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Deborah Feldman

1986

کی

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باعتبار

मैं जब पढ़ती हूँ, तब मैं इतनी ख़ुशी और आज़ादी महसूस करती हूँ कि मुझे विश्वास हो जाता है कि अगर मेरे पास हर समय किताबें हों तो मैं अपने जीवन के प्रत्येक कष्ट को सह सकती हूँ।

ज़्यादातर समय, वे बच्चे स्वस्थ और मज़बूत होते हैं, प्रकृति अपनी देखभाल ख़ुद करती है।

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कुछ लोग अपने विश्वास का उपयोग बस स्वभावजन्य तर्क के शब्दांश के रूप में करते हैं; इसके बिना वे सही और ग़लत की धर्मनिरपेक्ष नियमावली के अनुसार अपनी धार्मिक और नैतिक विफलताओं का ईमानदारी से सामना करने के लिए मजबूर हो जाएँगे।

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मैं नर्क की तुलना में पुनर्जन्म में विश्वास करती हूँ। अगर लौटने का विकल्प हो, तब पुनर्जन्म का विचार और भी अधिक सहनीय हो जाता है।

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क्या कोई भी व्यक्ति धार्मिक निष्ठा के बिना जीवित रह सकता है, चाहे इसे कोई भी नाम दिया जाए?

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मैंने अपने दम पर शहर में घूमने का जोख़िम उठाया है। मैं पुस्तकालय के मानचित्रों, भूमिगत मानचित्रों, बस के मानचित्रों और नियमित मानचित्रों को देखती हूँ और उन्हें याद रखने की कोशिश करती हूँ। मुझे खो जाने का डर है; नहीं, मुझे किसी बालूपंक में डूबने की तरह शहर में डूबने से डर लगता है। मैं ऐसी चीज़ द्वारा सोखे जाने से डरती हूँ, जिससे मैं कभी नहीं बच सकती हूँ।

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मैं तब तक ख़ुश नहीं हो सकती हूँ, जब तक कि मैं सचमुच आज़ाद हो जाऊँ।

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मुझे यह बात समझ में नहीं आती है कि जब संभावनाएँ अनंत हैं, तब लोगों की इच्छाएँ कम तथा महत्वाकांक्षाएँ संकीर्ण और सीमित कैसे हो सकती हैं।

मैं इस ग्रह पर अपना पूरा जीवन ऐसे बिताने के बारे में नहीं सोच सकती जिसमें मैं उन सभी कामों को इसलिए कर सकूँ (जिनका सपना देखती हूँ) क्योंकि उन्हें करने की अनुमति नहीं है।

जहाँ तक मुझे याद है, मैंने जीवन से हमेशा वह सब कुछ चाहा है, जो कुछ भी मुझे उससे मिल सकता था। यह इच्छा मुझे उन लोगों से अलग करती है जो इससे कम में समझौता करने के लिए तैयार हैं।

इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप किस तरह रहते हैं, आपको मुसीबतों से बचने के लिए और आगे बढ़ने के लिए धार्मिक निष्ठा की आवश्यकता है।

अगर मेरे दिमाग़ को बंधन में नहीं रखा जा सकता है, अगर मेरे सपनों को कम नहीं किया जा सकता है; तब किसी भी प्रकार का प्रतिबंध वास्तव में मेरे चुपचाप आत्मसमर्पण को निश्चित नहीं कर सकता है।

मुझे लगता है कि आज़ादी का स्वरूप तब तक कभी भी पर्याप्त नहीं होगा, जब तक कि यह सर्व-समावेशी हो।

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मैं दूसरों पर रोब ज़माने के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए शक्तिशाली होने को लालायित हूँ।

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मैंने अवचेतन रूप से अपने जीवन में लोगों और वस्तुओं को अलविदा कहना शुरू कर दिया है, मानो मैं मरने की तैयारी कर रही हूँ; हालाँकि मेरे पास ऐसी कोई वास्तविक योजना नहीं है। मैं बस अपने मन में दृढ़ता से यह महसूस करती हूँ कि मैं यहाँ रहने के लिए नहीं बनी हूँ।

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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