ग्राहम ग्रीन के उद्धरण
हम मानवता से प्यार नहीं कर सकते हैं। हम केवल मानव से प्यार कर सकते हैं।
ईश्वर, मैं तुमसे नफ़रत करता हूँ। मैं तुमसे इस तरह नफ़रत करता हूँ, मानो तुम सच में मौजूद हो।
दर्द के बारे में लिखना आसान है। दुख में हम सभी सुख से अलग-अलग होते हैं, लेकिन ख़ुशी के बारे में कोई क्या लिख सकता है?
जब तक हम दुख उठाते हैं, हम ज़िंदा हैं।
आपको इतना डरने की ज़रूरत नहीं है। प्यार सिर्फ़ इस वजह से ख़त्म नहीं होता कि हम एक-दूसरे से मिलते नहीं हैं…
मैंने प्यार को अपनी ईर्ष्या की हद से मापा।
कुछ शराबों की तरह हमारा प्यार न तो पूरा हो सकता है और न ही कहीं जा सकता है।
अगर आप सच्चाई की तलाश कर रहे हैं तो शैम्पेन झूठ पकड़ने की मशीन से बेहतर है।
नफ़रत की वजह कल्पना का न होना है।
दोस्ती आत्मा की बात है। यह एक ऐसी चीज़ है जिसे हम महसूस करते हैं। यह किसी चीज़ के बदले में नहीं है।
ईश्वर की कृपा की भयावह विचित्रता की कल्पना न तुम कर सकते हो, और न ही मैं।
बचपन में हमेशा एक पल होता है, जब दरवाज़ा खुलता है और भविष्य को प्रवेश करने देता है।
जब हम अपने पाप से प्यार करते हैं, तब हम वास्तव में शापित होते हैं।
ज़्यादातर चीज़ें हमें तब तक निराश करती हैं, जब तक हम गहराई से नहीं देखते हैं।
अगर हमें इंसान बने रहना है, तब हमें कभी न कभी किसी का पक्ष लेना पड़ेगा।
मैं आपके बारे में दोस्त के रूप में कभी नहीं सोच सकता। आप दोस्त के बिना काम चला सकते हैं।
अगर हम सच्चाई को जान लें तो हम ज़्यादातर बातों को माफ़ कर देंगे।
जब हमें यक़ीन नहीं होता है, तब हम जीवित होते हैं।
काश कभी-कभार मेरे इरादे कुछ बुरे होते, तब शायद मैं इंसानों के बारे में कुछ और अधिक समझ पाता।
जो हमें दर्द देता है, उसे हम बहुत आसानी से भूल जाते हैं।