एकांत : रूप की प्यारी-सी अनुपस्थिति।
अगर तुम्हारे भीतर से एक आवाज़ आती है कि तुम चित्र नहीं बना सकते, तब किसी भी तरह से तुम्हें चित्र बनाने चाहिए; और फिर वह आवाज़ शांत हो जाएगी।
चैप्लिन की प्रतिभा का उत्कर्ष हम उसकी मूक फ़िल्मों में ही देख सकते हैं, ख़ास तौर से उसकी लघु फ़िल्मों में। मुझे लगता है कि चैप्लिन को मौन, मूक अभिनय और मूक फ़िल्मों की रचनाप्रक्रिया से गहरा लगाव था। ध्वनि उसके तर्क को ही बदल देती, उसकी प्रभावोत्पादकता में ख़लल डालती।
वाणी में सत्य रहेगा, तो उस वाणी का फल प्रत्यक्ष प्रकट होता है। जहाँ नहीं बोलना है, वहाँ मौन की शक्ति होनी चाहिए। ऐसी शक्ति नहीं होगी, तो वहाँ शब्द व्यर्थ जाएगा।
मन के संयम का पहला सोपान यह है कि कुछ समय के लिए चुप्पी साधकर बैठे रहो, और मन को अपने अनुसार चलने दो।
मौन भी बोलने का एक तरीक़ा है।
समर्थ कविता शब्दों के गहरे समाधिस्थ मौन को तोड़ती है।
मौन अर्थात् चुप रहना, यह तो अपने आधीन है तथा और भी इसमें अनेक गुण हैं। विधाता ने इसे अज्ञानता को ढ़कने का उपाय बनाया है, और विशेषकर सर्वज्ञों की सभा में यह मूर्खों का भूषण है।
प्रतिक्षण अनुभव लेता हूँ कि मौन सर्वोत्तम भाषण है। अगर बोलना ही चाहिए तो कम से कम बोलो। एक शब्द से चले तो दो नहीं।
मन की प्रसन्नता, सौम्यता, मौन, आत्म-निग्रह और भावशुद्धि को मानसिक तप कहा जाता है।
आपसी व्यवहार में जैसे मौन भी बोलता है, वैसे ही भाषा में शब्द का अभाव भी बोलता है। दो या तीन नुक़्ते डालकर जाने हम कितना नहीं कह जाते।
ऐसी घटना घटित हुई है जिस पर बोलना कठिन है और चुप रहना असंभव है।
मौन आनंद का पूर्ण अग्रदूत है। आनंदमय नहीं हूँ यदि मैं बता सकूँ कि कितना आनंदित हूँ।
जब कोई व्यक्ति प्यार में कदम रखता है, तो शब्द कम महत्वपूर्ण हो जाते हैं। क्योंकि जो बात ख़ामोशी से कही जा सकती है, वह शब्दों से नहीं की जा सकती।
पढ़ना, मौन वार्तालाप के अतिरिक्त क्या है ?
आवाज़ करने से आवाज़ नहीं मिटती है, चुप्पी से मिटती है।
मौन उसकी मातृ-भाषा हो गया है।
मौन में ही जिसका ध्यान लग जाता है, उसे आसपास की गपशप नहीं सुनाई देती।
अपनी बात साबित करने के चक्कर में मत पड़िए। कई बार चुप रह जाना इससे कहीं ज़्यादा कारगार साबित हो जाता है।
दुष्ट लोग अपने दोष के संबंध में जन्मांध से होते हैं और दूसरे का दोष देखने में दिव्य नेत्र वाले होते हैं। वे अपने गुण का वर्णन करने में गला फाड़-फाड़कर बोलते हैं और दूसरे की स्तुति के समय मौन व्रत धारण कर लेते हैं।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere