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मौसम पर कविताएँ

किसी स्थान विशेष की

दिन-प्रतिदिन की वायुमंडलीय दशा को मौसम कहा जाता है। मौसम का कवि-मन पर प्रभाव पड़ना और प्रभावतः अभिव्यक्तियों का जन्म अत्यंत नैसर्गिक स्थिति है। इस चयन में ऐसी ही कुछ कविताओं का संकलन किया गया है।

जेएनयू में वसंत

आमिर हमज़ा

67 हाइकू

मात्सुओ बाशो

भरोसा

सारुल बागला

फागुनी हवाएँ

अखिलेश सिंह

अट नहीं रही है

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

फागुन का गीत

अजित पुष्कल

पावस

शैलेंद्र कुमार शुक्ल

एक धुँधला दिन

सौरभ अनंत

भादों की संध्या का जब

कृष्ण मुरारी पहारिया

अक्टूबर

रवि यादव

निर्जन में

थाओ छ्येन

पतझड़ का संगीत

जॉय हार्जो

पतझर

निकोलाय ज़बोलोत्स्की

इस मौसम में

सारुल बागला

दुपहर—जाड़े की

हैमे तोरेस बोदेत

गद्य

सौरभ अनंत

ऋतुराज-स्टोर्स

ख़ोर्ख़े कार्रेरा आन्द्रादे

दिल दुखने की बातें

हरजीत अर्नेस्ट

दोहराव

मधु चतुर्वेदी

ध्रुपद का टुकड़ा

दिनेश कुमार शुक्ल

अभिमान

बेबी शॉ

अगस्त

रवि यादव

आषाढ़ का पहला दिन

भवानीप्रसाद मिश्र

कृतघ्न

गोविंद द्विवेदी

कलह

राकेश कुमार मिश्र

नवंबर

रवि यादव

पतझड़

सौरभ मिश्र

जैसे

मानसी मिश्र

वह फागुन की एक शाम थी

प्रत्यूष चंद्र मिश्र

स्मृति

नंद चतुर्वेदी

अक्टूबर

सत्यम तिवारी

क्वार में बारिश

श्रुति गौतम

मुंबई की ठंडी

कुमार वीरेंद्र

दोहराव

सौरभ अनंत

मुझसे बात करो

सोनी पांडेय

बसइ गाँवइँ मा हिन्दुस्तान

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

ऋतुएँ

श्री अरविंद

अप्रैल

सौरभ अनंत

पलाश के फूल

अमेय कांत

इंतिज़ार

बेबी शॉ

घोंघे

रमाशंकर सिंह

रात और अंगूरी मौसम

कार्लो क्लाद्ज़े

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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