देश पर निबंध
देश और देश-प्रेम कवियों
का प्रिय विषय रहा है। स्वंतत्रता-संग्राम से लेकर देश के स्वतंत्र होने के बाद भी आज तक देश और गणतंत्र को विषय बनाती हुई कविताएँ रचने का सिलसिला जारी है।
दो पृष्ठभूमियाँ—भारतीय और अँग्रेज़ी
भारत में अगस्त सन् 1942 में जो कुछ हुआ, वह आकस्मिक नहीं था। वह पहले से जो बहुत कुछ होता आ रहा था उसकी चरम परिणति थी। इसके बारे में आक्षेप, आलोचना और सफ़ाई के रूप में बहुत कुछ लिखा जा चुका है और बहुत सफ़ाई दी जा चुकी है। फिर भी इस लेखन में से असली बात
जवाहरलाल नेहरू
समाचार पत्र या अख़बार किसे कहते हैं
समाचार पत्र को जिसे प्राय: अन्य ऐसे मनुष्य कि जो भलीभाँति इसके स्वाद से वंचित हैं, केवल यही समझ लिया है, कि कलकत्ते में एक लड़की हुई जिसके एक सींग, दो नाक, तीन हाथ, चार पैर और पाँच आँखें हैं। ऐसी-ऐसी बेसिर-पैर की ख़बरें और समाचार पंसारियों की पुड़ियाँ बाँधने
बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन'
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere