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विद्रोह पर कविताएँ

विद्रोह की अपनी एक जनपक्षधरता

भी होती है। इस आशय में कविता विद्रोह का संकल्प लेती भी रही है और लोगों को इसके लिए जागरूक भी करती रही है। यहाँ प्रस्तुत है—विद्रोह विषयक कविताओं से एक विशेष चयन।

एक दिन

सारुल बागला

लड़के

नवीन रांगियाल

जुमला

रचित

ईश्वर से मुखामुखी

फरूग़ फरूख़ज़ाद

एक सांसारिक गीत

डब्ल्यू. एस. रेण्ड्रा

दोनातेलो और डेविड

कोलिन फ़ाल्क

अराजक

हिमांशु विश्वकर्मा

पाश के लिए

दिनेश कुशवाह

लाल झंडा

मदन कश्यप

रूमाल

कमल जीत चौधरी

बेटी के भाग जाने के बाद

हिमांशु विश्वकर्मा

जवानी

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

सुनो

शिवानी कार्की

विद्रोह

अर्पिता धमीजा

विद्रोह

निदा नवाज़

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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