लेखन कठिनाई भरा जीवन है, लेकिन केवल यही जीने लायक़ है।
जब मनुष्य आदत और उद्धरण के अनुरूप जीना शुरू कर देता है, तो वह जीना बंद कर देता है।
हँसना गहराई से जीना है।
प्यार हमें पूरी तरह से जीने और अच्छी तरह से मरने की शक्ति देता है। तब मृत्यु जीवन का अंत नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बन जाती है।
जो लोग हमेशा के लिए जीते रहेंगे, वे न केवल युवाओं को बाधित और हतोत्साहित करेंगे; बल्कि उनके ख़ुद के पास रचनात्मक होने के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं होगा।
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जीने के लिए पढ़ो।
उसे ऐसा लगता है, जैसे कोई किताब उसके पीछे ख़ुद को लिख रही हो; उसे बस इतना करना है कि ज़िंदा रहना है।
सभ्यता का अर्थ है—जीने का तरीक़ा, जीने की व्यवस्था।
हे निशाचर! जैसे विषमिश्रित अन्न का परिणाम तुरंत ही भोगना पड़ता है, उसी प्रकार लोक में किए गए पापकर्मों का फल भी शीघ्र ही मिलता है।
जड़-चेतनमय, विष अमृतमय, अंधकार-प्रकाशमय जीवन में न्याय के लिए कर्म करना ही गति है। मुझे जीना ही होगा, कर्म करना ही होगा। यह बंधन ही मेरी मुक्ति भी है। इस अंधकार में ही प्रकाश पाने के लिए मुझे भी जीना है।
मैं किसानों को भिखारी बनते नहीं देखना चाहता। दूसरों की मेहरबानी से जो कुछ मिल जाए, उसे लेकर जीने की इच्छा की अपेक्षा अपने हक़ के लिए मर-मिटना मैं ज़्यादा पसंद करता हूँ।
अजनबीपन प्रेम के अभाव का द्योतक है; संन्यास भविष्य की उज्ज्वलता के विषय में निराशा का परिणाम है। और अनास्था समाज के प्रतिष्ठित कहे जाने वाले लोगों के आचरणों के भोग-परायण होने का फल है। इसमें आशा का केवल एक ही स्थान है—वह है साधारण जनता का स्वस्थ मनोबल।
कर्त्तव्य-पालन करते हुए मरना जीवन का ही दूसरा नाम है।
अतीत और भविष्य को एक तरफ रख कर वर्तमान में जीना चाहिए।
जन्मांतर में किए हुए कर्म के विपाक से उत्पन्न हुए किसी प्राणी का अनुराग किसी प्राणी में उत्पन्न हो ही जाता है।
मैं अब अपने आदर्श से हटकर जीने की अपेक्षा के समीप मरना अधिक पसंद करूँगा।
हम सदैव जीने के लिए तैयारी कर रहे होते हैं, पर जीते कभी नहीं हैं।
मैं ऐसा मनुष्य हूँ जिसने जितना अन्याय किया है, उससे अधिक उसके साथ अन्याय किया गया है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere