साँच बराबरि तप नहीं, झूठ बराबर पाप।
जाके हिरदै साँच है ताकै हृदय आप॥
सच्चाई के बराबर कोई तपस्या नहीं है, झूठ (मिथ्या आचरण) के बराबर कोई पाप कर्म नहीं है। जिसके हृदय में सच्चाई है उसी के हृदय में भगवान निवास करते हैं।
मूवा है मरि जाहुगे, मुये कि बाजी ढोल।
सपन सनेही जग भया, सहिदानी रहिगौ बोल॥
पहले के लोग मर चुके हैं। तुम भी मर जाओगे। मुये चाम का ही तो ढोल बजता है। संसार के लोग सपने में मिले हुए प्राणी-पदार्थों के मोही बने हैं। एक दिन यह सपना टूट जाता है। मर जाने के बाद लोगों में उसकी चर्चा ही कुछ दिनों तक पहचान रह जाती है।
सब ते साँचा भला, जो साँचा दिल होय।
साँच बिना नाहिना, कोटि करे जो कोय॥
यदि हम अपने हृदय में सत्य की प्रतिष्ठा कर सकें तो सत्य के समान संसार में अन्य कोई उपलब्धि नहीं है। चाहे कोई करोड़ो उपाय करे, किंतु सत्य ज्ञान एवं सत्य आचरण के बिना सच्चा सुख नहीं मिल सकता।
जमला कपड़ा धोइये, सत का साबू लाय।
बूँद ज लागी प्रेम की, टूक-टूक हो जाय॥
सत्य का साबुन लगाकर अपने मन-रूपी मलिन कपड़े को धोना चाहिए। प्रेम की यदि एक बूँद भी लग जाएगी तो (हृदय की मलिनता टूक-टूक होकर नष्ट हो जाएगी।
फ़ितरत है इंसान की, सबके अलग विचार।
कुछ तो सच को सच कहें, कुछ करते इनकार
अनृत वचन माया रचन, रतनावलि बिसारी।
माया अनरित कारने, सति तजि त्रिपुरारि॥
झूठ बोलना और कपट करना छोड़ दो। भगवान ने इन दोनों कारणों से सति का परित्याग कर दिया था।
आज यहाँ तो कल वहाँ, जग में फिरे फ़क़ीर॥
अच्छे दिन के आस में, नैनन बरसे नीर॥
इतना मत अभिमान कर, कौन यहाँ है साथ।
सब मरने के बाद में, छूकर धोते हाथ॥
झूठ-झूठ है सच नहीं, सच से जिंदा झूठ।
मिटे झूठ जब सच हटे, जैसे जल कर ठूँठ।
आए सब बिन वस्त्र के, लड़ें कफ़न को आज।
साथ वही जाए कफ़न, जाए तख़्त न ताज़॥
समझ-समझ समझा नहीं, समझ नहीं थी यार।
वो तो मेरे पास है, ढूँढ़ रहा बेकार॥
कर्म सही तो सब सही, पटरी पर है रेल।
बुरा भला कोई नहीं, क़ुदरत का सब खेल॥
साक़ी ऐसी मत पीला, चढ़कर उतरे यार।
एक बार ऐसी पिला, भव-सागर हो पार॥
हुआ नहीं है कल कभी, मत ले कल का नाम।
जो कुछ है वो आज है, कल का कल क्या काम॥
सच कहना है अब बुरा, कहे यहाँ सच कौन।
सच के दुश्मन हैं सभी, अच्छा है जो मौन॥
सबको जाना एक दिन, भला बुरा क्या संत।
रहा सदा कोई नहीं, सबका होगा अंत॥
सच से फ़ुर्सत है नहीं, कैसे बोले झूठ।
उसकी दुकान झूठ की, धंधा है मत रूठ॥
हिम्मत सब में है नहीं, सच कहने की बात।
सच को सच कहता वही, जो सच पर दिन रात॥
कीड़े खाएँ क़ब्र में, जब तक रहे शरीर।
सोच वहाँ के दृश्य को, कैसी होगी पीर॥
बढ़ती उम्र कभी नहीं, घटती है हर रोज़।
जग में आया किस लिए, करो मोक्ष की खोज॥
नेता बन मंत्री बनो, डिग्री का क्या काम।
पढ़े-लिखे बेकार सब, घूम रहे गुमनाम
कुछ दिन का बस खेल है, मौत हँसे इक ओर।
बचना मुश्किल मौत से, लाख़ लगा ले जोर॥
सत-इसटिक जग-फील्ड लै, जीवन-हॉकी खेलि।
वा अनंत के गोल में, आतम-बॉलहिं मेलि॥
जमला कपड़ा धोइये, सत का साबू लाय।
बूंद ज लागी प्रेम की, टूक टूक हो जाय॥
सत्य का साबुन लगाकर अपने मन-रूपी मलिन कपड़े को धोना चाहिए। प्रेम की यदि एक बूँद भी लग जाएगी तो (हृदय की) मलिनता टूक-टूक होकर नष्ट हो जाएगी।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere