखती है और एक भावुक की दृष्टि अधिकतर निःस्वार्थ भाव की वस्तुओं का स्पर्श करती है।

अवनींद्रनाथ ठाकुर
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पराई स्त्री और पराया धन जिसके मन को अपवित्र नहीं करते, गंगादि तीर्थ उसके चरण-स्पर्श करने की अभिलाषा करते हैं।

संत एकनाथ
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पुत्र के लिए माताओं का हस्त-स्पर्श प्यासे के लिए जल-धारा के समान होता है।

भास
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पत्थर को पारस के स्पर्श से क्या लाभ?

संत तुकाराम
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गोस्वामी जी ने उत्तरापथ के समस्त हिन्दू जीवन को राममय कर दिया। गोस्वामी जी के वचनों में हृदय को स्पर्श करने की जो शक्ति है, वह अन्यत्र दुर्लभ है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल
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तू इतना भर कह दे कि 'मैं छूऊँगा' कि अस्पृश्यता मर जाएगी। इतना महँगा कर्तव्य कभी इतना सस्ता नहीं हुआ।

विनायक दामोदर सावरकर
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टाइप के अक्षरों में वह स्पंदन कहाँ, जो हाथ से लिखे अक्षरों में होता है।

अमृतलाल वेगड़
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स्वप्न-लीला के तुम मधुर स्पर्श हो और क्लांत जीवन में प्रशांति-सुधा तथा असीम की अमृत माधुरी लाने वाले, स्मृति भंडार की मूर्त छबि हो।

नलिनीबाला देवी
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जिस प्रकार पापियों का स्पर्श अंगों को दूषित करता है, उसी प्रकार उनका कीर्तन वाणियों को दूषित करता है, अतः उसकी अन्य नृशंसता का वर्णन नहीं किया गया है।

कल्हण
  • संबंधित विषय : पाप
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अनासक्ति और संवेदनशून्यता में भी फ़र्क़ है।

कृष्ण बलदेव वैद
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हे दुष्ट की जिह्वा रूपी झाड़ू! यद्यपि तुम निरन्तर फेंके हुए मल के द्वारा भुवनतल को निर्मल करती रहती हो, फिर भी तुम्हारे स्पर्श में भय ही होता है।

कवि कर्णपूर

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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