Font by Mehr Nastaliq Web

स्मरण पर उद्धरण

quote

पत्रकार और साहित्यकार की हैसियत से लिखे गए रघुवीर सहाय के लेखों में, रघुवीर सहाय की विनोदप्रियता का भले ही कोई प्रमाण मिलता हो—उसके साहित्य-संस्कृति-प्रेम का परिचय भरपुर मिलता है।

मनोहर श्याम जोशी
quote

आदमी उसी चीज़ का स्वप्न देखता है; जो कभी पहले थी, जो आज भी कहीं छिपी है। हम उसकी दी हुई मौजूदगी को एक गुज़री हुई याद की तरह महसूस करते हैं—नॉस्टेल्जिया की तरह नहीं, बल्कि एक छिपे हुए ज़ख़्म की तरह।

निर्मल वर्मा
quote

धूमधाम से क्या प्रयोजन? जिनकी हम पूजा करते हैं, उन्हें तो हृदय में स्मरण करना ही पर्याप्त है। जिस पूजा में भक्तिचंदन और प्रेमकुसुम का उपयोग किया जाए, वही पूजा जगत् में सर्वश्रेष्ठ है। आडंबर और भक्ति का क्या साथ?

सुभाष चंद्र बोस
quote

रघुवीर आजीवन ठीक-ठाक-यह-भी-नहीं-लेकिन-ठीक-ठीक-वह-भी नहीं वादी, बल्कि—वादी-हाँ-लेकिन-वादी इत्यादि-इत्यादि रहा।

मनोहर श्याम जोशी
quote

काम पूरा हो जाने पर कोई भी उसके करने वाले को नहीं देखता—हित पर ध्यान नहीं देता, अतः सभी कार्यों को अधूरे ही रखना चाहिए।

वेदव्यास
quote

हे भगवान्! आपने अपने बहुत नाम प्रकट किए हैं, जिनमें आपने अपनी सब शक्ति भर दी है और आपने उनके स्मरण के लिए कोई काल भी सीमित नहीं किए हैं। आपकी ऐसी कृपा है परंतु मेरा ऐसा दुर्भाग्य है कि इस जीवन में मुझमें कोई भक्ति नहीं है।

चैतन्य महाप्रभु
quote

जिसकी स्मरण-शक्ति अत्यंत प्रखर है; वह किसी विषय का यथार्थ, हू-ब-हू विवरण दे देता है।

अवनींद्रनाथ ठाकुर
quote

वह उत्तर प्रदेश जिसे मैं अपनी थाती समझकर प्यार करता था–सिर्फ़ किताबों में बचा है। मुझ तक वह पहुँचा भी किताबों के रास्ते था।

कृष्ण कुमार
quote

स्याही और गोंद, काग़ज़ और लिफ़ाफ़ा और उस पर लगे टिकट—मेरी स्मृतियों में उतने ही ज़िंदा हैं जितना हमारे मुहल्ले का डाकिया।

कृष्ण कुमार
  • संबंधित विषय : डाक
quote

अवलोकन, संभाषण, विलास, परिहास, क्रीड़ा, आलिंगन तो दूर रहे, स्त्रियों का स्मरण भी मन को विकृत करने में पर्याप्त है।

कृष्ण बिहारी मिश्र
quote

प्रेम के बिना श्रुति, स्मृति, ज्ञान, ध्यान, पूजन, श्रवण, कीर्तन सब व्यर्थ है।

संत एकनाथ
quote

वाणी से राम नाम लेते हुए यदि मन विषय की ओर दौड़े तो इसे भगवान का स्मरण नहीं वरन् विस्मरण समझना चाहिए।

संत एकनाथ
quote

इसमें शक नहीं कि डाक टिकटों की गिनती, मेरे क़स्बाई बचपन को सजाने-महकाने वाली उन चीज़ों में थी जिन्हें याद करके मुझे गुलज़ार की लिखी 'बंटी और बबली' की पंक्ति 'छोटे-छोटे शहरों से, ख़ाली बोर दुपहरों से—ग़लत और अपमानजनक लगती है।

कृष्ण कुमार
  • संबंधित विषय : डाक
quote

देवीशंकर अवस्थी का रचना-संसार छोटा, पर बड़ा वैविध्यपूर्ण है।

श्रीलाल शुक्ल
quote

यशपाल की शोक-सभाओं में बुद्धिजीवी अपनी मेज़ें छोड़कर पहुँच गए थे, पर बाज़ार का कोई भी कोना बंद नहीं हुआ था।

श्रीलाल शुक्ल

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए