आदमी फ़िल्मी अभिनेता हो या नेता, तभी वह इच्छा-मात्र से रो सकता है।
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मक्कार आदमी को अपनी भावनाओं पर जो अधिकार होता है, वह किसी बड़े योगी के लिए भी कठिन है। उसका दिल रोता है मगर होंठ हँसते हैं, दिल ख़ुशियों से मज़े लेता है मगर आँखें रोती हैं, दिल डाह की आग से जलता है, मगर ज़ुबान से शहद और शक्कर की नदियाँ बहती हैं।
लोग जितना बदल सकते हैं, वे उससे कहीं ज़्यादा आसानी से रो सकते हैं।
रोकर दुख कम करना कायरों का काम है। दुख हमारी रीढ़ है।
मैं रोती नहीं हूँ। दुर्भाग्यवश, मुझे रोना कम आता है, इसलिए मेरे दुख मेरे अंदर ही रहते हैं।
आँख में आँसू उन्हीं अकुटिल सीधे सत्पुरुषों के आता है, जिनके सच्चे सरल चित्त में कपट और कुटिलाई ने स्थान नहीं पाया है।
मेरे ग्रंथों में मेरी आत्मा रोती है और उसके रोने को जो कोई सुनता है, वही मेरा सच्चा मित्र है।
पत्थर भी रोने लगता है और वज्र का हृदय भी टुकड़े-टुकड़े हो जाता है।
मनुष्य की सच्ची परीक्षा विपत्ति में ही होती है और घाव रोने-धोने से कभी नहीं भरा करते।
हँसो, किंतु विद्रूप में नहीं। रोओ, किंतु आसक्ति में नहीं—प्यार में, प्रेम में। बोलो, किंतु आत्मप्रशंसा या ख्याति विस्तार के लिए नहीं।
बारिश में चलना मुझे हमेशा पसंद है, ताकि मुझे रोते हुए कोई न देख सके।
गंभीर हाथी मदमस्त होकर अपनी मौज से चला जा रहा है। हे राजिया! कुत्ते क्यों रो-रोकर भौंकते है?
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere