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सच पर ग़ज़लें

बात कुछ बनत

कृष्णानन्द कृष्ण

लाज नाहीं शरम

कृष्णानन्द कृष्ण

गीली केहिकै कोर

अशोक अज्ञानी

दरद जिन्दगी के सजा

जौहर शफियाबादी

छुट्टा हरहा खेतु

अशोक अज्ञानी

मीत, जब मीत

मिथिलेश ‘गहमरी’

का रखल बा अब

कृष्णानन्द कृष्ण

पतझर जब से पास भइल

रमाकान्त मुकुल

इंसान सुधरि जाय

अशोक अज्ञानी

नेह घर से

जौहर शफियाबादी

बात होता कि सरग

अशोक द्विवेदी

झलकेले खुशी बीच

अशोक द्विवेदी

आग रहे हवा

मिथिलेश ‘गहमरी’

देखलीं, कि बात

मिथिलेश ‘गहमरी’

सच कहना

डी. एम. मिश्र

कौन है जो मुझको

अमन मुसाफ़िर

ग़मज़दा

डी. एम. मिश्र

क्या हैं हम

नवल बिश्नोई

मुकरियाँ

डॉ. वेद मित्र शुक्ल

दर्द

नवल बिश्नोई

बोझ धान का लेकर

डी. एम. मिश्र

बुझे न प्यास

डी. एम. मिश्र

बातें जो हर क्षण

डॉ. वेद मित्र शुक्ल

फ़रियाद

डी. एम. मिश्र

सच एकदम

डॉ. वेद मित्र शुक्ल

टूटे सच का गुमान

आनंद बहादुर

लोगों के

नवल बिश्नोई

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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