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Maithilisharan Gupt

1886 - 1964 | جھانسی, اتر پردیش

کی

باعتبار

सच्चा धन तो है बस धर्म, जो हिंदू का जीवन मर्म।

धन-रूपी फल का परिश्रम ही मूल है।

  • विषय :

दोषदर्शी होता है द्वेष।

है मरण से भी बुरा अपमान होना लोक में।

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अभिव्यक्ति की कुशल शक्ति ही तो कला।

  • विषय :
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युद्ध परिसीमा है परत्व के विकास की।

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जो है आत्मविश्वासी वही तो अस्तिवादी है।

  • विषय :
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सिद्ध एक पुरुषार्थ हमारी भुक्ति-मुक्ति का मंत्र।

गिरना क्या उसका उठा ही नहीं जो कभी?

शिष्ट है वही जो कर्म कौशल विशिष्ट है।

  • विषय :

बाण से भी वचन का होता भयंकर घाव है!

  • विषय : 1

हा! अर्थ, तेरे अर्थ हम करते अनेक अनर्थ हैं।

  • विषय :

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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