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सीता पर उद्धरण

सीता राम-कथा की नायिका

और अराध्य देवी के रूप में भारतीय संस्कृति से अभिन्न रही हैं। भारतीय स्त्री-विमर्श में उनका प्रादुर्भाव एक उदाहरण के रूप में हुआ है, जहाँ समाज की पितृसत्तात्मकता को प्रश्नगत किया गया है। प्रस्तुत चयन में सीता और सीता के बहाने संवाद करती कविताओं को शामिल किया गया है।

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अग्नि में बैठकर अपने आपको पति-प्राणा प्रमाणित करने वाली स्फटिक-सी स्वच्छ सीता में, नारी की अनंत युगों की वेदना साकार हो गई है।

महादेवी वर्मा
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सीता की जीनवगाथा से तादात्म्य प्राप्त करने वाले भवभूति के उत्तररामचरित की करुणा, सीता को दुःख देनेवाले व्यक्ति के प्रति—कवि की मानवता का विरोध-भाव था।

गजानन माधव मुक्तिबोध
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प्रेम की चरम परिणति दांपत्य में, स्त्री-पुरुष के प्रेम में प्रस्फुटित होती है। स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के सहभाव से परिपूर्ण बनते हैं, यही बात सीता और राम के प्रसंग में वाल्मीकि ने कई बार कही है।

राधावल्लभ त्रिपाठी
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रामायण में सीता राम के लिए पाथेय और प्राप्तव्य ही नहीं, वह उसके जीवन की संपूर्ण नियति को निर्धारित करने वाली सजीव शक्ति है।

राधावल्लभ त्रिपाठी
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सीता, तारा और मंदोदरी, पुरुषों के वर्चस्ववाले समाज में अपने वाणी की ऊर्जा से अपने लिए स्थान बनाती हैं।

राधावल्लभ त्रिपाठी
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मनुष्यता के मूल्यों का सर्वोच्च परिपाक, सीता के चरित्र में हुआ है। सीता समग्र मनुष्यता की प्रतीक है।

राधावल्लभ त्रिपाठी
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राम और सीता के जीवन की करुणा में समस्त ब्रह्माण्ड समाया-सा लगता है।

राधावल्लभ त्रिपाठी
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राम का निर्वासन वस्तुतः सीता का दुहरा निर्वासन है।

विद्यानिवास मिश्र
  • संबंधित विषय : राम
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राम तो लौटकर राजा होते हैं, पर रानी होते ही सीता राजा रामद्वारा वन में निर्वासित कर दी जाती हैं।

विद्यानिवास मिश्र
  • संबंधित विषय : राम
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सीता पतिपरायणा और उदात्त चेतना से संवलित नारी हैं।

राधावल्लभ त्रिपाठी
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सीता नारी है इसलिए वह चीज़ों की परख तथा निर्णय; तर्क और ऊहापोह द्वारा नहीं, अनुभूति और संवेदना से करती है।

राधावल्लभ त्रिपाठी

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