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प्रसिद्ध पर कविताएँ

लड़की की हत्या

ऋद्धि गिरि

शहर

रेखा राजवंशी

व्यस्तता

श्रेया शिवमूर्ति

हरा बेंच

श्रेया शिवमूर्ति

पञ्च तत्व

सोनू यशराज

सुकून

गरिमा सिंह

मैं लिखता हूँ

आफ़ताब अहमद

पेट

नीलप्रभा भारद्वाज

ख़तरे उठाकर

प्रफुल्ल शिलेदार

अमर प्रेम

विजयपाल सिंह बीदावत

पढ़ाई

रंजना जायसवाल

सन्नाटा

भवानी सिंह

ख़ुदा गवाह है

सुजाता नारायण

आम आदमी

जितेंद्र वाशिष्ठ

एक नाकारा आदमी

पूनम शुक्ला

ज़माना आज का

मान्या श्रीवास्तव

हसदेव के आदिवासी

पूर्णिमा साहू

पैंतीस कम एक

ऋचा कश्यप

माँ तो रही नहीं अब

अलका सिन्हा

याद

सुमन शेखर

गुनाह

रंजना जायसवाल

वसुधा

आफ़ताब अहमद

नदी

जया आनंद

सुनो तुम!

मेधा झा

मोह, कुछ नहीं मुझे

कृष्ण चंद्र मिश्रा

ऐसे में प्रियतम ना आए

विजयपाल सिंह बीदावत

घूँघट

वंदना

बुर्क़ासाड़ी

आफ़ताब अहमद

सफ़ेद

विशाल कुमार

प्रस्थान : एक

सोनू यशराज

विदा

ममता जयंत

अर्ध मैं

कर्मदेव पाठक

इस बार रण कुछ और होगा

संदीप द्विवेदी

उपेक्षा

ममता जयंत

सुख

ममता जयंत

तिरझी फ़ोटो-फ़्रेम

श्रेया शिवमूर्ति

मेरे मरने के बाद

कृष्ण चंद्र मिश्रा

लेखक की मौत

ऋद्धि गिरि

लहरों से डर कर नौका पार

सोहनलाल द्विवेदी

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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