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आत्म-प्रेम के बारे में बहुत कुछ कहा गया है, लेकिन चलिए इसे स्पष्ट करते हैं:- ये स्वार्थ नहीं है, ये ठीक उसका उल्टा है।
जब तुम ख़ुशी, मक़्सद और जुनून से भरी ज़िंदगी जीने के लिए उठने का फ़ैसला करोगे तो हर कोई तुम्हारे साथ नहीं उठेगा। यह तुम्हारी ग़लती नहीं है, और इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं कि तुम्हें ख़ुद को छोटा करना होगा ताकि वे सहज महसूस कर सकें।
उन लोगों के लिए बार-बार उपलब्ध होना बंद करो, जिन्हें तुम्हारे होने में कोई दिलचस्पी नहीं।
जितना ज़्यादा तुम ख़ुद को उस भूमिका में फ़िट करने की कोशिश करते हो, उतना ही तुम उन रिश्तों और उस समुदाय से दूर होते हो, जो सच में तुम्हारे लिए बने हैं।
तुम सच्ची दोस्ती, असली जुड़ाव, अडिग प्रेम के हकदार हो और जब तुम उसे चुनते हो तो दुनिया बदल जाती है।
अगर तुम कोशिश करना बंद कर दो, तो शायद रिश्ता अपने आप फीका पड़ जाएगा।
तुम यहाँ किसी को ठीक करने, बचाने या ख़ुद को साबित करने नहीं आए हो।
तुम सबके लिए नहीं हो और सब तुम्हारे लिए नहीं हैं—यही बात असली लगाव को इतना दुर्लभ और क़ीमती बनाता है।
जो तुम्हें प्रेम करने के लिए तैयार नहीं हैं, उन्हें छोड़ना—शायद सबसे कठिन, और ज़रूरी काम होगा जो तुम कभी करोगे।
अगर तुम मैसेज भेजना बंद कर दो, तो फ़ोन शायद ख़ामोश ही रहेगा। यह अस्वीकृति नहीं है, यह स्पष्टता है। इसका मतलब है कि वह सम्बन्ध केवल इसलिए ज़िंदा था क्योंकि तुम उसे ज़िंदा रखे हुए थे, अकेले।
अगर कोई तुम्हें नज़रअंदाज़ करता है, अपमान करता है, या भूल जाता है—तो उनके लिए अपना समय और अपनी ऊर्जा ख़र्च करना बंद करो।
उन्हें ही सिर्फ़ अंदर आने दो, जो तुम्हारी आत्मा से मेल खाते हैं।
उन लोगों से प्रेम पाने के लिए, जो उसे देने में ही सक्षम नहीं हैं—उनके लिए ख़ुद को ख़र्च करना बंद करो।
उन लोगों के साथ कठिन बातचीत करना बंद करो जो कभी बदलना नहीं चाहते।
अगर तुम कॉल करना बंद कर दो तो शायद कोई वापस कॉल नहीं करेगा।
तुम यहाँ हो,पूरी तरह जीने के लिए, प्यार देने और पाने के लिए—पूरी तरह।
उन लोगों को छोड़ दो, जो तुम्हें प्यार करने के लिए तैयार नहीं हैं।
तुम्हारा समय और तुम्हारी ऊर्जा, सबसे कीमती चीज़ें हैं जो तुम्हारे पास हैं। उन्हें बुद्धिमानी से लगाओ। तुम उन्हें जहाँ ख़र्च करते हो, वही तुम्हारी पूरी ज़िंदगी की दिशा तय करेगा।
जो तुम्हें प्यार नहीं कर सकता, उस इंसान से प्रेम पाने के लिए जितना ज़्यादा तुम लड़ते हो, उतना ही तुम उन लोगों से वक्त छीन रहे हो—जो तुम्हें प्रेम कर सकते हैं, जो करेंगे।