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Alexander Pope

1688 - 1744 | لندن

کی

باعتبار

सच्ची मित्रता के नियम इस सूत्र में अभिव्यक्त हैं- आने वाले अतिथि का स्वागत करो और जाने वाले अतिथि को जल्दी विदा करो।

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अल्प ज्ञान ख़तरनाक वस्तु है।

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जैसे-जैसे हम ज्ञान पाते हैं, हम अपने पिताओं को मूर्ख समझते हैं। निस्संदेह हमारे अधिक बुद्धिमान पुत्र हमें भी ऐसा ही समझेंगे।

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जो भी किसी निर्दोष कृति को देखना चाहता है, वह ऐसी वस्तु की बात सोचता है जो तो कभी थी, है और कभी होगी।

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ग़लती करना मानवीय है किंतु क्षमा करना दिव्य है।

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क्रुद्ध होने का अर्थ है दूसरों की ग़लतियों का स्वयं से प्रतिशोध लेना।

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भूल करना मानवीय है, क्षमा करना दैवी है।

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अनुचित प्रशंसा प्रच्छन्न अपकीर्ति ही है।

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ईमानदार मनुष्य ईश्वर की सर्वोत्तम रचना है।

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मूर्ख वहाँ दौड़कर जाते हैं जहाँ देवदूत चलने में भय खाते हैं।

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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