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Maurice Maeterlinck

1862 - 1949

کی

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आज' से घृणा करना यह सिद्ध करता है कि 'कल' को ग़लत समझा गया है।

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मेरे विचार में, यदि इस दुनिया में मृत्यु होती, तब मानव जाति को उसकी ज़रुरत महसूस होती और जीवन की ऊब से बचने के लिए उसे मृत्यु को उत्पन्न करना होता। वास्तव में, हम में से कई मरने से पहले ही मर चुके होते हैं, क्योंकि हम सब ही लगभग सब कुछ खो चुके हैं।

यह मृत्यु का आगमन नहीं है जो भयावह है, बल्कि जीवन का प्रस्थान है। हमें मृत्यु पर नहीं; जीवन पर ध्यान देना चाहिए। मृत्यु जीवन पर आक्रमण नहीं करती; बल्कि जीवन ही मृत्यु का अनुचित प्रतिरोध करता है।

जैसे शुद्ध पानी में सोने और चांदी का वजन होता है, वैसे ही आत्मा मौन में अपना वजन परखती है, और हम जिन शब्दों का प्रयोग करते हैं हमारे जो उनका कोई अर्थ नहीं होता उस मौन के सिवा जो उन्हें घेरे रहता है।

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मृत्यु हमारे पास एक जीवन को ले जाने के लिए आती है या उसके रूप को बदलने के लिए आती है: हमें उसका आकलन इस आधार पर करना चाहिए कि वह क्या करती है, कि इस आधार पर कि हम उसके आने से पहले और उसके जाने के बाद क्या करते हैं।

एक मनुष्य स्वर्ग में अकेले रहकर भी खुश नहीं होगा। लेकिन जो मनुष्य किसी किताब या अनुसंधान में रुचि रखता है, जब वह उस पुस्तक के विषय के बारे में अध्ययन या चिंतन में व्यस्त होता है, तो एकांत का नर्क भी उसके लिए सबसे बड़ा स्वर्ग बन जाता है।

  • विषय :

हम एक से अधिक बार जन्म ले सकते हैं; और प्रत्येक जन्म हमें हमारे ईश्वर के थोड़ा और करीब लाता है।

एक मनुष्य स्वर्ग में अकेले रहकर भी खुश नहीं होगा। लेकिन जो मनुष्य किसी किताब या अनुसंधान में रुचि रखता है, जब वह उस पुस्तक के विषय के बारे में अध्ययन या चिंतन में व्यस्त होता है, तो एकांत का नर्क भी उसके लिए सबसे बड़ा स्वर्ग बन जाता है।

  • विषय :

प्यार करना सीखने के लिए, सबसे पहले देखना सीखना ज़रूरी है।

  • विषय : 1

जब हम किसी ऐसे इंसान को खो देते हैं जिससे हमने प्यार किया है, तब आँसुओं कि सबसे नमकीन बूँदें उन पलों की याद में बहती हैं जब हमने अपने प्रिय से भरपूर प्यार नहीं किया।

  • विषय :

क्या हम यह कल्पना कर सकते हैं कि मानवता कैसी होती यदि उसे फूलों का ज्ञान होता?

  • विषय :

यह मानना अच्छा है कि एक दिन आनंद और सत्य के दरवाज़ों को पूरी तरह से खोलने के लिए बस थोड़ी और सोच, थोड़ा और साहस, थोड़ा और प्रेम, जीवन के प्रति थोड़ा और समर्पण और थोड़ी और उत्सुकता की आवश्यकता है।

यदि ख़ाली दिमाग उतना ही शोर मचाता जितना कि ख़ाली पेट, तो मनुष्य कहीं अधिक समझदार होता।

  • विषय :

एक बार जब दुर्भाग्य किसी घर में प्रवेश कर जाता है, तो शांति भंग हो जाती है।

  • विषय : 1

किसी उद्देश्य के लिए कुछ अच्छा करने में हमें मानवीय सुख मिल सकता है, लेकिन वे जो बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के दूसरों का अच्छा करते हैं, वे एक दिव्य आनंद का अनुभव करते हैं।

  • विषय :

मानवीय अनुभव प्रतिदिन यह स्पष्ट करता है कि उच्चतम विचार जो हम प्राप्त कर सकते हैं, उस रहस्यमय सत्य से अभी भी कहीं निम्नतर रहेगा, जिसकी हम खोज कर रहे हैं।

  • विषय : 1

एक विचार जो लगभग सुंदर है एक विचार जिसे तुम बोलते नहीं, लेकिन जिसे तुम इस क्षण में अपने भीतर संजो कर रखते हो, वह तुमको वैसे ही प्रकाशित करेगा जैसे कि तुम एक पारदर्शी पात्र हो।

जब तक हम अपनी आँखें बंद नहीं करते, हम हमेशा धोखा खाते हैं।

  • विषय : 1

हर प्रगतिशील आत्मा का विरोध हजारों औसत दर्जे की मानसिकताओं द्वारा किया जाता है, जो अतीत की रक्षा के लिए नियुक्त किए गए हैं।

  • विषय : 1

हम सभी उत्कृष्टता में ही जीते हैं। हम और कहाँ जी सकते हैं? जीवन का यही एक स्थान है।

  • विषय :

हमारा सारा ज्ञान हमें केवल एक अधिक कष्टदायक मृत्यु की ओर ले जाता है, जो उन जानवरों की तुलना में कहीं अधिक पीड़ादायक है जो कुछ भी नहीं जानते।

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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