Font by Mehr Nastaliq Web
Radhavallabh Tripathi's Photo'

Radhavallabh Tripathi

1949 | مدھیہ پردیش

کی

باعتبار

वेदों में जीवन के संपूर्ण आनंद, उमंग और उल्लास की सबसे बेहतरीन कविताएँ हैं, पर मृत्यु के बारे में भी सबसे ज़्यादा और सबसे मार्मिक कविताएँ या सूक्त भी इन्हीं वेदों में हैं—अत्यंत घनीभूत विषाद की संकुल छायाओं में गुँथी कविताएँ।

साहित्य भी मृत्यु की विभीषिका के भीतर से जीवन रचता है।

हमारे साहित्य के इतिहास की वह एक स्वर्णिम घड़ी रही होगी, जिसमें निराला ने छंदों के बंधनों को तोड़ कर जूही की कली की मुस्कान, उसके खिलने और चटक उठने को कविता में बिखेर दिया।

  • विषय :
    اور 2 مزید

आत्मसंस्कृति ही शिल्प है। इस शिल्प के द्वारा मनुष्य सारे संसार को छंदोंमय बना लेते हैं।

  • विषय :
    اور 2 مزید

निर्मल जी अंतिम अरण्य में जो संसार रचते हैं, वह मृत्यु को परे ठेलने में लगे पात्रों का संसार है।

  • विषय :
    اور 1 مزید

पुत्र का अपने पिता की प्रतिकृति जैसा प्रतीत होना—इस अभिप्राय का प्रयोग भी वाल्मीकि ने ही प्रारंभ किया।

  • विषय :
    اور 2 مزید

साहित्य के छंद वैश्विक लय की अभिव्यक्तियाँ हैं।

  • विषय :
    اور 1 مزید

छंद कविता का स्वधर्म है, लय उसका अध्यात्म है।

  • विषय : 1

मृत्यु के विकराल जबड़ों से बाहर निकल कर अमरता का संधान ही छंदस् है।

वस्तुतः करुणा और स्नेह के साथ-साथ, वाल्मीकि मनुष्य की दुराधर्षता और अपराजेयता के भी महान गायक हैं।

  • विषय :
    اور 1 مزید

संस्कृत के कई प्रसिद्ध मुहावरे, वाल्मीकि की लेखनी से ही प्रचलन में लाए गए।

  • विषय :
    اور 1 مزید

बहस के स्वरूप को लेकर जितनी बहस संस्कृत के शास्त्रकारों ने की है, उतनी कदाचित् संसार की किसी अन्य भाषा के साहित्य में नहीं मिलेगी।

  • विषय :
    اور 4 مزید

मनुष्य का जीवन लय, गति और यति—इन तीनों के ताने-बाने में बनता है।

प्रेम की चरम परिणति दांपत्य में, स्त्री-पुरुष के प्रेम में प्रस्फुटित होती है। स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के सहभाव से परिपूर्ण बनते हैं, यही बात सीता और राम के प्रसंग में वाल्मीकि ने कई बार कही है।

  • विषय :
    اور 6 مزید

शास्त्रीय वाङ्मय ही नहीं; रामायण, महाभारत, कालिदास, भवभूति और बाणभट्ट जैसे कतिपय महाकवियों को छोड़ दें, तो लगभग सारा का सारा संस्कृत साहित्य ही पुरुषवादी दृष्टि और पुरुष के वर्चस्व के आख्यान से रचा हुआ है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

वाल्मीकि और व्यास के अनुशीलन के बिना; भारतीय इतिहास, परंपरा और संस्कृति की सही समझ पैदा नहीं हो सकती।

  • विषय :
    اور 2 مزید

किसी स्त्री ने न्यायसूत्र या वात्स्यायनभाष्य जैसा कोई शास्त्रग्रंथ रचा हो, ऐसा प्रमाण नहीं मिलता। उपनिषत्काल के बाद शास्त्रार्थ में स्त्री विस्मृत हाशिए पर है। किसी कोने से उसकी आवाज सुनाई देती है, पर वह जब कभी अपने अवगुंठन से बाहर निकल कर आती है तो एक विकट चुनौती सामने रखती है और दुरंत प्रश्न उठाती है।

  • विषय :
    اور 4 مزید

समाज के द्वंद्र के कारण सीता और राम का दांपत्य, स्थूल स्तर पर खंडित होता है—हृदयसंवाद खंडित नहीं होता।

  • विषय :
    اور 4 مزید

वाल्मीकि ने यथार्थ की ठोस बंजर ज़मीन पर चलते हुए, उस पर जीवन की महनीय आदर्शों का प्रासाद खड़ा किया है।

सीता, तारा और मंदोदरी, पुरुषों के वर्चस्ववाले समाज में अपने वाणी की ऊर्जा से अपने लिए स्थान बनाती हैं।

  • विषय :
    اور 3 مزید

वाल्मीकि में पहली बार लोक-जीवन में रची-बसी कविता की सृष्टि हुई और वेद के बाद पहली बार छंद का एक नया या एक भिन्न स्तर पर अवतरण हुआ।

वाल्मीकि की रचना का उपोद्घात एक आदर्श मानव की खोज से होता है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

जगत में जो कुछ भी भव्य, रमणीय और कोमल है; उस पर तो वाल्मीकि की दृष्टि पड़ी ही है, साथ ही जो कुछ भी प्रचंड और विस्तीर्ण है, उसे भी उन्होंने अपनी कविदृष्टि का विषय बनाया है।

  • विषय :
    اور 3 مزید

भारतीय काव्यचिंतन में रस तथा ध्वनि की परिकल्पनाएँ, वाल्मीकि जैसे कृती रचनाकार के काव्य से ही उद्भूत हुई हैं।

  • विषय :

वाल्मीकि और कालिदास दोनों ही उस क्षेत्र के अन्वेषक हैं, जहाँ जीवन के कर्दम में से स्वतः शतदल खिल उठते हैं। तुलसी जीवन के ललित पक्ष से बचकर रामभक्ति में आश्वासन खोजते हैं अथवा नीतिवादी शब्दावली में उसे धिक्कारते हैं।

जिन समाजों में नारी अपनी मुक्ति के लिए छटपटा रही थी, उनमें द्रौपदी को अपने लिए प्रेरणा और मुक्ति का प्रतीक माना गया।

  • विषय :
    اور 2 مزید

वाल्मीकि में मनुष्य को अपना उद्धार स्वयं ही करना है, तुलसी में उसका उद्धार करने के लिए राम हैं।

  • विषय :
    اور 2 مزید

संस्कृत के समाज में शास्त्रार्थ की शताब्दियों की परंपरा है; पर उसमें स्त्री की भूमिका पर बात कम हुई है, स्त्री की भूमिका भी कहीं है तो वह उपेक्षित रही है।

  • विषय :
    اور 3 مزید

द्रौपदी के द्वारा जो शास्त्रार्थ उठाया गया, उसका एक स्पष्ट निर्णय यह भी है कि पाप या अन्याय करने वाला ही पापी नहीं होता, उस पाप या अन्याय पर चुप रहनेवाला भी पापी होता है।

  • विषय :
    اور 1 مزید

धर्मशास्त्र में तीन ऋण बताए गए : देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण, पर मातृऋण भी हो सकता है—इस पर कहीं कोई विचार धर्मशास्त्रकारों ने नहीं किया।

  • विषय :
    اور 2 مزید

रामायण और महाभारत—ये दोनों इतिहास-काव्य हमारी संपूर्ण विरासत के मेरुदंड हैं।

  • विषय :
    اور 2 مزید

अभिव्यंजना की दृष्टि से सरल से सरल भाषा में; अर्थ की कई-कई लयें एक साथ झँकृत करने की क्षमता के साथ, वैदिक युग से इतिहास काल तक के लंबे समय के अंतराल को निरूपित करते हुए, भारतीय चेतना की पहचान कराने का काम—व्यास के साथ केवल वाल्मीकि ही संपन्न कर सके हैं।

  • विषय :
    اور 2 مزید

वाल्मीकि के कवि रूप का आकलन सुकर कार्य नहीं है। शिल्प के स्तर पर वे नितांत प्रचलित, लोकभाषा में व्यवहृत शब्दों को उनकी सप्राणता और सहजता की क्षति किए बिना, अकल्पित सामर्थ्य से भर देते हैं।

  • विषय :
    اور 2 مزید

बृहदारण्यक उपनिषद् में; याज्ञवल्क्य के साथ जनक की सभा में, उस समय के सबसे बड़े ज्ञानियों के साथ बहस को गार्गी ने ब्रह्मोद्य कहा है।

  • विषय :
    اور 3 مزید

जीवन की गहरी पकड़ तथा कविदृष्टि के साथ वाल्मीकि ने दिखलाया है कि मनुष्य अपने जीवन के घात-प्रत्याघात, नियति के थपेड़ों तथा दूसरों के द्वारा दिए जाने वाले उत्पीड़न से किस प्रकार जूझता तथा अपने संघर्ष में अंततः उबरता है।

अपनी दुर्बलताओं के कारण विनाश को प्राप्त होते हुए मनुष्य की गरिमा को भी, वाल्मीकि ने क्षति नहीं पहुँचाई है।

  • विषय :
    اور 3 مزید

रामायण में सीता राम के लिए पाथेय और प्राप्तव्य ही नहीं, वह उसके जीवन की संपूर्ण नियति को निर्धारित करने वाली सजीव शक्ति है।

  • विषय :
    اور 3 مزید

भारतीय समाज मूलतः तर्कप्रवण और वादोन्मुख लोगों का समाज है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

वाल्मीकि ने अपनी मानवीय दृष्टि द्वारा उस युग में स्त्री-पुरुष के साहचर्य की प्रतिष्ठा की।

  • विषय :
    اور 3 مزید

मनुष्य की मनस्तत्व की परीक्षा में वाल्मीकि, संस्कृत कवियों में सर्वाधिक निपुण हैं।

  • विषय :
    اور 1 مزید

मनुष्य की मनस्तत्त्व की परीक्षा में वाल्मीकि संस्कृत कवियों में सर्वाधिक निपुण हैं।

  • विषय :
    اور 2 مزید

मनुष्य हृदय की जटिल भावनाएँ, वैर और कठोरता की पर्तों के भीतर छिपा हुआ स्नेह और कोमलता—वाल्मीकि में व्यंजित हो उठते हैं।

भारतीय परंपरा में रामायण तथा महाभारत—इन दोनों ग्रंथों को इतिहास कहा जाता है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

वाल्मीकि और तुलसी दोनों ही युगचेता कवि हैं।

  • विषय :

कुछ शास्त्रार्थ ऐसे भी हुए जिनमें स्त्री उपस्थिति की आँच अभी भी मंद नहीं हुई है। यह भी बहुधा हुआ है कि स्त्री अकेली होने के बावजूद, अपनी प्रखरता और तेजस्विता में पुरुष समाज को हतप्रभ कर देती है।

  • विषय :
    اور 3 مزید

वाल्मीकि ने मनुष्य के अंतर्मन के उत्ताप और कामना के असीम ज्वार का दर्शन किया है, पर उन्होंने हृदय की पवित्रता और कोमलता को झुलसने नहीं दिया है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

भारतीय समाज को जानने और समझने के लिए रामायण को जानना और समझना आवश्यक है।

  • विषय :
    اور 1 مزید

छंद निखिल सृष्टि के भीतर छिपे स्पंद को रचना में संक्रमित करने का जरिया है।

  • विषय :
    اور 1 مزید

एक व्यक्ति की भावनाओं का अतिशय आकुल उच्छ्वास, किसी बिंदु पर सार्वभौम मनुष्यता से जुड़कर निस्सीम हो जाता है—यह वाल्मीकि परख लेते हैं।

  • विषय :
    اور 2 مزید

गार्गी ब्रह्मवादिनी थी। उपनिषदों में ही स्त्रियाँ ब्रह्मवादिनी हुआ करती थीं।

  • विषय :
    اور 2 مزید

Recitation