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जहाँ कोई क़ानून नहीं होता, वहाँ अंतःकरण होता है।
जो स्वयं को क्षमा नहीं कर सकता वह कितना दुःखी व्यक्ति है!
अभिमानी व्यक्ति की शान और उसके अपयश के बीच केवल एक पग की दूरी है।
किसी विषय में अधूरे ज्ञान से अच्छा है उस विषय में अज्ञान।
संकट में हर अफ़वाह सुनने योग्य समझी जाती है।
जिससे बहुत लोग भयभीत रहते हैं, वह स्वयं भी बहुतों से भयभीत रहता है।