लोगों को चाहिए शैतान जिस पर वे विश्वास कर सकें—एक सच्चा, भयानक दुश्मन। एक शैतान जिसके वे ख़िलाफ़ हो सकें। नहीं तो, सब कुछ हम-बनाम-हम है।
जो व्यक्ति अपनी गोपनीयता खो देता है, वह सब कुछ खो देता है; और जो आदमी जो इसे अपनी मर्ज़ी से त्याग देता है, वह राक्षस है।
शैतान की मौत कल्पना के लिए त्रासदी थी।
तुम्हारे अंदर भी एक शैतान है, पर तुम उसका नाम अभी नहीं जानते; और चूँकि तुम यह नहीं जानते, तुम साँस नहीं ले सकते। उसका बपतिस्मा कर दो, मालिक, और तुम बेहतर महसूस करोगे।
मेरा मानना है कि विचारधारा में फंसे लोग शैतान हो सकते हैं।
सभी द्वैतवादी सिद्धांतों के साथ पहली कठिनाई यह है कि असंख्य सद्गुणों के भंडार, न्यायी तथा दयालु ईश्वर के राज्य में इतने कष्ट कैसे हो सकते हैं? यह प्रश्न हर द्वैतवादी धर्म के समक्ष है, पर हिंदुओं ने कभी भी इसे सुलझाने के लिए शैतान की कल्पना नहीं की।
जो ख़ुदा का यानी ईश्वर का दुश्मन है, वह राक्षस है।
चिढ़ाने का नाम वह भारी से भारी पत्थर है जो शैतान किसी व्यक्ति पर फेंक सकता है।
दुर्भिक्ष में जब दल के दल आदमी मर रहे हों तब कोई उसे प्रहसन का विषय नहीं समझता, लेकिन हम सहज ही कल्पना कर सकते हैं कि यह एक मसख़रे-शैतान के लिए बड़े कौतुक का दृश्य है।
अपने शैतान अहंकारी अहमक 'मै' को निकाल बाहर करो; परमपिता की इच्छा पर तुम चलो, अदृष्ट कुछ भी नहीं कर सकेगा। परमपिता की इच्छा ही है अदृष्ट।
शैतान एक ऐसी शक्ति है जो हम पर बाहर से हमला नहीं करती, बल्कि हमारी अंतरात्मा की आवाज़ के जरिए हमें भटकाती है। अगर हम ख़ुद को सही तरीके से पहचान लें, तो हम शैतान का सामना कर सकते हैं और उसे हरा भी सकते हैं।
-
संबंधित विषय : आत्मविश्वास
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere