Font by Mehr Nastaliq Web

व्यंग्य पर बेला

व्यंग्य अभिव्यक्ति की

एक प्रमुख शैली है, जो अपने महीन आघात के साथ विषय के व्यापक विस्तार की क्षमता रखती है। काव्य ने भी इस शैली का बेहद सफल इस्तेमाल करते हुए समकालीन संवादों में महत्त्वपूर्ण योगदान किया है। इस चयन में व्यंग्य में व्यक्त कविताओं को शामिल किया गया है।

18 अक्तूबर 2026

किराए का कमरा : विद्यार्थी बनाम मकान मालिक

किराए का कमरा : विद्यार्थी बनाम मकान मालिक

किसी यूनिवर्सिटी या कॉलेज में प्रवेश के लिए एंट्रेंस एग्ज़ाम पास करने के बाद दाख़िला लेने में उतनी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता, जितनी हॉस्टल न मिलने पर किराए का कमरा खोजने में करना पड़ता है। अस

17 अक्तूबर 2026

आवारा कुत्तों का मसीहा

आवारा कुत्तों का मसीहा

उन दिनों की बात है, जब गाँव में थोड़ी अनबन चल रही थी। उन्हीं दिनों एक आदमी अफ़ीम बेचता था और पैसे कमाता था, लेकिन उन पैसों के बारे में किसी को पता नहीं चलने देता था। बहुत कम लोगों को पता था कि वह अफ़

16 अक्तूबर 2026

दुनिया गोल ही है

दुनिया गोल ही है

हर गोल पूरी तरह गोल नहीं है। जैसे अपनी पृथ्वी जिसे हम गोल कहते हैं, लेकिन वह कहीं-कहीं उभरी हुई है और कहीं गहरी धँसी हुई। सूरज के चारों ओर घूमने वाली पृथ्वी की कक्षा भी तो पूरी तरह गोल नहीं, बल्कि अं

15 अक्तूबर 2026

कमल-क्रंदन : एक प्रतीक से पुष्प की ओर…

कमल-क्रंदन : एक प्रतीक से पुष्प की ओर…

एक समय था जब मैं केवल एक फूल था किसी सरोवर का। मैं उस दिन सबसे अधिक प्रसन्न था, जिस दिन मेरा कोई नाम नहीं था। सूरज का प्रकाश मेरे ऊपर उतरता था, जल मुझे अपनी गोद में थामे रहता था और ओस की बूँदें आसमान

14 अक्तूबर 2026

कचर-कचर : एक सिनेमाई आतंकवाद

कचर-कचर : एक सिनेमाई आतंकवाद

थिएटर की बत्ती बुझती है। स्क्रीन पर किसी गंभीर दृश्य की नींव रखी जा रही होती है। नायक का दिल टूटने वाला होता है या सस्पेंस अपनी पराकाष्ठा पर होता है। और ठीक उसी पल आपके दाहिने या बाएँ कान के पास से आ

13 अक्तूबर 2026

शंखनाद : शेरू : हमारा पहला एंटी-हीरो

शंखनाद : शेरू : हमारा पहला एंटी-हीरो

शेरू हमारे परिवार का, मेरे जानने में, पहला और आख़िरी पालतू कुत्ता था। बड़े भाई साहब उस समय 14-15 साल के रहे होंगे, जब वह उसके दूध-से सफ़ेद रंग और नई दुल्हन-सी अधखुली आँखों की मासूमियत पर फ़िदा हो गए।

13 अक्तूबर 2026

कवि-छवि से कपि-छवि तक की यात्रा

कवि-छवि से कपि-छवि तक की यात्रा

प्यारेलाल जी पधारे। प्रसन्नता नहीं हुई, कोफ़्त हुई। तंगदिल नहीं हूँ, संगदिल भी नहीं। आगंतुक को समय-कुसमय का ख़याल रखना चाहिए। उनके जैसा कुँवारा तो नहीं हूँ; बाल-बच्चेदार हूँ, नागरिक ज़िम्मेदार हूँ। स

12 अक्तूबर 2026

बहुत नाइंसाफ़ी है गदहों के साथ

बहुत नाइंसाफ़ी है गदहों के साथ

गदहे को इंसानी समाज ने हमेशा से ही तुच्छ प्राणी समझा है। इसीलिए प्राणी संग्रहालय में गदहे को छोड़कर सब प्राणियों को रखा गया। क्या गदहों को इंसानों की इस हरकत का बुरा नहीं लगता होगा? गदहा हमेशा से

07 अक्तूबर 2026

अपना नोबेल चाँद से भी दूर क्यों लगता है?

अपना नोबेल चाँद से भी दूर क्यों लगता है?

हर साल अक्टूबर आते ही एक अलग बयार चलने लगती है। शिउली के फूल खिलते हैं। रावण जलते हैं। नोबेल मिलते हैं। नवंबर में दिसंबर आने की भड़भड़ भरी रहती है। अक्टूबर चौदहवीं का चाँद है। यानी तनिक गुंजाइश है—गत

28 सितम्बर 2026

शंखनाद : नौवीं फ़ेल डॉ. साहब

शंखनाद : नौवीं फ़ेल डॉ. साहब

भगवत् कृपा से, कुछ अपने करम और कुछ दूसरों की मेहरबानी से, जीवन में किसी और चीज़ की भले ही कमी हो, बदनाम होने और बेइज़्ज़त होने के मौक़ों की कोई कमी नहीं रही। मज़े की बात यह है कि अभी भी इसमें कोई कमी

18 सितम्बर 2026

सरसरी : ‘हिंदी का उत्सव’ और अंधकार

सरसरी : ‘हिंदी का उत्सव’ और अंधकार

विवादों, विनोदों, गर्वोक्तियों, सूक्तियों और सहकारिताओं से फ़ेसबुक ऊब चुका था। आम का टिकोरा वैशाख तक बीनने के बाद आलोचकों ने दीर्घ प्रवास ले लिया था और बक़ौल अष्टभुजा शुक्ल कविजन फिर से अमराई ढूँढ़ने म

31 जुलाई 2026

अपने-अपने झोले : अपने-अपने प्रेमचंद

अपने-अपने झोले : अपने-अपने प्रेमचंद

फिर इलाहाबाद। तारीख़ें 22, 23, 24 और 25 फ़रवरी। चुनी हुई जगह—हिंदुस्तानी अकादेमी का सभागार, सन् 1981 वे अपनी बलिष्ठ भुजाओं पर बल्ले उभारते, मूँछें मरोरते, ताल ठोंकते, शक्ति-प्रदर्शन के तमाशबीनों क

29 जुलाई 2026

भागो भई!

भागो भई!

शीर्षक वाला ‘भागना’ बहुत ही होलिस्टिक है। इसमें हर क़िस्म का भागना शामिल है—प्रॉफ़िट खदेड़ते पूँजीपतियों का भागना हो या पूँजीपतियों को खदेड़ते साम्यवादियों का। दूषित समाज को धर दबोचने के लिए साहित्य-

27 जुलाई 2026

शंखनाद : बनियान, बुल दुबे और बाक़ी असफलताएँ

शंखनाद : बनियान, बुल दुबे और बाक़ी असफलताएँ

पढ़ाई-लिखाई में डबल-बिलो औसत प्रदर्शन के बाद हमने यह स्वीकार कर लिया कि संप्रति यह हमारा क्षेत्र नहीं है और अपनी पहचान किसी दूसरे क्षेत्र में तलाशनी चाहिए। कुलदीप की राय थी कि हमें डॉक्टर बनने की

09 जुलाई 2026

ई-रिक्शा : कहाँ जाओगे भाई सा’ब!

ई-रिक्शा : कहाँ जाओगे भाई सा’ब!

तीन का आँकड़ा क्या है?  तीन लोग हों, तो भी अर्थी ले जाई जा सकती है, बस एक तरफ़ थोड़ा झुकाव रहेगा। लोक-विश्वास देखें, तो तीन तिगाड़ा-काम बिगाड़ा। सुखी परिवार को भाषा को बिन परखे कहा जाए तो दो मिय

08 जुलाई 2026

किसी देश के प्रधान नेता के सपनों का मनोविश्लेषण

किसी देश के प्रधान नेता के सपनों का मनोविश्लेषण

किसी देश के प्रधान नेता के सपनों का अध्ययन कर रहे एक मनोविश्लेषक चार्ल चुंग चैप्लिन के गोपनीय नोट्स : यह एक ऐसे राजा का चेतन मन है जो भूल गया है कि वह स्वयं एक देश का साधारण नागरिक है। यहाँ एक विर

30 जून 2026

शंखनाद : सोच-समझवाले को थोड़ी नादानी दे मौला...

शंखनाद : सोच-समझवाले को थोड़ी नादानी दे मौला...

मेरे पास एक ही धन है—निकम्मापन। मैं बाय चॉइस निकम्मा नहीं हूँ। यह आलस्य और काहिली के संयुक्त उद्यम से उपजा है। ऐसा नहीं है कि मैं डेड वुड हूँ जो किसी काम के लिए प्रेरित नहीं होता; प्रेरित होता हूँ—जब

19 जून 2026

दो फ़ुटिया जीभ का चरित्र

दो फ़ुटिया जीभ का चरित्र

एक दिन सोच रहा था दोमुँहा क्या होता है? बहुत सोचने के बाद मैंने जवाब पाया कि होता होगा कोई ऐसा जीव जिसके दो मुँह होते होंगे। किंतु क्या ऐसा संभव है? एक पेट के लिए दो मुँह! दरअस्ल में ग़लत राह में सोच

11 जून 2026

साहित्यिक चोरी चोरी नहीं होती!

साहित्यिक चोरी चोरी नहीं होती!

आए दिन साहित्यिक रचनाओं की चोरी की घटनाओं की ख़बरें पढ़ने को मिल रही है। जिनकी रचनाएँ चोरी होंगी, वे हाय-तौबा मचाएँगे ही। और कुछ कर भी क्या सकते हैं? फ़ेसबुक पर एफ़आईआर दर्ज कर सकते हैं। साक्ष्य के रू

27 मई 2026

शंखनाद : मूर्खताएँ प्रेम में होने की अनन्य कसौटी हैं

शंखनाद : मूर्खताएँ प्रेम में होने की अनन्य कसौटी हैं

कभी-कभी मैं विधाता की मनुष्य के रूप में कल्पना करता हूँ तो लगता है कि विधाता भी कोई परम मसख़रा ही होगा और यह भी कि विधाता ने यह दुनिया सिर्फ़ मसख़री और खेल-खेल में ही बना दी है। और प्रेम? प्रेम

13 मई 2026

क्या आप दिखा रहे हैं, भाषा का तमाशा

क्या आप दिखा रहे हैं, भाषा का तमाशा

वाक्य किसी भी समाज के साहित्य का अभिन्न अंग रहे हैं। इन वाक्यों के बिना कोई हुकूमत नहीं चल सकती थी और आज भी इन वाक्यों के बिना सरकार नहीं चल सकती। कैसे-कैसे कालजयी वाक्य इस देश में संभव हुए हैं :

28 अप्रैल 2026

दो ग्रह, दो भाषाएँ : पृथ्वी और मंगल के साहित्य का अनुवाद-विमर्श

दो ग्रह, दो भाषाएँ : पृथ्वी और मंगल के साहित्य का अनुवाद-विमर्श

पिछले दिनों गाँव में परफैरा हुआ, कुछ लोग मच्छी मार्केट लगाए बतिया रहे थे। वे क्या बात कर रहे थे और उसका अर्थ क्या था? कुछ नहीं सूझ रहा था! वे या तो गाली-गलौज कर रहे थे या फिर अर्थ पर ध्यान दिए बग़ैर

24 अप्रैल 2026

शपथ पर ग्रहण

शपथ पर ग्रहण

वह श्वेतवस्त्रधारिणी अचानक मेरे सामने उपस्थित हो गई। उस म्लानमुख, नतशीश नायिका ने आते ही आग्रह किया—“मुझे ग्रहण करें कवि!” मैंने अपरिचय की दीवार को ढाहने के उद्देश्य से प्रश्न किया—“पहले अपना नाम

23 अप्रैल 2026

विराम-चिह्नों की क्रांति और एम डैश की सत्ता का अंत

विराम-चिह्नों की क्रांति और एम डैश की सत्ता का अंत

हाल ही में मेरी मुलाक़ात एम डैश से हुई। बेहद परेशान, दुखी, चिंतित और बेचैन अवस्था में बैठा था। चेहरा भावप्रवण, अश्रु-भरे नयन, जगत के उलाहनों से क्षुब्ध। ख़ुद को भाषा और लेखन के प्रिय साथी से सिर्फ़ स

20 अप्रैल 2026

सौरभ द्विवेदी की रिकमेंडेशन को श्रद्धा से नहीं, संदेह से पढ़ा जाना चाहिए

सौरभ द्विवेदी की रिकमेंडेशन को श्रद्धा से नहीं, संदेह से पढ़ा जाना चाहिए

रतन राजपुरोहित मेरा सहकर्मी है—युवा, उत्साही, पढ़ाकू और ज़बरदस्त लिक्खाड़। अगर लिखने से कैलोरी बर्न होती, तो वह देश का सबसे फिट आदमी होता। पिछले बुधवार की शाम को, शिफ़्ट ख़त्म होने के बाद उसने मुझसे स

12 अप्रैल 2026

रविवासरीय 4.0 : पहला सीताराम सूर्यवंशी संस्कृति सम्मान

रविवासरीय 4.0 : पहला सीताराम सूर्यवंशी संस्कृति सम्मान

I said to one of my friends, “The reason I have chosen not to speak is that most of the time when one is talking, both good and bad things are said, and the eyes of one’s enemies fall only upon the b

08 अप्रैल 2026

शंखनाद : मिलन टॉकीज : एक झलक का इंतज़ार

शंखनाद : मिलन टॉकीज : एक झलक का इंतज़ार

पूर्वी उत्तर प्रदेश में गौना उर्फ़ द्विरागमन प्रथा तब तक विद्यमान थी, जिसके तहत शादी के बाद वर अकेले कुछ स्मृतियों और तमाम ‘अनजाने’ स्पर्शों कंपकंपाहटों, कपड़ों की सरसराहटों, हाथों के मेहंदी की गहन गंध

29 मार्च 2026

रविवासरीय 4.0 : सेवासूक्त

रविवासरीय 4.0 : सेवासूक्त

• ‘महर्षि’ पूर्व में अपने कार्यालय को महर्षि-आवास कहते थे। इधर वह कुछ रोज़ से उसे ‘सेवा तीर्थ’ कहने लगे हैं।  महर्षि को नाम बदलने की व्याधि है। पर नाम अगर बदल दिया जाए तब भी युगों तक बदले हुए नाम क

23 मार्च 2026

शंखनाद : ...और कोई विवाद न हुआ

शंखनाद : ...और कोई विवाद न हुआ

वह वरिष्ठ कवि हैं। कवि होने के बाद, वरिष्ठ होने के लिए कुछ ख़ास नहीं करना पड़ता। सिर्फ़ जीते रहना ही काफ़ी होता है। वैसे भी राजनीति की तरह ही साहित्य का उम्र बोध अलग है, जैसे साहित्य का सच अलग होता है

22 मार्च 2026

रविवासरीय 4.0 : साहित्य अकादेमी एक ऐसा पुरस्कार है

रविवासरीय 4.0 : साहित्य अकादेमी एक ऐसा पुरस्कार है

• “बताइए न बाबा कि साहित्य अकादेमी कैसा पुरस्कार है?” बाबा उस उम्र में थे कि किसी भी दिन साहित्य अकादेमी अवार्डी हो सकते थे। बशर्ते उस दिन साहित्य अकादेमी अवार्ड की घोषणा करने वाली प्रेस-कॉन्फ़्रे

18 मार्च 2026

भारतीय सड़कें जादूगर का मंच हैं!

भारतीय सड़कें जादूगर का मंच हैं!

आजकल मैं ड्राइविंग सीख रहा हूँ। मेरे घरवाले बड़े समय से मुझसे कहते घूम रहे थे कि उन्हें घर में एक ड्राइवर की कमी खलती है। “पैसा देकर ड्राइवर रखना हम अफ़्फोर्ड नहीं कर सकते। फिर ये स्साले ड्राइवर च

15 मार्च 2026

रविवासरीय 4.0 : सुरेन्द्र मोहन पाठक के ख़िलाफ़

रविवासरीय 4.0 : सुरेन्द्र मोहन पाठक के ख़िलाफ़

• एक ख़ाकसार मनुष्य के एक ख़ाकसार पुल पर एक ख़ाकसार उपन्यासकार से गए सोमवार टकराना हुआ। ख़ाकसार उपन्यासकार काफ़ी लोकप्रिय पुकारे जाते हैं। वह इतने ज़्यादा ख़ाकसार और लोकप्रिय हैं कि चेतन भगत और अमीश त्

12 मार्च 2026

कहानी : ऊँघ

कहानी : ऊँघ

उस दुपहर भी भृत्य शामलाल अपने निर्धारित स्थान—जो कि राज्य संचालनालय की पुरानी इमारत संख्या : ग, इकाई-7, छठवीं मंज़िल के कक्ष क्रमांक 337 में क़तारबद्ध अलमारियों के मकड़जालों के बीच ज़रा किनारे की ओर हट

08 मार्च 2026

रविवासरीय 4.0 : एक बीस हज़ारिया बँधुए की दिल्ली-यात्रा

रविवासरीय 4.0 : एक बीस हज़ारिया बँधुए की दिल्ली-यात्रा

• दिल्ली के विषय में सोचकर ही वह काफ़ी उत्तेजित हो जाया करता था। दिल्ली उसका स्खलन थी। इसलिए जब रज़ा फ़ाउंडेशन की श्रोता-बँधुओं को आमंत्रित करती विज्ञप्ति नज़र आई, तब वह स्वयं को नियंत्रित न कर सका और तत

01 मार्च 2026

रविवासरीय 4.0 : ‘अब तुम भी जाने वाले हो सामान तो गया’

रविवासरीय 4.0 : ‘अब तुम भी जाने वाले हो सामान तो गया’

• रविवासरीय की तीसरी ऋतु की समाप्ति [27 अप्रैल 2025] और चौथी ऋतु की शुरुआत [1 मार्च 2026] के बीच की सारी सूचियाँ आ चुकी हैं। सारे मेले निपट चुके हैं। मेले की सारी किताबें आ चुकी हैं। नामचीन-प्राचीन-प

25 फरवरी 2026

आख़िर कितना चक दे इंडिया!

आख़िर कितना चक दे इंडिया!

पिछले कुछ वर्षों से क्रिकेट नित्यकर्म की तरह हो चला है। हर रोज़ क्रिकेट खेला जा रहा है। हर रोज़ फेंकी जा रही है बॉल, हर रोज़ घुमाया जा रहा है बल्ला और हर रोज़ ही छूट रही हैं कैचें! इस रोज़मर्रा की क्

23 फरवरी 2026

साहित्योत्सव : साहित्य कम, टाइमपास ज़्यादा

साहित्योत्सव : साहित्य कम, टाइमपास ज़्यादा

आजकल साहित्य-उत्सवों, सम्मेलनों और पुस्तक मेलों की धूम है। वैसे उत्सव और सम्मेलन हमेशा से समाज के बहुमूल्य अंग रहे हैं। हर जाति, धर्म और समुदाय अपने-अपने स्तर पर युवक-युवती परिचय सम्मेलन करवाते हैं,

07 फरवरी 2026

शंखनाद : जिसे फ़रवरी मयस्सर नहीं

शंखनाद : जिसे फ़रवरी मयस्सर नहीं

हर आदमी को फ़रवरी मयस्सर नहीं होती। कितना भी झींख लो, रो लो, कलप लो—एहसास-ए-फ़रवरी नहीं बदा तो कहाँ से मिलेगा। टापते रहिए इधर से उधर, फ़रवरी नहीं आएगी, बदनामी ज़रूर हो जाएगी। फ़रवरी महीना नहीं, मनोदश

02 फरवरी 2026

खुजली देसी बीमारी है

खुजली देसी बीमारी है

एक साहित्यिक आदमी खुजली को डॉक्टर के नज़रिये से नहीं देख सकता है। उसे केवल संक्रामक बीमारी कहकर संतुष्ट नहीं हो सकता। इसके पूर्व कि मैं खुजली पर बात करूँ, मुझे मौजूदा समय के हिंदी के लब्धप्रतिष्ठ कथा

19 जनवरी 2026

शंखनाद : बुक फ़ेयर की रपटीली रपट और कवि का मेलोत्तर काल

शंखनाद : बुक फ़ेयर की रपटीली रपट और कवि का मेलोत्तर काल

दिल्ली के भारत मंडपम में किताबों का सालाना जलसा—विश्व पुस्तक मेला गुलज़ार रहा। भाँति-भाँति के लोग भाँति-भाँति की हरकतें करते हुए भाँति-भाँति के लोगों के साथ भाँति-भाँति की घोषणाएँ कार्यान्वित करते/स्

09 जनवरी 2026

‘घंटा’ फ़र्क़ नहीं पड़ता किसी कहानीकार के रहने या जाने से!

‘घंटा’ फ़र्क़ नहीं पड़ता किसी कहानीकार के रहने या जाने से!

कल के दिन की शुरुआत हुई कथाकार एवं ‘पहल’ पत्रिका के संपादक के रूप में समादृत ज्ञानरंजन के जाने की ख़बर से। 7 जनवरी की रात, जबलपुर में उनका निधन हो गया था। फिर पता चला कि गुरु घासीदास विश्वविद्यालय और

05 जनवरी 2026

शंखनाद : बुक फ़ेयर के लिए मुखौटे...

शंखनाद : बुक फ़ेयर के लिए मुखौटे...

जनवरी में होने वाली बुक फ़ेयर की आहट के बीच कई-कई यूनीसेक्स सैलूनों, ब्यूटीपार्लरों और स्पाओं में बुक फ़ेयर के लिए स्पेशल ऑफ़र देख, पढ़ और सुनकर चकित रह गया। साथ ही अपने मानसिक पिछड़ेपन पर रोना आया।

22 नवम्बर 2025

लाख काम छोड़कर बिहार जाना चाहिए

लाख काम छोड़कर बिहार जाना चाहिए

(डिसक्लेमर : मैं जन्मना बिहारी, कर्म से झारखंडी, मन से भारतीय और असंभव विश्व नागरिकता प्राप्त करने का आकांक्षी हूँ। इतने पर भी कोई शंका करे तो तुलसीदास के शब्दों में वह मुझसे भी अधिक जड़मति रंका है।)

08 नवम्बर 2025

प्यार के बाज़ार में

प्यार के बाज़ार में

मित्र को प्यार हो गया है—सच्चा प्यार। पाकीज़ा मुहब्बत। ट्रू लव टाइप मामला लग रहा है। जबसे वह प्रेम की गिरफ़्त में आए हैं, तभी से खोये-खोये से रहते हैं। उनकी रातें भी अब आँखों में गुज़रती हैं। इस चक्क

08 नवम्बर 2025

हम ‘प्यार’ को काम समझे,  वह ‘काम’ को प्यार!

हम ‘प्यार’ को काम समझे, वह ‘काम’ को प्यार!

नब्बे का दशक मेरे लिए रूमानी-दौर रहा। कठोर हिदायतों और ताक़ीदों के बाद भी मैं नज़र बचाकर इश्क़िया किताबों में सिर दिए रहती। पढ़ाई की किताबों में छिपाकर दम-ब-दम ‘मिल्स एंड बून’ (Mills & Boon) के रूमानी उप

02 नवम्बर 2025

कवियों के क़िस्से वाया AI

कवियों के क़िस्से वाया AI

भरतपुर की वह दुपहर साहित्य की ऊष्मा से भरी हुई थी। हवा में हल्की गर्मी थी, लेकिन सभा-गृह के भीतर विचारों की शीतल छाया पसरी हुई थी। देश का स्वतंत्रता-संग्राम अपने चरम पर था और साहित्यकार इस संघर्ष के

22 अक्तूबर 2025

झाड़ियों का शाप

झाड़ियों का शाप

यह घटना नवंबर के आस-पास की है, जब सेमेस्टर का ख़ौफ़ हर विद्यार्थी पर तारी होता है। इन दिनों में हर अच्छा और गदहा विद्यार्थी आपको रट्टा मारते मिलेगा और बात अगर हॉस्टल में रहने वाले लड़कों की हो तो कहन

09 अक्तूबर 2025

न भेंट, न वार्ता... सिर्फ़ रायता

न भेंट, न वार्ता... सिर्फ़ रायता

यह उस समय की बात है; जब मेरा स्नातक हो चुका था, लेकिन डिग्री अभी हाथ न लगी थी। मैं तब तक उदय प्रकाश की कहानियों का दीवाना हो चुका था। उनसे मिलने से बहुत पहले, मैं उनकी किताबों से मिल चुका था। मैं उनस

07 अक्तूबर 2025

क्या आप भी रील-रोग से ग्रस्त हैं?

क्या आप भी रील-रोग से ग्रस्त हैं?

रील-रोग से ग्रस्त और कुछ-कुछ कुपित एक रीलर-इन्फ़्लुएंसरों मित्र ने बेहद ऊबकर मुझसे पिछले दिनों कोई किताब पढ़ने की जिज्ञासा व्यक्त की। उन्हें शुरुआत करने में मुश्किल आ रही थी। मित्र पूरब के निवासी हैं,

15 सितम्बर 2025

विश्वविद्यालय के प्रेत

विश्वविद्यालय के प्रेत

सन् सत्रह के जुलाई महीने की चौथी तारीख़ थी। मैं अच्छे बच्चे की तरह बारहवीं के आगे की पढ़ाई करने के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में दाख़िला लेने के लिए बनारस जा पहुँचा था। कॉलेजों की, यूनिवर्सिटियों क