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देश पर गीत

देश और देश-प्रेम कवियों

का प्रिय विषय रहा है। स्वंतत्रता-संग्राम से लेकर देश के स्वतंत्र होने के बाद भी आज तक देश और गणतंत्र को विषय बनाती हुई कविताएँ रचने का सिलसिला जारी है।

जाग तुझको दूर जाना

महादेवी वर्मा

आह्वान

अशफाक़उल्ला खाँ

कार्नेलिया का गीत

जयशंकर प्रसाद

कि आपन देसे भइल बिदेस!

तैयब हुसैन पीड़ित

ई देश ककर?

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

नङटे नाचत देश

मार्कण्डेय प्रवासी

हट चूड़ी पहन ले कलइया में

रामजियावान दास ‘बावला’

आब चुप रहने चलत नहि काज

मार्कण्डेय प्रवासी

जब से भइल बा पंचकुटी सरकार हो

रामजियावान दास ‘बावला’

जिनगी बा मौत के मकान में

तैयब हुसैन पीड़ित

दगधल लगइत देश अछि

मार्कण्डेय प्रवासी

जय हे

अमित पाठक

देश के लाल

भोलानाथ गहमरी

नारों की खेती को सारा हिंदोस्तान

हरिहर प्रसाद चौधरी ‘नूतन’

भारत

गोपालशरण सिंह

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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